मनःस्थिति बदलें तो परिस्थिति बदले -डॉ पण्ड्याजी

Published on 2017-08-13

विभिन्न प्रांतों से आये शोधार्थियों को सम्बोधित करते हुए डॉ पण्ड्याजी ने कहा -मनःस्थिति बदलें तो परिस्थिति बदले 

हरिद्वार १३ अगस्त। 
गायत्री परिवार प्रमुख श्रद्धेय डॉ. प्रणव पण्ड्याजी  ने कहा कि मनुष्य उतना ही जानता है जितना कि उसे प्रत्यक्ष दिखाई देता है। शेष अदृश्य जगत का सूक्ष्म स्तरीय क्रियाकलाप है, जो सृष्टि में हर पल घटित हो रहा है। उन्होंने कहा कि आर्ष ग्रन्थों, महापुरुषों की अनुभूतियों, घटना प्रसंगों के माध्यम से जानकारी अवश्य है किन्तु उन्हें देखा हुआ न होने के कारण कहा जाता है कि यह सब विज्ञान सम्मत नहीं है।

डॉ. पण्ड्याजी  शांतिकुंज में आयोजित चार दिवसीय शोध शिविर के तीसरे दिन शोधार्थियों को सम्बोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि गायत्री परिवार के जनक युगऋषि पं. श्रीराम शर्मा आचार्य जी अपनी अनूठी शैली में लिखे साहित्य में विज्ञान के विभिन्न पक्षों का विवेचन कर ब्राह्मी चेतना की व्याख्या तक पहुँचते हैं। वे कहते हैं कि यदि आज की मूढ़ मान्यताओं, अंधविश्वासों की छवि को विज्ञान सम्मत बनाया जा सके, तो जो भी कुछ धर्म का स्वरूप एक ढकोसले के रूप में दिखाई देता है, वह स्पष्ट समझ में आने लगेगा। उन्होंने कहा कि लोगों की मनःस्थिति बदलेगी, तो परिस्थिति भी बदलती हुई नजर आयेगी और यही सच्चा अध्यात्मवाद है।   

ब्रह्मवर्चस शोध संस्थान के प्रयोजन को बताते हुए डॉ पण्ड्याजी  ने मनःस्थिति से परिस्थिति का निर्माण, सद्विचारों का निर्माण, आस्तिकता का सशक्त समर्थन, प्रसुप्त शक्तियों का जागरण, विश्वास की शक्ति सहित विभिन्न अभियानों की विस्तार से जानकारी दी।   

इससे पूर्व शांतिकुंज मनीषी श्री वीरेश्वर उपाध्याय, श्री कालीचरण शर्मा, डॉ. गायत्री शर्मा, डॉ. गायत्री किशोर, प्रमोद भटनागर, शचीन्द्र भटनागर, डॉ. कर्ण सिंह, आदि विषय विशेषज्ञों ने शोधार्थियों का मार्गदर्शन किया। इस अवसर पर उ.प्र, म.प्र, छत्तीसगढ़, गुजरात सहित कई राज्यों के २५० से अधिक चयनित शोधार्थी भाई- बहिन उपस्थित रहे। संचालन श्री केदार प्रसाद दुबे ने किया। 


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