लंदन में सम्पन्न हुई नेटवर्क की एक महत्त्वपूर्ण संगोष्ठी में डॉ. चिन्मय पण्ड्याजी ने हिस्सा लिया

Published on 2017-06-02

हरिद्वार ०२ जून।

संयुक्त राष्ट्र ने अपने समग्र उद्देश्यों की पूर्ति के लिए विश्व भर के धार्मिक नेताओं, संगठनों को साथ लेकर एकता, स्थिरता, समता हेतु ग्लोबल ससटेनबिलिटी नेटवर्क की स्थापना सन् २०१४ में की। नेटवर्क की एक महत्त्वपूर्ण संगोष्ठी लंदन के लेम्बस पैलेस में सम्पन्न हुई। जिसमें विश्व भर के जाने माने सामाजिक कार्यक्षेत्र के प्रमुख हस्तियों, नेताओं, मीडिया के प्रमुख लोगों एवं उद्योगपतियों के ने भागीदारी की।

भारतीय प्रतिनिधि के रूप में उत्तराखण्ड स्थित देवसंस्कृति विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति डॉ. चिन्मय पण्ड्याजी ने हिस्सा लिया। सम्मेलन में ऑस्ट्रेलिया की पूर्व प्रधानमंत्री जूलिया गिलार्ड, लॉर्ड मललोच- ब्राउन, संयुक्त राष्ट्र के पूर्व उप- महासचिव और ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर कॉलिन मेयर आदि ने अपने विचारों से लक्ष्य को लेकर गहन मंत्रणा की। युवा प्रेरणा के स्रोत और वैज्ञानिक अध्यात्मवाद के प्रखर प्रवक्ता डॉ. चिन्मय पण्ड्याजी ने व्यक्ति निर्माण से समाज निर्माण और विश्व निर्माण की बात कही।

मानव में देवत्व के उदय की परिकल्पना करने वाले युगऋषि पं. श्रीराम शर्मा आचार्य जी की वैश्विक दृष्टि का उल्लेख करते हुए भारतीय प्रतिनिधि ने कहा कि स्वयं के परिवर्तन से समग्र परिवर्तन संभव है। या यूं कहें कि वैश्विक समस्याओं की कुंजी यही है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को बदलाव के स्तर पर आगे आने होगा। उन्होंने वैश्विक स्थिरता का एक स्पष्ट विजन प्रस्तुत किया। साथ ही बैठक में शोषण, बालश्रम, मानव तस्करी आदि जैसे वैश्विक मुद्दों पर विस्तार से चर्चा करते हुए इससे इससे जुड़ी योजनाओं की जाँच एवं उसमें संतुलन बनाये रखने के विविध मापदण्ड तैयार किया है।

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