Published on 2016-07-28

हरिद्वार 28 जुलाई।

देवसंस्कृति विश्वविद्यालय के 29वें ज्ञानदीक्षा समारोह में नवप्रवेशार्थी समाज और राष्ट्र सेवा की ओर अपना पहला कदम बढ़ाते हुए वैदिक सूत्रों में बंधे। देसंविवि में संचालित 30 विभिन्न कोर्स के लिए रसिया, इटली, लाटविया, श्रीलंका, नेपाल, भूटान सहित भारत के 18 राज्यों के 650 से अधिक छात्र- छात्राओं को दीक्षित किया गया।

ज्ञानदीक्षा समारोह के मुख्य अतिथि आईसीसीआर के डायरेक्टर जनरल सी. राजशेखर ने कहा कि भारतीय संस्कृति के संवाहक देवसंस्कृति विवि ने ज्ञान दीक्षा समारोह के माध्यम से नवप्रवेशी विद्यार्थियों को उनके लक्ष्य में अडिग रहने के जो संकल्प दिलाया है, वह अतुलनीय है। उन्होंने कहा कि देवभूमि हिमालय ऊर्जा का स्रोत है और उसके गोद में बसे देसंविवि ने विद्याध्ययन एवं आत्म ज्ञान प्राप्त करने का संयुक्त रूप से जो अवसर प्रदान करता है, उसका पल- पल का सदुपयोग करेंगे, तो निश्चित ही आप सभी को सफलता मिलेगी। श्री राजशेखर ने कहा कि विद्यार्थी जीवन में ऊँचे सपने देखें, श्रेष्ठ संकल्प लेकर आगे बढ़ें और आत्म अनुशासन के साथ चलें तो मानव से देवमानव की श्रेष्ठ से श्रेष्ठतर स्थिति में पहुँच सकते हैं। मुख्य अतिथि ने स्वामी विवेकानंद, महात्मा गाँधी, सेवादास आदि महापुरुषों के संकल्प, अनुशासन को याद करते हुए उनकी सफलता की कहानी का मार्मिक ढंग से प्रस्तुत किया।

अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कुलाधिपति डॉ. प्रणव पण्ड्याजी ने कहा कि शिक्षा एवं विद्या के समवन्य से ही मनुष्य जीवन ऊँचा उठता है और राष्ट्र को ऊँचा उठाने के लिए वैज्ञानिक अध्यात्मवाद की महती आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि विद्या संस्कृति, ज्ञान एवं आध्यात्मिकता का समावेश करना सिखाता है, तो वहीं शिक्षा विज्ञान, भौतिकता एवं सभ्यता का परिचय कराता है। उन्होंने ईशोपनिषद्, गीता आदि ग्रंथों का उल्लेख करते हुए सफलता के विविध सूत्र बताये। कुलाधिपति डॉ. पण्ड्या ने संकल्पशक्ति के धनी डॉ. अब्दुल कलाम, स्वामी विवेकानंद, नचिकेता तथा अपने आचरण से शिक्षा देने वाले पूज्य पं० श्रीराम शर्मा आचार्य जैसे महापुरुषों को अपने रोल मॉडल बनाने की बात कही। कुलपति श्री शरद पारधी ने स्वागत भाषण एवं प्रतिकुलपति डॉ. चिन्मय पण्ड्या ने ज्ञानदीक्षा की पृष्ठभूमि के बारे में विस्तार से बताया।

इससे पूर्व समारोह का शुभारंभ अतिथियों ने दीप प्रज्वलन कर किया। प्रज्ञागीत के बाद देसंविवि के कुलपति श्री शरद पारधी ने अतिथियों का स्वागत किया। शांतिकुंंज के विद्वान आचार्यों ने नवप्रवेशार्थी छात्र- छात्राओं को वैदिक कर्मकाण्ड से ज्ञानदीक्षा दिलाई। कुलाधिपति डॉ. पण्ड्याजी ने उन्हें ज्ञानदीक्षा के संकल्प से संकल्पित कराया। विवि की ई- न्यूज पेपर ‘रेनासा’ एवं दो रिसर्च जर्नल का अतिथियों ने विमोचन किया। समापन से पूर्व कुलाधिपति डॉ. पण्ड्याजी ने आईसीसीआर के डायरेक्टर जनरल श्री राजशेखर व अन्य अतिथियों को देसंविवि का स्मृति चिह्न भेंट किया। इस अवसर पर देसंविवि के सभी विभागाध्यक्ष, प्रोफेसर, शांतिकुंज परिवार तथा देश के कोने- कोने से आये विद्यार्थी एवं उनके अभिभावकगण उपस्थित रहे।




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