Published on 2016-08-03


देवसंस्कृति विश्वविद्यालय और ज्ञानसिटी डेनमार्क के बीच एमओयू हुआ। इसके अंतर्गत शोध के नए आयामों, स्कॉलरशिप, कॉफ्रेन्स, सेमीनार, शैक्षिक व शिक्षण तकनीकों इत्यादि के क्षेत्र में कार्य करने को लेकर सहमति बनी है। दोनों संस्थाओं में आपसी सामंजस्य के अनुसार शोध के विभिन्न क्षेत्रों में ज्ञान के विविध आयामों पर विचारों का आदान प्रदान किया जाएगा। एमओयू में देसंविवि के कम्प्यूटर विभागाध्यक्ष प्रो. अभय सक्सेना एवं ज्ञानसिटी डेनमार्क के डायरेक्टर विश्वजीत पाण्डेय ने साइन किये।

उल्लेखनीय है कि देवसंस्कृति विश्वविद्यालय मात्र १४ वर्ष की अवधि में योग, शिक्षा, शोध, सेवा और विभिन्न उपलब्धियों के अनेक कीर्तिमान गढ़े हैं। यहाँ की वैचारिक क्रांति विभिन्न देशों को आलोकित कर रही है। विवि के विद्यार्थी विभिन्न देशों में भारतीय संस्कृति एवं देसंविवि में मिली विद्या से जन- जन की विचारधारा को बेहतर बनाने में जुटे हैं। इन्हीं उपलब्धियों से प्रभावित हो ज्ञानसिटी डेनमार्क के डायरेक्टर विश्वजीत पाण्डेय देसंविवि पहुँचे जहां उन्होंने एम.ओ.यू. हस्ताक्षरित किये। उन्होंने विवि के अभिनव प्रयोगों को ज्ञानसिटी के साथ मिलकर नई उपलब्धियाँ गढ़ने की दिशा में कदम आगे बढ़ाने की बात कही।

इस अवसर पर प्रतिकुलपति डॉ. चिन्मय पण्ड्या ने कहा कि इस समझौते से तकनीकी एवं ज्ञान- विज्ञान के क्षेत्र में नए विचारों को शोधात्मक दृष्टि से देखकर उसे समाज के उपयोग हेतु विकसित करेंगे। श्रद्धेय कुलाधिपति डॉ. प्रणव पण्ड्याजी जी ने अपने आशीवर्चन देते हुए कहा कि प्रकृतिगत ज्ञान और तकनीकी समन्वय ही व्यक्ति व समाज को परिमार्जित कर सकता है। ज्ञानसिटी डेनमार्क से मिलकर इन्टरनेशनल जनरल्स का प्रकाशन भी इस एम.ओ.यू. का मुख्य हिस्सा है। इसे कुलाधिपति जी ने अभूतपूर्व प्रयास बताया।

ज्ञानसिटी डेनमार्क के डायरेक्टर विश्वजीत पाण्डेय ने कहा कि देसंविवि व ज्ञानसिटी मिलकर ज्ञान एवं विभिन्न आयामों को वैज्ञानिक तकनीकी से शोध करेगा और उसे समाज के सामने लाया जायेगा। श्री पाण्डेय इटली के नेशनल इन्स्टीटयूट ऑफ यूरो फिजिक्स विभाग से भी जुड़े है। उल्लेखनीय है कि देसंविवि ने अब तक अर्जेन्टिना, जर्मनी, इटली, स्विटजरलैण्ड, रशिया, लाटविया, अमेरिका, इंग्लैण्ड,चीन सहित १५ से अधिक देशों के शैक्षणिक संस्थानों से एमओयू किये हैं।


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