Published on 2016-07-07


हरिद्वार ७ जुलाई। 

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र, पश्चिम बंगाल एवं उत्तराखण्ड की प्रतिभाशाली बहिनों की पाँच दिवसीय विशेष प्रशिक्षण शिविर का शुभारंभ गुरुवार को गायत्री तीर्थ शांतिकुंज में हुआ। जिसमें महिलाओं की वर्तमान स्थिति से लेकर भविष्य की स्थापनाओं पर विचार मंथन किया जायेगा। शिविर के उद्घाटन सत्र की मुख्य अतिथि शेफाली पण्ड्याजी ने नारी जागरण को वर्तमान समय की सबसे बड़ी आवश्यकता के रूप में परिभाषित किया। 

उन्होंने कहा कि इन दिनों नारियों को अपने सम्मान के लिए, अपने आत्म विश्वास के साथ व्यक्तित्व विकास के आगे बढ़ना होगा, जिससे समाज की रुढ़िवादिता को मिटाकर अपने गौरव- गरिमा के साथ सुनहरा भविष्य का निर्माण कर सके। श्रीमती पण्ड्या ने कहा कि बहिनों को समाज  के विकास में हरसंभव सहयोग करने के लिए आगे आना है। इसके लिए वे अपने व्यक्तित्व के विकास के लिए सद्साहित्यों को नियमित रूप से अध्ययन करें तथा आत्म विश्वास जगाने के लिए सद्बुद्धि की अधिष्ठात्री मां गायत्री की नियमित उपासना करें। ये दो कार्य ऐसे हैं, जो उन्हें आगे बढ़ने मे के लिए संजीवनी की तरह सहयोग करेगा। 

‘नारी जागरण अभियान’ विषय पर बोलते हुए एक अन्य वक्ता श्रीमती अपर्णा पॅवार ने कहा कि सामाजिक परिवर्तन के लिए नारी की विशेष भूमिका होती है। घर परिवार से ऊपर उठकर समाज  के विकास में सहयोग करेंगी, तो समाज अवश्य सुधरेगा। उन्होंने कहा कि मनुष्य के भोगवादी विचारधारा को समाजोत्थान की ओर लगाने में भी नारी सक्षम है। कहा कि आवश्यकता तो है केवल संकल्प शक्ति की और उस दिशा में सार्थक पहल करने की। श्रीमती पॅवार ने समाज की घटित हो रही विभिन्न घटनाओं का जिक्र करते हुए बहिनों को दुष्प्रवृत्तियों, कुरीतियों आदि से मिटाने का सहयोग करने की अपील की। 

महिला मण्डल की प्रमुख यशोदा शर्मा के अनुसार पाँच दिन तक चलने वाले इस शिविर में २२ सत्र होंगे। बहिनों की इस शिविर को विषय विशेषज्ञ बहिनें ही संचालन करेंगी। श्यामा मित्तलजी, दुर्गा देवांगनजी आदि सहित राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र, पश्चिम बंगाल एवं उत्तराखण्ड के विभिन्न जिलों से आयीं बहिनों ने शिविर में अपनी भागीदारी दर्ज की। 


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