राजस्थान में भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा (महाविद्यालय) का राज्य स्तरीय प्रभावशाली प्रयोग

Published on 2017-01-11
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• परीक्षा के तीन चरण
कॉलेज, जिला एवं प्रांत
• लिखित, व्याख्यान एवं कई प्रयोगात्मक कार्य दिये गये
• कोटा में आयोजित हुई प्रांत स्तरीय प्रतियोगिता
• श्रीगंगानगर, कोटा और राजसमंद जिले क्रमशः प्रथम, द्वितीय, तृतीय रहे

११० महाविद्यालयों के ६००० विद्यार्थियों ने भाग लिया
कोटा (राजस्थान) : दिया, राजस्थान के प्रांतीय संगठन ने वर्ष २०१६ में प्रांत के सभी जिलों के महाविद्यालयों में भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा का आयोजन किया। तीन चरणों में परीक्षा हुई, ११० महाविद्यालयों के ६००० विद्यार्थियों ने इसमें भाग लिया, जिनमें आईआईटी, एम्स व राज्य की कई प्रतिष्ठित संस्थाओं के विद्यार्थी शामिल हुए। वस्तुतः यह परीक्षा एक प्रतियोगिता थी, जिसने विद्यार्थियों को भारतीय संस्कृति के आदर्शों के संदर्भ में चिंतन- मनन करने और महाविद्यालयों में प्रगतिशील कार्यक्रमों को आरंभ करने के लिए प्रेरित किया।

प्रतियोगिता का तीसरा और अंतिम चरण गायत्री शक्तिपीठ कोटा में ११ दिसम्बर को सम्पन्न हुआ। इसमें जिला स्तर पर वरीयता प्राप्त २२ जिलों के दो- दो चयनित विद्यार्थियों की टोली ने भाग लिया। प्रांतीय प्रतियोगिता में वे जिला स्तर पर हुई प्रतियोगिता में ‘जिम्मेदार विद्यार्थी’ विषय पर परियोजना लेकर आये थे, उन्हें इसे अपने महाविद्यालय में प्रायोगिक तौर पर आरंभ करने का कार्य सौंपा गया था। उन्हें पूर्व में ही एक विशिष्ट महापुरुष के जीवन चरित्र संबंधी तैयारी करके आने के लिए भी कहा गया था। लिखित परीक्षा, आशु भाषण, रैपिड फायर, गुरुदेव के प्रवचन पर आधारित बजर राउण्ड जैसे कई कार्यक्रम परीक्षा में शामिल किये गये।

श्रीगंगानगर ने प्रथम, कोटा ने द्वितीय और राजसमंद ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। कोटा के माननीय सांसद श्री ओम बिड़ला के मुख्य आतिथ्य और शांतिकुंज में भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा प्रभारी श्री प्रदीप दीक्षित की मुख्य उपस्थिति में पुरस्कार वितरण और सम्मान समारोह सम्पन्न हुआ। प्रांत स्तर पर विजेताओं के साथ जिला स्तर पर विजेता रही प्रत्येक टीम को स्मृति चिह्न, साहित्य व सद्वाक्य भेंट कर सम्मानित किया गया।

श्री ओम बिड़ला ने इस परीक्षा को युवाओं के विचारों में सृजनात्मकता का विकास करने वाला बताया और ‘दिया’ द्वारा किये जा रहे प्रयासों की सराहना की। श्री प्रदीप दीक्षित ने परीक्षा के प्रारूप तथा उसे रोचक, उद्देश्यपूर्ण व प्रभावशाली बनाने के लिए राजस्थान के युवाओं द्वारा किये गये प्रयासों की प्रशंसा की, कहा कि इसे पूरे देश में लागू किया जाना चाहिए। गायत्री परिवार के प्रांतीय समन्वयक श्री घनश्याम पालीवाल एवं शक्तिपीठ कार्यवाहक श्री जीडी पटेल ने अतिथियों को प्रतीक चिह्न भेंट कर सम्मानित किया।

त्रिस्तरीय परीक्षा के संचालन में भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा (महाविद्यालय) राजस्थान की शिक्षा समिति के सदस्य सर्वश्री रमेश छंगाणी, प्रज्ञेश यादव, प्रणय त्रिपाठी, ललित शर्मा, धर्मेश कुमार के साथ प्रो. विवेक विजय आदि की मुख्य भूमिका थी। कोटा में आयोजित परीक्षा की व्यवस्था में प्रज्ञेश यादव, विशाल नैनीवाल, मुकेश कुमार, लोकेश कुमार, ललित सोनी का प्रमुख योगदान रहा। इस अवसर पर दिया, राजस्थान के प्रतिनिधि श्री भक्तभूषण वर्मा, डॉ. वेदप्रकाश चौधरी, महेन्द्र शर्मा, रमेश असावा, शिवसुत राव, मनीषा छंगाणी, श्याम सुंदर आदि उपस्थित थे।

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