Published on 2016-06-19

हरिद्वार,१९ जून। जीवन जीने की भारतीय विधा योग को अब वैश्विक जीवन पद्धति के रूप में मान्यता मिलती जा रही है। यूएनओ ने पिछले वर्ष से २१ जून को योग दिवस के रूप में मनाने का फैसला लिया उसके परिणामस्वरूप आगामी मंगलवार समूचा विश्व योग के रंग मे रंगा होगा। मंगलवार की भोर होते ही गायत्री परिवार के प्रमुख डॉ प्रणव पंड्या जी के आव्हान पर विश्व भर के चार हजार गायत्री सेंटरो के माध्यम से डेढ लाखों स्थानों पर एक साथ योग का प्रदर्शन होगा। यह जानकारी गायत्री परिवार प्रमुख ने आज यहाँ मीडिया को दी।

उल्लेखनीय है कि गायत्री परिवार द्वारा देश भर के विभिन्न विद्यालयों में भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा का आयोजन किया जाता है जिसके विद्यार्थियों की संख्या करोड़ों में है। इन सभी विद्यार्थियों से विश्वयोग दिवस पर होने वाले सामूहिक योग कार्यक्रम से जुड़ने का आह्वान किया है। अण्डमान निकोबार से लेकर दक्षिण के सभी राज्यों सहित पूरे देश के डेढ़ लाख से अधिक स्थानों के लिए गायत्री परिवार एवं देवसंस्कृति विवि की टीम पहुँच गयी और योगाभ्यास का प्रारंभ कर दिया है। वहीं संस्था पोषित देवसंस्कृति विश्वविद्यालय के दो छात्रों को आयुष मंत्रालय द्वारा साउथ आफ्रिका भेजा गया है। भारत सरकार के मुख्य आयोजन में गायत्री परिवार प्रमुख डॉ. पण्ड्या चंडीगढ़ मे प्रधानमंत्री जी के साथ होगे।

पूर्व तैयारियों की समीक्षा करते हुए डॉ पंड्याजी ने कहा कि सदियों से सभी वर्गों के लोग शरीर और मन को एकाकार करने में सहायक योग का अभ्यास करते आए है। डॉ पंड्याजी के मुताबिक, योग विचारों और कर्म को सामंजस्यपूर्ण ढंग से एकाकार करता है और स्वास्थ्य को ठीक रता है, योग पाँच हजार साल पुरानी भारतीय शारीरिक मानसिक और आध्यात्मिक पद्धति है जिसका लक्ष्य शरीर और मस्तिष्क में सकारात्मक परिवर्तन लाना है।




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