Published on 2016-08-18
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हरिद्वार, १८ अगस्त। 

देवसंस्कृति विवि एवं अखिल विश्व गायत्री परिवार के लाखों लोगों ने अपनी आराध्य गुरुसत्ता पं. श्रीराम शर्मा आचार्यश्री के सपनों को साकार करने के उद्देश्य से श्रावणी पर्व पर रक्षा सूत्र धारण किये। युगऋषि आचार्यश्री की सुपुत्री एवं शांतिकुंज अधिष्ठात्री श्रद्धेया शैल दीदी ने कोने- कोने से आये एवं आश्रमवासी भाइयों की कलाई में रक्षा- सूत्र बाँधे तथा सभी को पर्व की हार्दिक शुभकामनाएँ दीं। 


इस अवसर पर शांतिकुंज अधिष्ठात्री श्रद्धेया शैल दीदी ने कहा कि रक्षासूत्र मात्र कच्चा धागा होता है, लेकिन इसमें जब श्रद्धा- भावना की शक्ति का समावेश हो जाता है, तो यह सामान्य धागा नहीं रहता। यह इतना मजबूत हो जाता है, जिसे तोड़ना नामुमकिन हो जाता है। देवसंस्कृति विवि के कुलाधिपति श्रद्धेय डॉ. प्रणव पण्ड्याजी ने कहा कि राखी ने अनगिनत शत्रुओं को मित्र बनाकर परस्पर सुख- दुःख झेलने को विवश किया। देसंविवि, शांतिकुंज व देश के कोने- कोने से आई बहिनों ने डॉ. पण्ड्याजी को राखी बांधीं। 


इससे पूर्व प्रातः दस स्नान एवं हेमाद्रि संकल्प का आयोजन हुआ। पर्व का महत्त्व एवं प्रेरणा के विषय पर प्रकाश डालते हुए संस्कार आचार्य ने कहा कि दसस्नान द्वारा अन्तःकरण पर जमे कषाय- कल्मषों को धोने तथा यज्ञोपवीत परिवर्तन से उसके गुणों को पुनः धारण करने के लिए संकल्पित हुआ जाता है। पश्चात् शांतिकुंज की ब्रह्मवादिनी बहिनों ने 27 कुण्डीय यज्ञशाला में गायत्री महायज्ञ में विश्व कल्याण के लिए विशेष वैदिक मंत्रों के साथ यज्ञ संपन्न कराया। सायंकाल भव्य दीपमहायज्ञ भी संपन्न हुआ। 


उधर शांतिकुंज स्थित उद्यान विभाग के सहयोग से देसंविवि के विद्यार्थियों ने तीर्थ नगरी के विभिन्न आश्रमों सहित नगर के अन्य स्थानों पर छायादार व फलदार पौधे रोपे।


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