Published on 2017-04-10

रांची : भारत दुनिया का खेवनहार है। यह सबसे जवां देश है भले ही दुनिया बूढ़ी हो रही हो। यह भगवान का चुना हुआ देश है। भारत का जीवन दर्शन है-वसुधैव कुटुंबकम्। भारत का कथन है, पूरी वसुधा ही हमारा परिवार है। यह बातें शांतिकुंज हरिद्वार से आए आद. केदार प्रसाद दुबे ने कही। वे धुर्वा में तीन दिवसीय युवा क्रांति सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे।

उन्होंने कहा कि आत्म निर्माण से ही समाज व राष्ट्र निर्माण संभव होगा। युवा क्रांति सम्मेलन का उद्देश्य है, युवकों को अध्यात्म के प्रति आस्था पैदा करना। आस्था और निष्ठा का संचार करना। ईश्वर विश्वास से जोड़ना। यह योजना युग निर्माण की है, जो परमात्मा की दिव्य योजना है।

युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि पूरा विश्व नकारात्मक सोच से ग्रसित है। भारत ही एक ऐसा देश है, जिसमें 60 करोड़ युवा पीढ़ी रहती है। अगर एक करोड़ युवा भी जड़ गए तो कमाल हो जाएगा। विश्व का मानचित्र बदल जाएगा। इस अवसर पर सात सूत्रीय आंदोलन के बारे में भी विस्तार से बताया।

उन्होंने नौजवानों को संदेश दिया, उठो, जमाना बदल रहा है। नव सृजन का काम तेज होना है। उन्होंने संदेश दिया-हम आस्तिक बने। चरित्रवान बनें। आदर्श को अपनाएं। अपने आचरण को बदलें। समाज खुद बदल जाएगा। हमें एक नए भारत के निर्माण में अपनी भूमिका तय करनी है। यह गुरु का काम है। हमें करना होगा।




Write Your Comments Here:


img

11 जनवरी, देहरादून। उत्तराखंड ।

दिनांक 11 जनवरी 2020 की तारीख में देव संस्कृति विश्वविद्यालय शांतिकुंज हरिद्वार के प्रतिकुलपति आदरणीय डॉक्टर चिन्मय पंड्या जी देहरादून स्थित ओएनजीसी ऑडिटोरियम में उत्तराखंड यंग लीडर्स कॉन्क्लेव 2020 कार्यक्रम में देहरादून पहुंचे जहां पर उन्होंने उत्तराखंड राज्य के विभिन्न.....

img

ज्ञानदीक्षा समारोह में लिथुआनिया सहित देश के 12 राज्यों के नवप्रवेशी विद्यार्थी हुए दीक्षित

देवसंस्कृति विश्वविद्यालय के कुलाधिपति डॉ प्रणव पण्ड्या ने कहा कि जो आचरण से शिक्षा दें वही आचार्य है और ऐसे आचार्यगण ही विद्यार्थियों को चरित्रवान बना सकते हैं। डॉ. पण्ड्या ने कहा कि जिस तरह चाणक्य ने अपने ज्ञान व.....

img

ञानदीक्षा समारोह में लिथुआनिया सहित देश के 12 राज्यों के नवप्रवेशी विद्यार्थी हुए दीक्षित

देवसंस्कृति विश्वविद्यालय के कुलाधिपति डॉ प्रणव पण्ड्या ने कहा कि जो आचरण से शिक्षा दें वही आचार्य है और ऐसे आचार्यगण ही विद्यार्थियों को चरित्रवान बना सकते हैं। डॉ. पण्ड्या ने कहा कि जिस तरह चाणक्य ने अपने ज्ञान व.....