Published on 2016-08-26


अखिल विश्व गायत्री परिवार प्रमुख डॉ. प्रणव पण्डयाजी ने कहा कि जन्माष्टमी पर्व का औचित्य तभी सार्थक होगा, जब हम श्रीकृष्ण को आदर्श बनाकर कुरीतियों के विरुद्ध शंखनाद करेंगे और यह काम युवा शक्ति को अपने मजबूत हाथों में लेना पड़ेगा। युवाओं में असंभव को संभव कर देने वाली शक्ति होती है। युवा बाधाओं को चिरकर सुगम  राह बनाता है। उन्होंने कहा कि युवा भाग्य पर नहीं, कर्म पर विश्वास करे, ऐसे युवाओं की आज महती आवश्यकता है। 

वे शांतिकुंज के मुख्य सभागार में आयोजित पांच दिवसीय भविष्य निर्माता शिविर के उद्घाटन दिवस के अगले प्रभात में संबोधित कर रहे थे। उन्होंने गीता के विभिन्न श्लोकों के माध्यम से कर्तव्य परायण, शालीन, कर्मयोगी आदि युवा की परिभाषा दी। डॉ. पण्ड्याजी ने कहा कि जिस तरह श्रीकृष्ण ने अर्जुन को उनके असंमजस, भटकाव  की स्थिति से उबारते हुए उन्हें निष्काम कर्म करने के लिए प्रोत्साहित किया, उसी तरह पूज्य गुरुदेव पं० श्रीराम शर्मा आचार्य के निर्देशानुसार आज के युवाओं को भटकाव से बचाने के लिए गायत्री परिवार ने युवा जोड़ों अभियान की शुरुआत की है। इसमें देश- विदेश के युवाओं को जोड़ते हुए उन्हें सकारात्मक दिशा देने का प्रयास किया जा रहा है। अब तक लाखों युवा इस अभियान से जुड़ चुके हैं। उन्होंने कहा कि युवा अवस्था शारीरिक नहीं, अपितु मानसिक अवस्था है। तुलसीदास, सातवलेकर आदि की विभिन्न उदाहरणों से युवावस्था की उत्साह, उमंग आदि सद्प्रवृत्तियों का उल्लेख किया। 

डॉ. पण्ड्याजी ने युवा क्रांति वर्ष- १६ के तहत चलाये जा रहे पाँच महाभियान- युवा जाग्रति अभियान, वृक्षागंगा जन अभियान, ग्राम तीर्थ योजना, बाल संस्कार शाला एवं भागीरथ जलाभिषेक अभियान को गति देने के विविध पहलुओं की जानकारी दी। डॉ. पण्ड्याजी ने भागीरथ जलाभिषेक के अंतर्गत पतित पावनी गंगा, उनके सहायक नदियों के साथ छत्तीसगढ़ की महानदी, शिवनाथ, हसदो, अरपा आदि नदियों को भी शुद्ध एवं अविरल बनाने के लिए युवाओं का आवाहन किया, साथ ही उन्होंने सभी आगन्तुकों को जन्माष्टमी की शुभ कामनाएँ दीं। 

इससे पहले प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए डॉ. वृजमोहन गौड़ ने जनमानस को रचनात्मक दिशा देने के लिए गाँव- गाँव, घर- घर जाने की बात कही। उन्होंने सभ्य, शालीन, स्वावलंबी युवाओं को गढ़ने की दिशा में सामूहिक प्रयास करने पर जोर दिया। शिविर समन्वयक श्री गंगाधर चौधरी ने बताया कि इस शिविर में रायपुर, बिलासपुर, राजनांदगांव, कोरबा, दुर्ग, बस्तर सहित छत्तीसगढ़ प्रांत के सभी २७ जिलों के ६५० से अधिक भाई- बहिन शामिल हैं। इस अवसर पर शांतिकुंज व ब्रह्मवर्चस शोध संस्थान के अनेक वरिष्ठ कार्यकर्त्ता और वैज्ञानिक भी उपस्थित रहे।




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