शांतिकुंज में भारतीय शिक्षण मण्डल की तीन दिवसीय अभ्यास सत्र का शुभारंभ

Published on 2017-06-13

वर्तमान शिक्षण पद्धति में हो बदलाव : डॉ. पण्ड्याजी
आने वाला समय चुनौतिपूर्ण : डॉ. सच्चिदानंदजी

हरिद्वार, १३ जून।
अखिल विश्व गायत्री परिवार प्रमुख श्रद्धेय डॉ. प्रणव पण्ड्याजी ने कहा कि शिक्षा- सभ्यता व विज्ञान को बताती है, तो वहीं विद्या- मनुष्य के जीवन में सुसंस्कारिता, नम्रता आदि सद्गुणों को विकास करती है। ऐसे ही सद्गुणयुक्त युवा गढ़ने के लिए वर्तमान शिक्षण पद्धति में बदलाव होने चाहिए, जिससे भारतीय संस्कृति से ओतप्रोत सेवाभावी युवा गढ़े जा सकें, जिसकी आज महती आवश्यकता है।

श्रद्धेय डॉ. पण्ड्याजी भारतीय शिक्षण मण्डल के तीन दिवसीय अभ्यास वर्ग के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे। इस अभ्यास सत्र में उत्तराखण्ड, उ.प्र.,बिहार व झारखण्ड के शिक्षण मण्डल के कार्यकर्त्तागण सम्मिलित हैं। उन्होंने कहा कि आज चहुँओर शिक्षण संस्थान दिखाई देते हैं। संस्थान ऐसे हों, जहाँ युवाओं को गढ़ने के लिए सेवाभावी विद्वान आचार्य के रूप में अपने आचरण से शिक्षण देने वाले हों। देवसंस्कृति विश्वविद्यालय ऐसी ही शिक्षण पद्धति के साथ पिछले १५ वर्ष से चल रहा है।

गीता के विभिन्न सूत्रों का जिक्र करते हुए डॉ. पण्डयाजी ने समाज में विद्यावान, सच्चरित्र, संस्कारयुक्त, भ्रष्टाचार से मुक्त, आदर्श युवा की जरूरतों पर बल दिया। उन्होंने कहा कि देश के ६५ करोड़ युवाओं में से दस प्रतिशत युवा व्यक्तिगत संकीर्णता से ऊपर उठकर समाज हित में सोचने व करने लगे, तो भारत पुनः अपना खोया गौरव प्राप्त कर सकता है। लाखों युवाओं को उनके दायित्वों का बोध कराने वाले डॉ. पण्डयाजी ने प्रतिभाशाली युवा बनने के लिए अपनी क्षमता का अभिवर्द्धन, व्यक्तित्व का परिष्कार, व्यवस्था बुद्धि का विकास एवं नेतृत्व क्षमता बढ़ाने के विविध उपाय सुझाये।

भारतीय शिक्षण मण्डल के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. सच्चिदानंद जोशी ने कहा कि आने वाला समय चुनौतिपूर्ण है। उन्होंने कहा कि युवाओं को ऐसे तैयार किये जाएँ, जो पैसों के लिए नहीं, वरन् भारतीय संस्कृति से ओतप्रोत हो और बुराइयों से लड़ते हुए समाज को सभ्य, सुविकसित और सुसंस्कृत बनाने में योगदान दे सके। मंडल के संगठन मंत्री श्री मुकुल कानिटकर ने कहा कि देश को राजनैतिक स्वतंत्रता के बाद शैक्षणिक आजादी की आवश्यकता है। यहाँ की शिक्षण पद्धति भारतीय संस्कृति के अनुसार गुरुकुल पद्धति जैसा होना चाहिए, जहाँ विद्यार्थियों को अध्ययन में स्व के ऑकलन की विधि सिखाई जाये। जिससे वे अपनी आंतरिक सद्गुणों को विकास कर सके। इस अवसर पर प्रांतीय अध्यक्ष श्री मनोहर सिंह रावत ने सभी का आभार प्रकट किया।

इससे पूर्व गायत्री परिवार प्रमुख डॉ. पण्ड्याजी ने सभी अतिथियों को गायत्री मंत्र दुपट्टा एवं युगसाहित्य भेंटकर सम्मानित किया। इस मौके पर गुरुकुल कांगडी विवि के कुलपति प्रो. सुरेन्द्र कुमार, डॉ. महावीर अग्रवाल, श्री एच.एच. धामी, मंडल की महिला प्रमुख डॉ. गीता मिश्र, बनवारीलाल जी, डॉ. ओ.पी. सिंह सहित गायत्री परिवार के अनेक प्रांतों से आये साधक प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।


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