Published on 2017-02-23

देसंविवि की बाल्टिक सेंटर की तरह संचालित होंगी विभिन्न गतिविधियाँ

हरिद्वार २३ फरवरी।
ऋषिपरंपरा पर आधारित देवसंस्कृति विश्वविद्यालय- शांतिकुंज नित नये आयाम गढ़ रहा है। भारतीय संस्कृति को विश्वभर में फैलाने के लिए संकल्पित देसंविवि अपने पाठ्यक्रमों के साथ विद्यार्थियों में नैतिक मूल्यों के विकास हेतु जो कदम उठाया है, उससे देश- विदेश के अनेक शैक्षणिक संस्थान प्रभावित हुए हैं और वे अपने महाविद्यालय एवं विश्वविद्यालयो में लागू करना प्रारंभ कर दिये हैं।

इसी क्रम में लात्विया के बेजनीक्स शहर में सेन्टर ऑफ इंडियन स्टडीज एण्ड कल्चर के केन्द्र का शुभारंभ हुआ। स्वीडन और लात्विया में भारतीय राजदूत एच.ई. मोनिक मेहता की उपस्थिति में देव संस्कृति के प्रतिकुलपति डॉ. चिन्मय पण्ड्या जी ने इंटरनेट के माध्यम से केन्द्र का संयुक्त रूप से उद्घाटन किया।

देसंविवि के प्रतिकुलपति डॉ. चिन्मय पण्ड्या जी ने बताया कि विश्वविद्यालय का उद्देश्य परंपरागत शिक्षा का अध्यात्म व विज्ञान के साथ समन्वय करना है, जिससे नैष्ठिक, समर्पित विद्यार्थियों का निर्माण हो, जिनकी जीवनशैली में वैज्ञानिक अध्यात्मवाद का समावेश हो तथा वे राष्ट्रीय भावनाओं से ओत- प्रोत आदर्श नागरिक बनकर समाज व राष्ट्र के निर्माण में योगदान दे सकें। देव संस्कृति का विस्तार विश्व भर में करना विश्वविद्यालय का महत्वपूर्ण लक्ष्य है। उन्होंने बताया कि देसंविवि का भारत के अलावा जर्मनी, अर्जेंटिना, रसिया, चीन, इण्डोनेसिया, इटली, अमेरिका आदि देशों के साथ अब तक ३० से अधिक शैक्षणिक अनुबंध (एमओयू) हो चुके हैं। उल्लेखनीय है कि बाल्टिक देशों के राजदूतों की मौजूदगी में जुलाई २०१६ में देवसंस्कृति विवि में बाल्टिक सेंटर का शुभारंभ हुआ, तब से लेकर अब तक यह सेंटर कई उपलब्धियाँ हासिल की हैं। लात्विया का यह केन्द्र देवसंस्कृति विश्वविद्यालय में स्थापित बाल्टिक सेंटर के सहयोगी संस्था के रूप में कार्य करेगा।

देसंविवि के कुलाधिपति डॉ. प्रणव पण्ड्याजी एवं श्रद्धेया शैल जीजी ने कहा कि बताया कि केन्द्र में भारतीय संस्कृति, योग एवं भारतीय शास्त्रीय संगीत तथा नृत्य के पाठ्यक्रम भी शुरू किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि भारत व यूरोपियन देशों के बीच सक्रिय सहयोग की भावना विकसित हो रही है। बताया कि यह केन्द्र सांस्कृतिक क्रियाकलापों एवं वैज्ञानिक शोध के प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। यह केन्द्र बाल्टिक देश- लात्विया, एस्टोनिया, लिथुआनिया आदि देशों में देव संस्कृति एवं शिक्षा के प्रचार- प्रसार के प्रमुख केन्द्र के रूप में कार्य करेगा। उद्घाटन अवसर पर प्रो. वालडिस मुक्तुपेवेलस, आइजा द्विशंका, उन लार्सिआ पदोस्कोचया सहित अनेक शिक्षाविद, गणमान्य नागरिक एवं बाल्टिक देशों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।


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