आयरलैंड के पूर्व राष्ट्रपति से मिलकर लौटे देवसंस्कृति विवि के प्रतिकुलपति

Published on 2016-06-18

अखिलविश्व गायत्री परिवार के संस्थापक पं. श्रीराम शर्मा आचार्य एवं माता भगवती देवी शर्मा के भारतीय संस्कृति और अध्यात्म के सन्देश को लेकर यूरोपीय देशों में गये देवसंस्कृति विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति डॉ. चिन्मय पण्ड्या स्वदेश लौटे। इस प्रवास में डॉ. चिन्मय जी का आयरलैंड की पूर्व राष्ट्रपति मैरी मैकएलीज से भेट हुई। मैकएलीज १९९७ से २०११ तक आयरलैंड की राष्ट्रपति रहीं। वे आयरलैंड की ऐसी प्रथम महिला राष्ट्रपति हैं जो अलास्टा से आयी थीं और दूसरे कार्यकाल के लिए निर्विरोध चुनी गयी थीं। आयरलैंड के इतिहास में इनका कार्यकाल सबसे बड़ा रहा।

अपनी भेटवार्ता के बारे में जानकारी देते हुए डॉ. चिन्मय ने कहा कि मैरी मैकएलीज भारतीय संस्कृति से काफी प्रभावित हैं। अपना पाँच घण्टे से अधिक समय उन्होंने मेरे साथ बिताया। उन्होंने भारतीय संस्कृति की कार्यपद्धति, संस्कार परम्परा, शिक्षा और विद्या के समन्वय के साथ परम पूज्य गुरुदेव पं. श्रीराम शर्मा आचार्य जी के द्वारा स्थापित अखिल विश्व गायत्री परिवार एवं देवसंस्कृति विश्वविद्यालय के कुलाधिपति डॉ. प्रणव पण्ड्या जी तथा देवसंस्कृति विश्वविद्यालय के क्रियाकलापों के बारे में विस्तार से जानकारी ली। मैकएलीज ने देवसंस्कृति विश्वविद्यालय द्वारा विश्व निर्माण हेतु किये जा रहे कार्यों की प्रशंसा की।


मैरी ने गायत्री परिवार के जनक पं. श्रीराम शर्मा आचार्य जी की परिकल्पना पर आधारित शिक्षा ही नहीं विद्या भी एवं धर्म और विज्ञान के समन्वय के बारे जानकर इसे अद्भुत बताया और निकट भविष्य में भारत आकर देवभूमि उत्तराखण्ड में स्थित गायत्रीतीर्थ शांतिकुंज एवं देवसंस्कृति विश्वविद्यालय आने की बात कही।

डॉ. चिन्मय ने कहा कि इस दौरान आयरलैंड के अनेक विश्वविद्यालयों और विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों के साथ आदान- प्रदान पर सकारात्मक चर्चाएँ हुईं। निकट भविष्य में आयरलैंड के विश्वविद्यालयों एवं शैक्षणिक संस्थानों के साथ एमओयू होंगे। डॉ. चिन्मय भारतीय संस्कृति को विश्व भर में फैलाने वाले महापुरुषों की परम्परा पर चलते हुए २५ दिवसीय यूरोपीय प्रवास का शुभारम्भ आयरलैंड से किया। यहाँ से वे कनाडा, लात्विया और इंग्लैंड होते हुए देवभूमि लौटे हैं।

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