Published on 2016-06-25

हरिद्वार २५ जून।

देवसंस्कृति विवि के कुलाधिपति डॉ. प्रणव पण्ड्या जी ने कहा कि राष्ट्र की कुण्डलिनी का जागरण युवा शक्ति के हाथों में है। उन्हें चाहिए कि वे अपनी संकीर्णता को छोडें और समाज, राष्ट्र की कुण्डलिनी को जगाने हेतु आगे आये। उन्होंने कहा कि जिस तरह महाभारत युद्ध के दौरान अर्जुन ने मन की निर्बलता व संकीर्णता से उबरकर समाज व राष्ट्र हित के लिए गांडीव उठाये और युद्ध में सफलता प्राप्त की, कुछ ऐसे ही आज के युवा शक्ति को करने चाहिए।

डॉ. पण्ड्या जी देश के विभिन्न राज्यों के भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा के प्रशिक्षक प्रशिक्षण शिविर एवं भविष्य निर्माता प्रशिक्षण शिविर के संयुक्त प्रतिभागियों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि मनुष्य जीवन के तीन धर्मों में से राष्ट्र धर्म निभाने की इन दिनों नितांत आवश्यकता है। परिस्थितिजन्य कारणों से देश के युवा संकीर्णता के दायरे में आ गये हैं, इससे उबरना होगा और राष्ट्र देवता की आराधना में जुटना होगा। तभी हम भारत माता के सच्चा सपूत कहलायेंगे। उन्होंने युवाओं को दुर्व्यसनों से बचने एवं नियमित रूप से योग करने की अपील की।

मानवीय जीवन को प्रेरित करने वाली गीता को गीता विश्वकोश का रूप देने के लिए संकल्पित कुलाधिपति डॉ. पण्ड्या जी  ने कहा कि यह ग्रंथ अंधेरे में प्रकाश दिखाने वाला है, जिसका विश्वकोश प्रकाशित होने पर सम्पूर्ण संसार इसकी आभा से आलोकित हुए बिना नहीं रहेगा। हमारा प्रयास है कि अपने जीवन काल में जितनी जल्दी हो सके, इसे समाज को समर्पित कर दूँ।

शांतिकुंज के मुख्य सत्संग हॉल में आयोजित इस कार्यक्रम में प्रत्येक प्रदेश के प्रमुख शिक्षाविद् एवं समाजसेवियों ने भागीदारी दर्ज की, जिन्हें अनेक वक्ताओं ने भविष्य के क्रियाकलापों की योजनाबद्ध रूपरेखा समझाई। इस अवसर पर वरिष्ठ कार्यकर्त्ता कपिल केसरी, डॉ. ओपी शर्मा, डॉ. वृजमोहन गौड, डॉ पीडी गुप्ता, केपी दुबे सहित शांतिकुंज के अंतेःवासी कार्यकर्त्ता, देसंविवि परिवार एवं विभिन्न राज्यों से आये प्रशिक्षणार्थी उपस्थित रहे।


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