देवभूमि हिमाचल प्रदेश में देव संस्कृति विस्तार का प्रभावशाली अभियान आरंभ

Published on 2017-07-15

प्रांतीय लोक जागरण जन सम्मेलन एवं १०८ कुण्डीय विराट गायत्री महायज्ञ, कुल्लू में उभरा संकल्प 

देवभूमि हिमाचल प्रदेश की दिव्यता सारे विश्व को आकर्षित करती है। करोड़ों पर्यटक प्रतिवर्ष इसका लाभ लेने आते हैं। लेकिन आज ऋषियों, तपस्वियों, देवताओं की इस भूमि के निवासियों के जीवन को ड्रग्स, शराब जैसे नशे, मांसाहार, अंधविश्वास आदि खोखला करते जा रहे हैं। अखिल विश्व गायत्री परिवार के प्रांतीय संगठन ने अब पूरे प्रदेश में सशक्त लोकजागरण अभियान चलाते हुए समाज में फैली तमाम कुरीतियों को दूर करने और देव संस्कृति का विस्तार करने का संकल्प लिया है। इस आशय का संकल्प कुल्लू में २४ से २७ जून २०१७ की तारीखों में आयोजित प्रांतीय लोकजागरण जन सम्मेलन एवं १०८ कुण्डीय विराट गायत्री महायज्ञ में उभरा। 

गायत्री परिवार द्वारा एक लम्बे समय के बाद हिमाचल प्रदेश में इतना बड़ा कार्यक्रम आयोजित किया गया था। कुल्लू में पहली बार १०८कुण्डीय यज्ञ सम्पन्न हुआ। शांतिकुंज से आदरणीय डॉ. प्रणव पण्ड्या जी, केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्री जगत प्रकाश नड्डा जी  और उनकी धर्मपत्नी श्रीमती मल्लिका नड्डा जी की विशेष उपस्थिति ने कार्यक्रम की गरिमा बढ़ा दी। उन्होंने अपनी पत्नी श्रीमती मल्लिकानड्डा व ९९ वर्षीया बुआ श्रीमती गंगा देवी शर्मा के देवपूजन किया। नड्डा दम्पति ने कार्यकर्त्ताओं के संकल्प को बल देते हुए आदरणीय डॉ.साहब से प्रदेश को नशा- कुरीतियों से मुक्त कराने और देवभूमि की गरिमा के अनुरूप देव संस्कृति का विस्तार करने का आग्रह किया। 
हर वर्ष होंगे ऐसे यज्ञ इस महायज्ञ में निर्णय लिया गया कि हिमाचल प्रदेश के किसी एक जिले में हर वर्ष कुल्लू में आयोजित कार्यक्रम जैसा ही १०८ कुण्डीय गायत्री  महायज्ञ किया जायेगा। उसके प्रयाज में पूरे प्रदेश, विशेषकर उसी जिले में लोक जागरण अभियान चलाया जायेगा। सभी १२ जिलों में ऐसे कार्यक्रम सम्पन्न होने के बाद एक अश्वमेध महायज्ञ का आयोजन हिमाचल प्रदेश में किया जायेगा। 
आदरणीय डॉ. प्रणव पण्ड्या जी २६ एवं २७ जून की तारीखों में महायज्ञ में उपस्थित थे। उन्होंने दीपमहायज्ञ एवं पूर्णाहुति यज्ञ के समय दिये अपने उद्बोधनों में अभीष्ट उद्देश्य की पूर्ति के लिए संस्कार परम्परा को पुनर्जाग्रत करने की प्रेरणा विशेष रूप से प्रदान की। उन्होंने इस कार्य में युवाओं और मातृशक्ति की भूमिका पर विशेष प्रकाश डाला। 
केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्री जे.पी. नड्डा जी और उनके परिवार का इस महायज्ञ के आयोजन में विशिष्ट योगदान रहा। उनकी धर्मपत्नी श्रीमती मल्लिका नड्डा एक समर्पित कार्यकर्त्ता के रूप में आवास आदि व्यवस्थाएँ करती दिखाई दीं। उन्होंने कलश यात्रा का प्रथम पूजन किया और मस्तक पर शक्तिकलश धारण कर स्वयं कलश यात्रा की अगुवानी की। श्री नड्डा जी की ९९ वर्षीया बुआ श्रीमती गंगा देवी शर्मा परम पूज्य गुरुदेव से १९७६ में दीक्षित हैं। आज भी उनकी साधकोचित दिनचर्या है, वे पूर्ण स्वस्थ हैं। उनकी प्रेरणा से ही नड्डा दम्पति मिशन से जुड़े हैं, कई बार शांतिकुंज आये हैं। श्री नड्डा जी ने ध्वजारोहण के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ किया, प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। वे अपनी धर्मपत्नी और बुआजी के साथ देवपूजन में पूरे दिन उपस्थित रहे। 

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