Published on 2017-05-20

विज्ञान और अध्यात्म मिलकर करें राष्ट्र की सेवा- डॉ पण्ड्याजी
हरिद्वार, २० मई।

देवसंस्कृति विश्वविद्यालय गायत्रीकुंज- शांतिकुंज के प्रार्थना सभागार में भारत में स्वदेशी विज्ञान के विकास में संकल्पित संस्था विज्ञान भारती की १६वीं वार्षिक संगोष्ठी का शुभारंभ हुआ। दो दिवसीय इस संगोष्ठी में विज्ञान भारती के वार्षिक कार्यों पर चर्चा, चिंतन, मनन एवं भावी योजनाओं पर चर्चा आदि होगी। संगोष्ठी का उद्घाटन देसंविवि के कुलाधिपति श्रद्धेय डॉ. प्रणव पण्ड्याजी, विज्ञान भारती के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. विजय पी. भटकर एवं महासचिव श्री अजय कुमार ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलन कर किया।

उद्घाटन सत्र को सम्बोधित करते हुए कुलाधिपति श्रद्धेय डॉ. पण्ड्याजी ने कहा कि आज का समय वैज्ञानिक युग का है। इन दिनों विज्ञान एवं तकनीक लोगों के घर- घर में पहुँच रहा है, पर विज्ञान को सही तरीके से जन- जन तक पहुँचाने के लिए अध्यात्म की जरूरत है। उन्होंने कहा कि अध्यात्म और विज्ञान मिलकर कार्य करें, तभी राष्ट्र की सेवा संभव है। निष्काम भाव से ज्ञान और विज्ञान जन- जन तक पहुँचाने पर राष्ट्र की प्रगति होगी। वैज्ञानिक अध्यात्मवाद इसका सबसे सरल तरीका है। विज्ञान का आध्यात्मिक स्वरूप व अध्यात्म का वैज्ञानिक स्वरूप आज लोगों तक पहुँचाने की महती आवश्कता है। उन्होंने कहा कि गीता सही अर्थों में विज्ञान की किताब है, वैज्ञानिक तरीकों से इसमें आम जनों की समस्या का समाधान बताया गया है। उन्होंने कहा कि विज्ञान और अध्यात्म मिलकर चलें तो भारत को जगद्गुरु बनने से कोई रोक नहीं सकता। वार्षिक संगोष्ठी इसका शंखनाद कर रही है।

विज्ञान भारती के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं कुलाधिपति नालंदा विश्वविद्यालय डॉ. विजय पी. भटकर ने कहा कि देवसंस्कृति विश्वविद्यालय के दिव्य वातावरण में वार्षिक संगोष्ठी का आयोजन होना हम सभी के लिए सौभाग्य की बात है। यहाँ से एक नये आयाम की शुरुआत हो रही है। उन्होंने कहा कि गायत्री परिवार ने अध्यात्म को वैज्ञानिक तरीके से जन- जन तक पहुँचाने का कार्य कर रहा है। विज्ञान और अध्यात्म एक दूसरे के पूरक है इसे सभी को समझने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि देसंविवि इस दिशा में उल्लेखनीय कार्य कर रहा है। विज्ञान भारती भी विज्ञान और अध्यात्म को आम जनों तक पहुँचाने का प्रयास एवं गायत्री परिवार का सहयोग करेगा।

महासचिव श्री अजय कुमार ने कहा कि विज्ञान भारती का मुख्य उद्देश्य भारत में स्वदेशी विज्ञान एवं तकनीक को बढ़ावा देना तथा आम जनता तक इसकी पहुँच को सरल बनाना है। इस संगोष्ठी विज्ञान भारती से जुड़े देश भर के करीब १०० वैज्ञानिक भागीदारी कर रहे हैं। उद्घाटन सत्र का संचालन डॉ. सचिन मण्डावले ने किया। इस मौके पर देसंविवि के कुलपति श्री शरद पारधी, विज्ञान भारती के वैज्ञानिक एवं अधिकारीगण, सदस्य आदि मौजूद रहे।


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