Published on 2017-05-28
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महाराष्ट्र, म.प्र. व प.बंगाल के संस्कृति संवाहकों व शिक्षकों की शिविर का समापन

हरिद्वार २८ मई।
गायत्री परिवार प्रमुख श्रद्धेय डॉ. प्रणव पण्ड्याजी ने कहा कि भारतीय संस्कृति सद्गुणों की खेती करना सिखाती है। जिस दिन संस्कृति जीवन में उतर जायेगी, उस दिन हमारा जीवन बदल जायेगा और हम महान बन जायेंगे। संस्कृतिनिष्ठ होने से ही सेवाभावी व सुसंस्कारी बना जा सकता है।

डॉ पण्ड्याजी शांतिकुंज में भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा प्रकोष्ठ द्वारा आयोजित तीन दिवसीय शिक्षक गरिमा शिविर को संबोधित कर रहे थे। इस शिविर में महाराष्ट्र, मप्र एवं पश्चिम बंगाल से आए शिक्षक- शिक्षिकाएँ, अभिभावक, जिला समन्वयक सम्मिलित थे। देवसंस्कृति विश्वविद्यालय के कुलाधिपति डॉ. पण्ड्याजी ने कहा कि सभ्यता बहिरंग है जो बाह्य जीवन पद्धति सिखाती है, जबकि संस्कृति अंतरंग है और विचारों का परिशोधन करते हुए आगे बढ़ना, पीड़ितों की सेवा करना सिखाती है। शिक्षा व विद्या पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि शिक्षा जहाँ सभ्यता के विकास एवं व्यावहारिक ज्ञान के संर्वधन के लिए आवश्यक है, वहीं विद्या अपने जीवन के उद्देश्यों को समझने, अनगढ़ता को सुगढ़ता में बदलने और जीवन जीने की कला के शिक्षण में रूप में जरूरी है। ईशोपनिषद का उल्लेख करते हुए उन्होंने विद्या और अविद्या की भी विस्तार से जानकारी दी।

प्रतिभागियों से भेंट परामर्श के क्रम में संस्था की अधिष्ठात्री शैल दीदी ने कहा कि शिक्षकों को चाहिए कि विद्यार्थियों में शिक्षा अर्थात् किताबी ज्ञान के साथ विद्या अर्थात् जीवन जीने की कला को भी समावेश करने की दिशा में सार्थक प्रयास करें, क्योंकि विद्यार्थी ही देश के भावी कर्णधार हैं।

शिविर के विदाई सत्र को संबोधित करते हुए व्यवस्थापक श्री गौरीशंकर शर्मा ने कहा कि आज के युवा वायु की दिशा को मोड़ने सक्षम हैं। वह इसके साथ ही समाज को भी नई दिशा दे सकता है। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रगतिशील युवा बनने के लिए कठोर श्रम कर सद्ज्ञान प्राप्त करें फिर अपने व्यक्तित्व के माध्यम से समाज में एक मिसाल कायम करें।

भासंज्ञाप के श्री प्रदीप दीक्षित ने बताया कि शिविर में इन राज्यों के शिक्षकों एवं अभिभावकों को विद्यार्थियों के चहुंमुखी विकास की योजनाओं पर समन्वित रूप से कार्य करने पर जोर दिया गया। उपस्थित प्रतिभागियों ने बाल्यकाल से ही बच्चों को संस्कारित करने हेतु संकल्पित हुए। श्री पी.डी. गुप्ता ने बताया कि शिविर के विभिन्न चरणों में विद्यार्थियों के शैक्षणिक विकास के साथ शारीरिक व मानसिक विकास पर भी जोर दिया गया।


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