गणेशोत्सव और दुर्गापूजा पर्व पर्यावरण के अनुकूल ही मनायें

Published on 2017-08-28
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जलस्रोतों को प्रदूषण से बचायें
भक्त चाहते हैं भगवान का प्यार,
शांति, समृद्धि और सुखी संसार। 
पर करें नहीं यदि विवेक-विचार,
तो कैसे हो भक्तों का उपकार? 

अखिल विश्व गायत्री परिवार पिछले कई वर्षों से गणेशोत्सव और दुर्गा पूजा जैसे पर्वों को अपनी सनातन परम्परा के अनुरूप, पर्यावरण के अनुकूल बनाने के लिए जनजागरूकता अभियान चला रहा है। इसमें उल्लेखनीय सफलता मिली है। घर-घर मिट्टी और सुपारी की बनी गणेश प्रतिमाओं की स्थापना होने लगी। मूर्तियों का विसर्जन पवित्र नदी, तालाबों में न होकर अलग से एक कुण्ड बनाने और उन्हीं में विसर्जन करने का क्रम जोरशोर से आरंभ हो गया है। 

माननीय प्रधानमंत्री जी ने भी 30 जुलाई को कही अपनी मन की बात में इस विषय की ओर देशवासियों का ध्यानाकर्षित किया है। आशा है इस अभियान को अपेक्षित गति मिलेगी। आइये! अवांछनीय परम्पराओं को बदलने में जी-जान से जुट जायें। गणेशोत्सव एवं दूर्गापूजा पर्वों को पर्यावरण के अनुकूल मनाने के लिए जोरदार अभियान चलायें। 

• प्लास्टर आॅफ पेरिस की प्रतिमाओं का प्रयोग नहीं करेंगे। 
नोट-भारत की सनातन परम्परा में मिट्टी और पत्थर की मूर्तियों की प्रतिष्ठा और स्थापना का विधान है। 
• जहरीले रंग-रसायनों के प्रयोग से बचेंगे।
• प्रतिमाओं का पवित्र जलाशयों में नहीं, विशेष कुण्डों में विसर्जन करेंगे। 
• फूल और पूजा के सामान का प्रयोग खाद बनाने में करेंगे। 
• ध्वनि प्रदूषण और फूहड़ कार्यक्रमों से बचेंगे। 

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