गुजरात और राजस्थान के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में अहर्निश सक्रिय है गायत्री परिवार का आपदा प्रबंधन दल

Published on 2017-08-05

गुजरात- राजस्थान में  बाढ़ राहत कार्य- सहयोग में पीछे न रहें 

इन दिनों गुजरात और राजस्थान में आयी भीषण बाढ़ की भयावहता सर्वविदित है। गुजरात का बनासकाँठा और राजस्थान के जालोर, सिरोही  जिले सर्वाधिक प्रभावित हैं। जुलाई के अंतिम सप्ताह में गुजरात और राजस्थान ने बाढ़ का ऐसा तांडव देखा, जिसकी किसी को कल्पना भी नहीं थी। सर्वाधिक प्रभावित हुए गुजरात के बनासकाँठा और राजस्थान के जालौर एवं सिरोही जिले। गाँव के गाँव पानी में डूब गये। सड़कें टूट जाने से जनसंपर्क टूट गया। मवेशियों का अता- पता नहीं। खेती पूरी तरह से बरबाद हो गयी। कच्चे मकान ढह गये। घरों में छाती तक पानी आ जाने के कारण हजारों परिवारों को न जाने कितनी रातें छत पर बितानी पड़ी होंगी। न भोजन का ठिकाना और न पानी का। वाहन बह गये। घर का सारा सामान नष्ट हो गया। १ अगस्त को समाचार लिखे जाने तक अकेले गुजरात में लगभग २५० लोगों के मारे जाने के समाचार मिल रहे हैं। 

शांतिकुंज प्रतिनिधियों के  मार्गदर्शन में चल रहा है राहत कार्य -९० लाख रुपयों की सामग्री बाँटी गयी 
१ अगस्त तक वितरित किये १०,००,००० भोजन के पैकेट, ५,००,००० पानी की बोतलें, २,००,००० लोगों को कपड़े और १,५०,००० राशन के पैकेट (न्यूनतम ७ दिनों के लिए) 

१ अगस्त २०१७ को समाचार लिखे जाने तक गुजरात के बेस कैम्प डीसा द्वारा जरूरतमंदों में ९० लाख रुपयों से ज्यादा की राहत सामग्री वितरित कर दी गयी है। यह सामग्री अहमदाबाद की ओढव, ईसनपुर, घोडासर, शाहीबाग, राणीप, बापूनगर, नरोडा, इण्डिया कॉलोनी शाखाओं के अलावा वडोदरा, सूरत, गाँधीनगर, डीसा, मालगढ़, कांकरेज, थराद, पाटण, हिम्मतनगर, राधनपुर, धानेरा, दियोदर, डीसा, माणसा, समी, वाव, दाहोद, कलोल, लिमड़ी, सुरेन्द्रनगर, विजापुर, पालनपुर, सुईगाम, लाखणी, वाराही आदि शाखाओं द्वारा अपने आसपास के मुहल्ले, गाँव, नगरों में जन- जन से सम्पर्क कर जुटाई और बेसकैम्प गायत्री शक्तिपीठ डीसा को भेजी गयी है। इन्हीं शाखाओं के सैकड़ों कार्यकर्त्ता बाढ़ राहत कार्यों में जुटे हैं, गाँव- गाँव जाकर पीड़ितों की सेवा कर रहे हैं। गायत्री तीर्थ अंबाजी जैसी अनेक शाखा- शक्तिपीठें सीधे भी बाढ़ प्रभावितों की सेवा में जुट गयी हैं। 

गायत्री शक्तिपीठ डीसा बना बेस कैम्प 
खिल विश्व गायत्री परिवार आपदा की हर घड़ी में अविलंब सक्रिय हो जाता है। गुजरात में भी ऐसा ही हुआ। आद. जीजी ने शांतिकुंज में कार्यकारिणी तथा आपदा प्रबंधन के सदस्यों से विचार विमर्श किया। कनाडा यात्रा पर गये आद. डॉ. साहब की सहमति के साथ २६ जुलाई से राहत कार्य आरंभ कर दिये गये। 

गायत्री परिवार ओढव, अहमदाबाद शाखा के श्री मीठाभाई के नेतृत्व में चेतन भाई, चिराग व्यास, लक्ष्मण भाई, प्रकाश ठक्कर, चिराग शाह, मोहनभाई, सुखदेवभाई माली आदि ३० युवाओं का दल भारी मात्रा में राहत सामग्री लेकर २६ जुलाई को डीसा पहुँच गया था। वे अपने साथ २ ट्रक भरकर भोजन सामग्री, पानी की बोतलें, कपड़े, दवाइयाँ एवं एम्बुलेंस लेकर गये थे।   ओढ़व, डीसा और मालगढ़ के कार्यकर्त्ता भाई- बहिनों और सेवाभावी परिजनों के सहयोग से भोजन पैकेट्स तैयार किये जाने लगे। गुजरात की अनेक शाखाओं के कार्यकर्त्ता जुटने लगे, राहत सामग्री पहुँचने लगी। युद्ध स्तर पर राहत कार्य आरंभ कर दिये गये। जैसे ही बाढ़ का पानी  थोड़ा उतरा, परिजन जरूरतमंदों तक भोजन, पानी, कपड़े, दवाइयाँ आदि लेकर पहुँचाने लगे। 

समाचार लिखे जाने तक डीसा शक्तिपीठ पर ३५० कार्यकर्त्ता राहत एवं बचाव कार्यों में जुटे हैं। २९ जुलाई तक विभिन्न क्षेत्रों से १५ ट्रक राहत सामग्री बेस कैम्प डीसा में पहुँच चुकी थी। बाढ़ से सबसे ज्यादा प्रभावित रहे डीसा से १५० कि.मी. दूर छेवाडा विस्तार तक राहत सामग्री लेकर कार्यकर्त्ता पहुँच रहे हैं। 

साँचोर में है जालौर और सिरोही जिले का बेस कैम्प 
राजस्थान के जालौर जिले के साँचोर में बेस कैम्प बनाया गया है। श्री महेन्द्र सिंह के नेतृत्व में लगभग २५० कार्यकर्त्ता वहाँ सेवा कार्यों में जुटे हैं। अहमदाबाद, गुजरात से डॉ. भीखूभाई पटेल के नेतृत्व में चिकित्सक एवं पैरामेडिकल स्टाफ एक एम्बुलेंस के साथ वहाँ सेवारत है। 

२५० परिवारों की मदद की 
अम्बाजी। गुजरात : गायत्री तीर्थ अंबाजी ने तत्काल राहत कार्य आरंभ कर दिये। उनके द्वारा लाखड़ी तहसील के रामपुरा और गोछा गाँव में २०० किलो सूखड़ी और नमकीन, बिस्किट के पैकेट बाँटे गये। शक्तिपीठ कार्यवाहक श्रीमती डाह्यीबेन पटेल के अनुसार ग्राम सरपंच केशाभाई जाट और प्राथमिक शाला के शिक्षकों के सहयोग से दोनों गाँवों के २५० परिवारों में यह राहत सामग्री वितरित की गयी। 

२००० परिवारों के लिए कपड़े भिजवाये 
गाँधीनगर। गुजरात : गायत्री परिवार गाँधीनगर ने लगभग ढाई लाख रुपये की राहत सामग्री गायत्री परिवार के बेस कैम्प तक पहुँचायी। उन्होंने पुरुषों के ५००० नये- पुराने कपड़े, बहिनों के लिए २००० साड़ियाँ, २००० सूट, १२५० बच्चों के कपड़े, १००० ऊनी कपड़े राहत कैम्प तक पहुँचाये। गाँधीनगर शाखा द्वारा १०० किलो अनाज और ३०० लोगों के भोजन पैकेट भी बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के लिए रवाना किये। 

उदार अंत:करण से सहयोग करें पीड़ित मानवता की सेवा सबसे बड़ा धर्म है। मानवता पर आये भीषण संकट की इस घड़ी में गुजरात और राजस्थान ही नहीं पूरे देश में बाढ़ पीड़ितों की भरपूर सेवा करें।

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