Published on 2017-07-08

१५० गाँवों में शक्ति कलश भ्रमण
जल संरक्षण, वृक्षारोपण, नशामुक्ति का संदेश दिया
२४ लाख गायत्री महामंत्र लेखन हुआ

कनाडिया, इंदौर (मध्य प्रदेश)
ठीक ५० वर्ष पूर्व परम पूज्य गुरुदेव कनाडिया पधारे थे। परम पूज्य गुरुदेव का स्वागत करने वाले श्रद्धावान, समर्पित कार्यकर्ता आज भी उस सौभाग्य को भूले नहीं हैं। श्री शंकरलाल शर्मा और उनके साथी हर समय अपने गुरुदेव की आकांक्षा के अनुरूप गायत्री चेतना के विस्तार के लिए प्राण- पण से समर्पित रहे हैं। गुरुसत्ता के आगमन की स्वर्ण जयंती पर उन्होंने गायत्री शक्तिपीठ कनाडिया पर १०८ कुण्डीय गायत्री महायज्ञ सहित एक विशाल समारोह आयोजित किया और उसके माध्यम से लाखों लोगों को आदर्श जीवन जीने और लोकमंगल की राह पर चल पड़ने की प्रेरणा दी।

युग चेतना का व्यापक विस्तार
इस कार्यक्रम के निमित्त ३ शक्तिकलश यात्राएँ निकाली गयीं, १५० गाँवों का भ्रमण करते हुए जन- जन को यज्ञ में भाग लेने और संस्कार कराने का आमंत्रण दिया गया। इन गाँवों में जल संरक्षण और पौधारोपण का संदेश प्रमुखता से दिया गया। परिणामस्वरूप लाखों लोगों ने युग संदेश सुना, सत्संकल्प लिये।

महामंत्र लेखन : कार्यक्रम के उपलक्ष्य में २४ लाख गायत्री महामंत्र लेखन कराया गया था। कलश यात्रा में शामिल देवियों ने इन्हें मस्तक पर धारण कर शोभा यात्रा निकाली, तत्पश्चात् विधिवत शक्तिपीठ पर उन्हें प्रतिष्ठित किया गया।

मुख्य समारोह : कार्यक्रम का प्रभावशाली संचालन शांतिकुंज की ब्रह्मवादिनी बहिनों- श्रीमती सुधा महाजन, श्रीमती मिथिलेश नंदिनी मिश्रा, माधुरी वर्मा, मीनाक्षी शास्त्री, विजया डाबर ने किया। उनके द्वारा किया गया देवताओं और ऋषियों का पूजन हर याजक को भावविभोर कर देने वाला था। श्रीमती सुधा महाजन ने गुरुसत्ता का संदेश देते हुए कहा कि नारी न तो अबला है और न कमजोर; उसे ईश्वर ने विशेष विभूतियों के साथ इस धरती पर भेजा है। वह स्रजेता है, अपनी क्षमताओं को पहचान कर वह सुखी- संस्कारवान परिवार और सबल राष्ट्र का निर्माण कर सकती है।

शानदार कलश यात्रा
१००८ कलशों सहित शानदार शोभायात्रा निकली। बहिनों ने प्रज्ञा पुराण, तुलसी के पौधे और मंत्र लिखित पुस्तिकाएँ भी मस्तक पर धारण की थीं। कलश यात्रा में व्यायामशाला की प्रशिक्षित युवतियाँ भी अपने अखाड़े के करतब दिखाती चल रही थीं। भाइयों के जोशीले नारों ने व्यसन- कुरीतियों से दूर रहने का संदेश दिया।

कार्यक्रम में १५० दीक्षा, ४ आदर्श विवाह सहित बड़ी संख्या में विविध संस्कार हुए। ३०० युवाओं ने नशा- शराब, बीड़ी, ज़र्दा, गुटका आदि व्यसन छोड़ने के संकल्प लिये। १०८ युग साहित्य सेट एवं देवस्थापना चित्रों का भी नि:शुल्क वितरण हुआ।

दम्पति शिविर
इसी समारोह में दम्पत्ति शिविर भी सम्पन्न हुआ। शान्तिकुंज के मनीषी आदरणीय श्री वीरेश्वर उपाध्यायजी एवं श्री विष्णु पण्ड्या जी ने इसे सम्बोधित किया।


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