भारतीय योग विश्व की सांस्कृतिक धरोहर घोषित

Published on 2016-12-02

१६० देशों का समर्थन मिलना देश के लिए गौरव की बात डॉ. चिन्मय पण्ड्याजी

• यूनेस्को द्वारा लिया गया सामूहिक निर्णय
• इथियोपिया में आयोजित हुआ निर्णायक सम्मेलन
• शांतिकुंज प्रतिनिधि डॉ. चिन्मय पण्ड्याजी ने किया भारत का प्रतिनिधित्व

संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा भारतीय योग को वैश्विक धरोहर घोषित कर दिया गया है। यूनाईटेड नेशन कन्वेंशन सेंटर एडिस अबाबा, इथिथोपिया में २८ नवम्बर से २ दिसम्बर २०१६ की तारीखों में हुई संयुक्त राष्ट्र संघ के शिक्षा प्रकल्प यूनेस्को की बैठक में यह निर्णय लिया गया है। इस बैठक में भाग लेने के लिए देव संस्कृति विश्वविद्यालय, शांतिकुंज, हरिद्वार के प्रति- कुलपति डॉ. चिन्मय पण्ड्याजी तथा केवल्यधाम योग संस्थान के प्रतिनिधि डॉ. बीआर शर्माजी को भारत सरकार के आयुष मंत्रालय ने भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिए भेजा था।

भारत सरकार ने सन् २०१४ में योग को विश्व की सांस्कृतिक धरोहर घोषित कराने के लिए पहल की थी। इस संदर्भ में लगातार बैठकें हुईं। यह यूनेस्को द्वारा आयोजित ११वीं बैठक थी, जिसमें भारतीय विशेषज्ञों की प्रस्तुति से संतुष्ट होकर उपस्थित सभी १६० देशों के राजदूतों ने सर्वसम्मति से योग को वैश्विक घरोहर घोषित किया। डॉ. चिन्मय जी ने अपने व्याख्यान के अलावा कई राजदूतों से व्यक्तिगत चर्चा कर उनकी जिज्ञासाओं और प्रश्नों का संतोषजनक समाधान प्रस्तुत किया। वे विश्व समुदाय को यह समझाने में सफल रहे कि योग केवल शारीरिक स्वास्थ्य का साधन नहीं अपितु जीवन के सर्वांगीण विकास के लिए परम उपयोगी विद्या है जिसका विश्वव्यापी विस्तार भारत के ऋषि- मनीषी आदि काल से करते आये हैं। इस संदर्भ में उन्होंने कई आर्ष ग्रंथों के उद्धरण भी प्रस्तुत किये।

भारत सरकार के विदेश मंत्रालय ने यूनेस्को के स्थायी भारतीय प्रतिनिधि मंडल के साथ मिलकर इस सफलता को हासिल किया। यूनेस्को में भारतीय प्रतिनिधि एवं राजदूत श्रीमती रूचिरा कंबोज भी उपस्थित थीं। उन्होंने देश के सवा करोड़ लोगों की ओर से विश्व समुदाय का आभार व्यक्त किया। संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार के प्रतिनिधि संयुक्त सचिव श्री एमएम श्रीवास्तव भी बैठक में उपस्थित थे।

शांतिकुंज लौटने पर डॉ. चिन्मय जी ने कहा कि १६० देशों का एकमत से इसे स्वीकार करना भारत के लिए गौरव की बात है। इसे में परम पूज्य गुरुदेव की युग निर्माण योजना का सुनियोजित अंग मानता हूँ। विश्व की सांस्कृतिक धरोहर घोषित होने के बाद भारतीय संस्कृति के प्रति सारे विश्व का आकर्षण तेजी से बढ़ेगा। इस दिशा में विश्व मनीषा अनुसंधान के लिए प्रेरित होगी।

फिलिस्तीन के राजदूत ने कहा कि आज योग को किसी पहचान की आवश्यकता नहीं रही है। अरमेनियाँ के राजदूत ने इस गूढ़, लोकमंगलकारी शाश्वत ज्ञान को सारे विश्व में फैलाने के लिए भारत के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की।


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