Published on 2017-03-19

गायत्री श्रद्धा, संवेदना, सद्भावना की जननी है। जहाँ गायत्री है वहाँ सुख है, शांति है, संतोष है। जहाँ गायत्री का अभाव है वहीं कलह, अशांति का वातावरण है। इस चेतना केन्द्र की स्थापना से पूरे पूर्वोत्तर क्षेत्र में आद्यशक्ति माँ भगवती का प्रेरणा प्रकाश फैलेगा, विसंगतियाँ दूर होंगी, आपसी भाईचारा बढ़ेगा, भय और तनाव मिटेगा।     • डॉ. चिन्मय पण्ड्याजी, प्रतिकुलपति देसंविवि

गुवाहाटी (असम)
‘सेवन सिस्टर्स’ के नाम से जाने जाने वाले पूर्वोत्तर भारत के प्रथम गायत्री चेतना केन्द्र, बेहारबाड़ी, गुवाहाटी में गायत्री माता की प्राण प्रतिष्ठा करने के पश्चात देव संस्कृति विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति डॉ. चिन्मय पण्ड्याजी ने यह संदेश दिया। इस अवसर पर पूर्वोत्तर के सभी राज्यों असम, अरुणाचल, मेघालय, मणीपुर, मीजोरम, त्रिपुरा, नागालैण्ड के लगभग २००० कार्यकर्त्ता समारोह में उपस्थित थे।

प्राण प्रतिष्ठा समारोह ३ से ६ मार्च की तारीखों में १०८ कुण्डीय गायत्री महायज्ञ के साथ सम्पन्न हुआ। इसे सम्पन्न कराने शांतिकुंज से जोन प्रभारी शांतिकुंज प्रतिनिधि श्री कालीचरण शर्मा, सर्वश्री जितेन्द्र मिश्रा, विनय केशरी, संजय सिंह, दिलथिर यादव, सुनील बंशीधर, दिनेश मार्नदे, संतोष सिंह, नरेन्द्र पाटीदार, मनोरंजन प्रधान की टोली पहुँची थी। पूर्वोत्तर जोन प्रभारी श्री परमानन्द द्विवेदी, श्री वीरेन्द्र तिवारी, श्री विजय रावत आदि की टोली ने महीनों पूर्व पहुँचकर प्राण प्रतिष्ठा समारोह के प्रयाज एवं पूर्व तैयारियों के कार्यों का बड़ी कुशलता के साथ प्रबंधन किया।

कलश यात्रा : कार्यक्रम का शुभारंभ ११०० कलशों सहित निकाली गयी विशाल कलश यात्रा के साथ हुआ। गायत्री माता के जय- जयकारों से बेहारबाड़ी की गलियाँ गूँज उठीं। श्री कालीचरण शर्मा जी ने कलश यात्रा का स्वागत करते हुए कहा कि प्रत्येक माता सीता का रूप है। वह ममता, करुणा, सहनशीलता की प्रतिमूर्ति है।

देवपूजन- यज्ञ : गायत्री चेतना केन्द्र, गुवाहाटी के निर्माण में हजारों भावनाशीलों, भामाशाहों ने बड़ी श्रद्धा के साथ तन, मन, धन से अपनी आहुतियाँ दी थीं। सभी देवपूजन एवं यज्ञ करने के सौभाग्य पर गौरवान्वित दिखाई दिये। श्री प्रफुल्ल कुमार महन्त, असम के पूर्व मुख्यमंत्री एवं श्री भट्टाचार्य जी, वर्तमान विधायक सहित अनेक गणमान्य यज्ञ में पधारे। हजारों नगरवासियों ने भी यज्ञ करने के साथ शांतिकुंज से आयी ज्ञानगंगा में गोते लगाये।

प्राण प्रतिष्ठा : प्राण प्रतिष्ठा का मुख्य कार्यक्रम ६ मार्च की ऊषावेला में डॉ. चिन्मय जी द्वारा सम्पन्न कराया गया। हजारों साधकों द्वारा किये जा रहे अखण्ड जप के बीच प्राण आह्वान, प्राण संचार जैसे भावविभोर कर देने वाले कर्मकाण्ड सम्पन्न हुए। माता के प्रथम दर्शन के समय उनका ओज और तेज अलौकिक दिव्यता का अनुभव करा रहा था।

कामाख्या शक्तिपीठ के दर्शन : गायत्री चेतना केन्द्र की प्राण प्रतिष्ठा से पूर्व डॉ. चिन्मय जी स्थानीय सुप्रसिद्ध कामाख्या शक्तिपीठ तथा डाकिया स्थित ज्योतिर्लिंग भीमाशंकर के दर्शन के लिए भी गये। उनके दर्शन, पूजन के साथ विश्वशांति की प्रार्थना की।

डॉ. चिन्मय जी का स्वागत : शांतिकुंज के अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त युवा नायक डॉ. चिन्मय जी की उपस्थिति से कार्यकर्त्ता- श्रद्धालु सभी उमंग- उल्लास से भर उठे। मंच पर सर्वश्री रामशिरोमणि तिवारी, सी.के. जायसवाल, राजेश तायल, डीजीपी डॉ. अजीत रावत, बाबूलाल अग्रवाल, विमल अग्रवाल, अशोक भट्ट, देवचरण दास एवं अनेक गणमान्यों ने असमिया दुपट्टा एवं झांपी प्रदान कर उनका भावभरा सम्मान किया।

दीपयज्ञ के अवसर पर दिये संदेश में उन्होंने मानव जीवन की गरिमा पर विस्तार से प्रकाश डाला। परम पूज्य गुरुदेव, परम वंदनीया माताजी के मार्मिक संस्मरणों के साथ उनके जैसा व्यक्तित्व बनाने की प्रेरणा दी। आदरणीय डॉ. प्रणव पण्ड्या जी एवं आदरणीया जीजी का संदेश दिया, जन- जन के उत्कर्ष की मंगलकामना की।


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