यूरोपीय देश लाटविया में गूँजा भारतीय संस्कृति का शंखनाद

Published on 2016-06-19

लाटविया एक ऐसा देश है जहाँ भारतीय संस्कृति के बारे में जानने हेतु लोगों में बहुत उत्कंठा है। इसी के मद्देनजर देवसंस्कृति विश्वविद्यालय एवं लाटविया के विश्वविद्यालय के प्रति अन्तर्राष्ट्रीय सम्बन्धों और पर्यटन पर विशेष अनुबन्ध है। लाटविया द्वारा भारत में प्रथम बॉलटिक सेंटर भी देवसंस्कृति विश्वविद्वालय में स्थापित होने जा रहा है। इसी कड़ी को आगे बढ़ाते हुए लाटविया संसद द्वारा स्थापित विशेष संसदीय प्रतिनिधि मण्डल ने देवसंस्कृति विवि के प्रतिकुलपति डॉ. चिन्मय पण्ड्याजी को विशेष रूप से आमन्त्रित किया। डॉ. चिन्मय अपने यूरोपीय देश की यात्रा के दौरान वहाँ की वरिष्ठ संसदीय प्रतिनिधि मण्डल की बैठक को संबोधित किया जिसमें इन्गुना सुदराबा (चेयर पर्सन- संसदीय दल, लाटविया), उल्दिस लाइल्पीटर (डिप्टी स्टेट सेक्रेटरी, सांस्कृतिक मंत्रालय- लाटविया) एवं मादरा आप्सलोन (प्रमुख, इण्टरनेशनल को- ऑपरेशन एवं ईयू पालिसी डिविजन) जी विशेष रूप से उपस्थित थे।

इस अवसर पर डॉ. चिन्मय जी भारतीय संस्कृति और अध्यात्म के सन्देश को लेकर अपने विचार व्यक्त किये। साथ ही उन्होंने अखिलविश्व गायत्री परिवार शांतिकुंज हरिद्वार व देवसंस्कृति विश्वविद्वालय द्वारा चलाये जा रहे कार्यक्रमों की विस्तृत जानकारी भी साझा की। साथ ही उन्होंने देवसंस्कृति विश्वविद्यालय में बन कर तैयार बॉलिटिक सेंटर में आकर भारतीय संस्कृति पर शोध करने के लिए लाटविया के युवाओं को आवाहन किया। इससे पूर्व डॉ. चिन्मय जी लाटविया विश्वविद्यालय के डिपार्टमेंट ऑफ मेनेजमेंट स्टडीज द्वारा आयोजित अर्थ व्यवस्था में मानवीय उत्कर्ष विषय पर शोधार्थी एवं लाटविया विवि परिवार को संबोधित किया और कहा हमारी अर्थनीति ऐसी होनी चाहिए जो मानवीय उत्कर्ष में सहयोगी बने।



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