Published on 2016-08-07

देवभूमि उत्तराखण्ड के अब तक के इतिहास में यह पहला मौका है कि जब किसी संस्थान में तीन देशों के राजदूतों, राज्य के राज्यपाल ने कुलाधिपति की अध्यक्षता वाले किसी कार्यक्रम में शिरकत की है। यह कीर्तिमान देवसंस्कृति विश्वविद्यालय में एशिया का प्रथम बाल्टिक सेंटर के उद्घाटन समारोह में गढ़ा गया। इस सेंटर के माध्यम से विश्व संस्कृति एवं शिक्षा को बाल्टिक देशों के सदस्य लात्विया, एस्टोनिया एवं लिथुआनिया देशों में विस्तार मिलेगा।

हरा समुद्र के निकट बसे लात्विया, एस्टोनिया एवं लिथुआनिया देशों में अन्य संस्कृतियों के प्रति जिज्ञासा होने के कारण एशिया के इस पहले केन्द्र को आशा भरी नजरों से देखा जा रहा है। ऐसे में देवनगरी से होने वाला शंखनाद देवसंस्कृति को जन जन तक पहुँचाने वाले सन्देश वाहक का संकेत माना जा रहा है।

लात्विया के राजदूत माननीय एवरिस ग्रोजा, एस्टोनिया के राजदूत माननीय रिहो क्रुव, लिथुआनिया के राजदूत माननीय लैमोनास तलत-केल्प्सा एवं लात्विया विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. इना द्रुविते एवं उत्तराखण्ड के राज्यपाल महामहिम डॉ. केके पॉल, देसंविवि के कुलाधिपति डॉ. प्रणव पण्ड्याजी ने देवसंस्कृति विश्वविद्यालय परिसर में स्थापित बाल्टिक सेंटर का संयुक्त उद्घाटन किया। इसके उपरांत अतिथियों सहित कुलाधिपति महोदय ने विश्वविद्यालय परिसर में स्थापित मृत्युजंय सभागार में आयोजित उद्घाटन समारोह की गरिमा बढ़ाई।


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