देसंविवि में मना मुख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र सिंह रावतजी के साथ गुरुगोविन्द सिंह जी का ३५०वाँ प्रकाशोत्सव

Published on 2017-08-22

देवसंस्कृति विश्वविद्यालय के मृत्युजंय सभागार में सिख धर्म के दसवें गुरु श्री गोविन्दसिंह जी के ३५०वाँ प्रकाशोत्सव उल्लास पूर्वक मनाया गया। कार्यक्रम की शुरुआत गुरुग्रंथ साहिब की अरदास से हुई।

एकता और अखण्डता का प्रतीक है गुरुग्रन्थ साहिब : डॉ. अहलूवालिया
देसंविवि में स्थापित होगा गुरुग्रन्थ साहिबः डॉ. पण्ड्याजी
समाज व देश को एकजूट रखने में सिख धर्म का विशेष योगदान : मुख्यमंत्री
भक्ति और शक्ति का अनुपम संगम : वी भगय्या

इस अवसर पर मुख्य अतिथि केन्द्रीय संसदीय राज्यमंत्री डॉ. एस.एस. अहलूवालिया ने कहा कि सिखों का इतिहास वीरता, शहादत एवं शौर्य की गाथाओं से भरा है जिसने भारतीय संस्कृति को बचाये रखा और वर्तमान में भी यह कार्य सिख बखूबी निभा रहे हैं। भारत में लगभग दो प्रतिशत सिख हैं जो विभिन्न देशों में भारतीय संस्कृति के प्रचार- प्रसार के साथ भारत की पहचान के रूप में कार्यरत हैं। गुरुग्रंथ साहिब में ३६ संतों की वाणी हैं, जिनके अंतिम श्लोक में भगवान श्रीराम का जिक्र है और जो सभी धर्मों की एकता व अखण्डता को दर्शाता है। आज जन- जन तक इसकी प्रेरणा को पहुंचाने की जरूरत है। गायत्री परिवार इस कार्य को सफलता के साथ कर रहा है। हम इस परिवार का विशेष रूप से आभार व्यक्त करते हैं।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे अखिल विश्व गायत्री परिवार प्रमुख डॉ. प्रणव पण्ड्याजी ने कहा कि श्रेष्ठ मानव की तीन अवस्थाएँ होती हैं, संत, सुधारक और शहीद। इन तीनों गुणों का समन्वित रूप थे गुरु गोविन्द सिंह जी, जो कि समाज के सामने एक श्रेष्ठ उदाहरण हैं। धर्म, संस्कृति व राष्ट्र के लिए उन्होंने परिवार तक का बलिदान कर दिया। डॉ. पण्ड्याजी  ने कहा कि गुरुग्रंथ की ऊर्जा से देवसंस्कृति विवि में प्रकाशित होगा। उन्होंने घोषणा की कि विवि में गुरुग्रंथ साहिब की स्थापना होगी और गुरुमुखी भाषा की पढ़ाई भी निकट भविष्य में प्रारंभ की जायेगी।

विशिष्ट अतिथि मुख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र सिंह रावतजी ने कहा कि भारतीय संस्कृति को बचाये रखने में गुरु गोविन्दसिंह का अमूल्य योगदान रहा  है। आतताइयों के कुचक्रों से संस्कृति को बचाये रखने में सर्वोच्च बलिदान दिया। वे त्याग के प्रतिमूर्ति, संत थे। उन्होंने कहा कि समाज व देश  को एकजूट रखने में सिख धर्म के गुरुओं का विशेष योगदान रहा है। मुख्यमंत्री ने अपने बचपन को याद करते हुए गुरु परंपरा के निर्वहन पर  जोर दिया।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह वी. भगय्या ने कहा कि जब- जब देश में संकट आई, तब- तब महान् गुरुओं ने आगे बढ़कर उसका समाधान निकाला। यहाँ भक्ति और शक्ति का अनुपम संगम है। सभी मिलकर युवा पीढ़ी को नई दिशा देने के लिए कार्य करें। उन्होंने  कहा कि समाज के प्रत्येक क्षेत्र में आई विपदाओं को गुरुओं ने दूर किया। हम सभी को राष्ट्र देवता की आराधना करनी चाहिए। तख्त श्री हरमिन्दर साहब के प्रमुख जत्थेदार ज्ञानी इकबाल सिंह ने कहा कि गंगा स्वच्छता अभियान में गायत्री परिवार के साथ मिलकर कार्य करेंगे।

इससे पूर्व देवसंस्कृति विवि परिवार की ओर से प्रतिकुलपति डॉ. चिन्मय पण्ड्याजी ने अतिथियों का भव्य स्वागत किया। इस अवसर पर कुलाधिपति ने अतिथियों को स्मृति चिह्न, युगसाहित्य एवं पौधे भेंटकर सम्मानित किया। वहीं सिख भाइयों ने भी शांतिकुंज व विवि परिवार को रूमाला भेंट किया। इस दौरान गोविंद गीता का विमोचन अतिथियों ने किया। इस अवसर पर कुलपति श्री शरद पारधी, कुलसचिव श्री संदीप कुमार, हरिद्वार के मेयर मनोज गर्ग, जिला व पुलिस प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारीगण तथा सिख सम्प्रदाय के अनेक अनुयायियों के साथ विवि व शांतिकुंज परिवार मौजूद रहे।

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