Published on 2017-06-04

पवित्रता के दो धारा हैं गंगा और गायत्री : डॉ. पण्ड्याजी
गायत्री और गंगा भाव संवेदनाओं की देवियाँ : शैल दीदीजी

हरिद्वार, ४ जून।
अखिल विश्व गायत्री परिवार के प्रमुख श्रद्धेय डॉ. प्रणव पण्ड्याजी ने कहा कि गंगा और गायत्री पवित्रता के दो धारा हैं। गंगा प्रत्यक्ष हैं तो गायत्री परोक्ष। गंगा स्नान से बाह्य शुद्धि होती है, तो वहीं गायत्री की उपासना से साधक के जीवन में आंतरिक शुद्धता आती है।

श्रद्धेय डॉ. पण्ड्याजी गायत्री तीर्थ शांतिकुंज में आयोजित तीन दिवसीय पर्वोत्सव के मुख्य कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर गंगा दशहरा व गायत्री जयंती पर्वोत्सव मनाने आये देश- विदेश के हजारों स्वयंसेवी कार्यकर्त्ता एवं निर्मल गंगा जन अभियान में जुटे सैकड़ों युवा मुख्य रूप से मौजूद रहे। डॉ. पण्ड्याजी ने कहा कि गायत्री सद्बुद्धि की अधिष्ठात्री हैं, इसके जप से साधक का ज्ञान बढ़ता है और उनकी वृत्ति सकारात्मक दिशा की ओर प्रवृत्त होती है। उन्होंने कहा कि जिस तरह सगर पुत्रों की रक्षा हेतु भागीरथ ने तप कर गंगा को धरती पर लायें, उसी तरह वर्तमान युग के भागीरथ युगऋषि पं. श्रीराम शर्मा आचार्य जी ने सम्पूर्ण मानव जाति के उत्थान के लिए गायत्री को श्राप मुक्त कर जन- जन तक पहुँचाया है। उन्होंने कहा कि गायत्री ने सामूहिक संस्कृति का परिष्कार किया है। यह राष्ट्र की आराधना का महामंत्र है।
विज्ञानवेत्ता डॉ. पण्ड्याजी ने कहा कि गायत्री परिवार की संस्थापिका वंदनीया माता भगवती देवी शर्मा की जन्मशताब्दी वर्ष २०२६ तक के कालखंड को तीन- तीन वर्षों के तीन भागों में बाँटकर आगामी योजनाएँ चलाई जा रही हैं। इसके अंतर्गत श्रेष्ठता का वरण, तेजस्विता व निर्भिकता तथा सामूहिकता- सहगमन को लेकर गायत्री परिवार चल रहा है। इन योजनाओं के माध्यम से कई जटिल समस्याओं का समाधान होता दिखाई देगा। उन्होंने कहा कि गायत्री परिवार के दस लाख से अधिक युवा, स्वयंसेवी कार्यकर्त्ता गंगोत्री से गंगासागर तक की २५२५ किमी दूरी तय करने वाली पतित पावनी मां गंगा को स्वच्छ व निर्मल बनाने में पिछले कई वर्षों से जुटे हैं। अब तक कई योजनाओं में अच्छी सफलता भी मिली है। उन्होंने कहा कि गंगा में मिलने वाली कई नदियों को भी स्वच्छ करने में गायत्री परिवार सक्रिय है।

इससे पूर्व संस्था की अधिष्ठात्री शैलदीदीजी ने कहा कि गायत्री और गंगा भाव संवेदनाओं की देवियाँ हैं। इनकी प्रेरणाओं को जीवन में उतारने से जीवन महान बनता है। गंगा जहाँ स्थूल शरीर को शुद्ध करती हैं, वहीं गायत्री अंतःकरण को पवित्र बनाती है। शैलदीदीजी ने गायत्री के तीन चरण- उपासना, साधना व अराधना गपर मार्मिक उदाहरण देते हुए इसे नियमित रूप से पालन करने की बात कही। उन्होंने त्रिशंकु, पाण्डवों आदि के उदाहरणों से गंगा व गायत्री की महत्ता पर विस्तार से चर्चा की। श्रद्धेया शैलदीदीजी ने चेतना के अवतरण के लिए निरंतर सीखते रहने, बार- बार अभ्यास, सत्कर्मों की याद दिलाते रहने एवं आस्था- भावना को जाग्रत रखने पर बल दिया। इस अवसर पर गायत्री परिवार प्रमुखद्वय ने हिन्दी की दो, असमिया की दो सहित कुल चार किताबों का विमोचन किया।

पर्व पूजन का वैदिक कर्मकाण्ड श्री जितेन्द्र मिश्र ने सम्पन्न कराया। वहीं ब्राह्ममुहूर्त में डॉ पण्ड्याजी एवं शैलदीदीजी ने पूज्य आचार्यश्री के प्रतिनिधि के रूप में सैकड़ों श्रद्धालुओं को गायत्री महामंत्र की दीक्षा दी। गायत्री परिवार ने अपने आराध्यदेव पं० श्रीराम शर्मा आचार्य जी की २७वीं पुण्यतिथि को संकल्प दिवस के रूप में मनाते हुए उनके बताये सूत्रों को स्वयं पालन करने एवं दूसरों को प्रेरित करने की शपथ ली। ब्रह्मवादिनी बहिनों ने विभिन्न संस्कार बड़ी संख्या में निःशुल्क सम्पन्न कराये। पर्व के अवसर पर लिये संकल्प को पूर्णता तक पहुँचाने के उद्देश्य से सायंकाल दीप महायज्ञ में आहुतियाँ समर्पित कीं। मुख्य कार्यक्रम का संचालन श्री नमोनारायण पाण्डेय ने किया।


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