सफल होलिकोत्सव मनायें

Published on 2017-03-13

पूर्व तैयारी के सूत्र

  • इस सम्बन्ध में कुछ पत्रक छपवाये जायें। उसमें अश्लीलता के घातक परिणाम समझाये जायें तथा होली को अश्लीलता निवारण दिवस के रूप में मनाने, उसमें सहयोग करने की अपील की जाय।
    • शिक्षण संस्थानों में विद्यार्थियों- शिक्षकों को इसमें भागीदारी के लिए प्रेरित किया जाए। धार्मिक- सामाजिक संगठनों को भी इसके लिए सहमत किया जाय।
    • विद्यालयों, महाविद्यालयों, सामाजिक संस्थाओं, युवा संगठनों में सार्वजनिक स्थानों पर भाषण, चित्रकला, निबंध, काव्य, जैसी अभिव्यक्तिपरक प्रतियोगिताएँ अधिक से अधिक मात्रा में आयोजित की जायें। इन समस्याओं के समाधान के सुझाव माँगे जायें।

इन प्रतियोगिताओं से श्रोता- दर्शक तो प्रभावित होंगे ही, सबसे ज्यादा प्रभावित वे विद्यार्थी या युवा होंगे जो प्रतियोगिता में भाग लेंगे। उन्हें विषय की तैयारी के क्रम में उस पर गहराई से चिंतन करने का अवसर मिलेगा। यदि वे स्वयं व्यसन- अश्लीलता से प्रभावित हैं तो उन्हें आत्ममंथन का अवसर मिलेगा, आत्मबल बढ़ेगा। जो अभी इनसे बचे हुए हैं, उन्हें समय रहते सावधान हो जाने की प्रेरणा मिलेगी।

अभी पर्याप्त समय है, इसलिए बड़ी संख्या में ऐसी प्रतियोगिताएँ आयोजित की जा सकती हैं। यह युवा क्रांति वर्ष का एक महत्त्वपूर्ण अभियान सिद्ध हो सकता है।
इस प्रकार विचार मंथन परक कार्यक्रमों के माध्यम से अश्लीलता निवारण के पक्ष में जो वातावरण बने उसको स्थिरता देने के लिए नयी पीढ़ी से जवानी संकल्प बुलवाने और लिखित संकल्प पत्र भरवाने का क्रम भी अपनाया जा सकता है ।

संकल्पों के प्रस्तावित सूत्र

  • मैं मानता हूँ कि आजकल के अश्लील चित्र समाज में दूषित भावनाओं को जाग्रत् करते हैं, सन्मार्ग से हटाकर कुमार्ग की ओर ले जाते हैं, इसीलिए मैं स्वयं उनको नहीं देखूँगा और अपने सम्पर्क में आने वाले व्यक्तियों को भी उनसे दूर रहने की प्रेरणा दूँगा।
    • केवल कल्पना पर आधारित, काम विचारों की वृद्धि करने वाला साहित्य नहीं पढूँगा। जिन पत्रिकाओं में ऐसी विचार सामग्री आती है, उनका अध्ययन स्वयं बन्द करके दूसरों को भी वैसी ही प्रेरणा दूँगा।
    • जिन फिल्मी गीतों में गंदे विचार होते हैं, उनको मैं न गाऊँगा और न सुनूँगा।
    मैं अपने घर में कोई अश्लील चित्र न टाँगूँगा। अपने मुहल्ले में जिन घरों में टँगे होंगे, उनको उतरवाकर महापुरुषों के चित्र व अन्य प्रेरणादायक वाक्य टँगवाऊँगा।
    • अश्लील चित्रों के प्रति घृणा उत्पन्न करने के लिए, उनके प्रति असम्मान के भाव प्रकट करने के लिए होली के अवसर पर जुलूस निकाल कर सामूहिक रूप से चित्रों की होली जलवाने का प्रयत्न करूँगा।
    • जिन से संकल्प बुलवाये जायें या संकल्प पत्र भरवाये जायें, उन्हें होली पर्व के समारोह में भाग लेने के लिए भी प्रेरित किया जाय।
  • पर्व प्रकरण
    जिस दिन होली जलायी जाती है, उस दिन स्थानीय सुविधा के अनुसार दोपहर बाद या शाम को एक रैली निकाली जाय। उसमें अश्लीलता की राक्षसी का चित्र रखा जाय, जो बालक- बालिकाओं को निचोड़ रही है। अश्लीलता विरोधी बैनर, वाक्य रखे जायें।

अश्लीलता का नाश हो, अनैतिकता का नाश हो।
गंदे चित्र लगाओ मत, नारी को लजाओं मत।
जैसे नारे लगाये जायें।

घर- घर सम्पर्क करके गन्दे चित्रों और साहित्य को निकाल लाया जाय। उन्हें रात्रि में होलिका दहन के साथ घोषणापूर्वक जलाया जाय। अगले दिन सवेरे होली के समारोह में शामिल होने का आमंत्रण सभी को दिया जाय।

  • अनुशासित उल्लास
    होलिका दहन के अगले दिन सवेरे से ही होली के उल्लास की अभिव्यक्ति का क्रम चल पड़ता है। इसके लिए ऐसे प्रयास किये जायें, जिनसे हर्षोल्लास तो प्रकट हो, किन्तु कहीं भी अश्लीलता, भद्रता, कटुता को स्थान न मिले। रंग गुलाल की छूट रहे, किन्तु कालौच, कीचड़ जैसी अप्रिय वस्तुओं का उपयोग न किया जाय।

होली गाने वाली टोलियाँ लोक- परंपरागत, प्रेरक गीत गायें, अश्लील प्रकरणों का परहेज करें।
• शाम को हास्य कवि सम्मेलन या हास्य कविता सम्मेलन जैसे आयोजन तथा प्रेरक सांस्कृतिक कार्यक्रमों की व्यवस्था भी बनायी जा सकती है। इनमें भी अश्लीलता विरोधी कार्यक्रम जोड़े जा सकते हैं।
प्रबुद्ध परिजनों, युवा मण्डलों, दिया की इकाइयों के परस्पर सहयोग से होली पर्व के साथ जुड़ी विसंगतियों को दूर करके उसे एक शुद्ध सामाजिक समतापरक उल्लासभरे समारोह का स्वरूप दिया जाना कठिन नहीं है। ध्यान रहे अधिकांश व्यक्ति होली के विकृतरूप से ऊब चुके हैं, उसे श्रेष्ठ रूप देना चाहते हैं। एक सदाशयतापूर्ण सुनियोजित पहल के साथ वे सहज ही जुड़ सकते हैं। उनके सहयोग- समर्थन से इस पुण्य प्रक्रिया को व्यापक सफलता सहज ही मिल सकती है।

 

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