१०८ कुण्डीय गायत्री महायज्ञ, टोरंटो

Published on 2017-08-28
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महायज्ञ की विशिष्ट झलकियाँ 

• यज्ञ में १००० लोगों ने भाग लिया। 

• भारत के कौंसिल जनरल श्री देवेन्द्रपाल सिंह एवं श्री नवल बजाज ने यज्ञ में पधारे। श्री देवेन्द्रपाल सिंह ने गायत्री परिवार और सिक्ख धर्म की प्रेरणाओं को एक जैसा बताया। श्री बजाज ने प्रतिवर्ष ऐसे कार्यक्रम आयोजित करने का आह्वान किया। 

• २५१ कलशों के साथ विशाल कलश यात्रा निकली, जिसका रास्ते में पड़ने वाले मस्जिद, गुरुद्वारे एवं चर्च के प्रतिनिधियों ने स्वागत किया। 

• यज्ञ स्थल पर लगी प्रदर्शनी और साहित्य स्टॉल कार्यक्रम के प्रमुख आकर्षण थे। 

टोरंटो में मिसिसागा के प्रोफेशनल कोर्ट स्थित कालीबाड़ी मंदिर में ३ महीने की तैयारियों के साथ विशाल १०८ कुण्डीय गायत्री यज्ञ हुआ। इसके प्रयाज में व्यापक जनसंपर्क किया गया। नये और प्रबुद्ध जनों को प्राथमिकता देते हुए हर कुण्ड के लिए यजमान पहले से ही निर्धारित किये गये। 

मिसिसागा की प्रोफेशनल कोर्ट की टोरंटो में काशी- हरिद्वार जैसी मान्यता है। वहाँ मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारा, चर्च सभी धर्मों के उपासना स्थल हैं। टोरंटो का हर प्रवासी भारतीय साप्ताहिक अवकाश में वहाँ जाता है। 

मौसम अनुकूल रहा : यज्ञ के समय बारिश और आँधी की भविष्यवाणी थी, तद्नुसार तैयारियाँ भी की गयीं, लेकिन इसके विपरीत मौसम बड़ा सुहावना रहा। इसे लोग अच्छे कार्य के लिए दैवी अनुकम्पा ही मान रहे थे। 

कलश यात्रा : कार्यक्रम का शुभारंभ प्रात: ८ बजे २५१ बहिनों के साथ निकली कलश यात्रा से हुआ। रास्ते में पड़ने वाले मस्जिद, गुरुद्वारे, चर्च के प्रतिनिधियों ने भी इसका भव्य स्वागत किया। यज्ञस्थल पर शांतिकुंज की टोली द्वारा स्वागतोपरांत डॉ. चिन्मय जी ने उद्बोधन दिया। उन्होंने यज्ञ का ज्ञान- विज्ञान समझाते हुए इसे सामाजिक शांति, सद्भाव, समृद्धि के लिए परम आवश्यक बताया। 

१० बजे से देवपूजन आरंभ हुआ। श्री देवेन्द्रपाल सिंह, भारत के कौंसिल जनरल (सूचना एवं प्रसारण, समाज कल्याण) एवं श्री नवल बजाज, कंज़रर्वेटिव पार्टी के नेता एवं पूर्व सांसद भी इस अवसर पर पधारे। श्री देवेन्द्रपाल सिंह ने आदरणीय डॉ. साहब का भावभरा स्वागत- सम्मान किया। उन्होंने कहा, "में आपके कार्यों से भली भाँति परिचित हूँ। गायत्री परिवार और सिक्ख धर्म दोनों ही समाज, संस्कृति और राष्ट्र के उत्थान के लिए साहसपूर्वक आगे आने की प्रेरणा देते हैं। " 

आदरणीय डॉ. प्रणव पण्ड्या जी ने अपने उद्बोधन में जीवन में सद्गुरु की महत्ता बतायी। उन्होंने सैकड़ों लोगों को गुरुदीक्षा दिलाई और दीक्षा के अनुबंधों का पालन करते हुए जीवन को महानता की ओर अग्रसर करने का आह्वान किया। 
श्री नवल बजाज ने युवाओं को संस्कारवान बनाने के लिए गायत्री परिवार की भूरि- भूरि प्रशंसा की और प्रत्येक वर्ष ऐसे प्रेरणादायी कार्यक्रम आयोजित करने का अनुरोध आदरणीय डॉ. साहब से किया। उन्होंने इस कार्य में अपनी पार्टी का पूरा- पूरा सहयोग करने का आश्वासन भी दिया। 

१०८ कुण्डीय गायत्री महायज्ञ में गायत्री महामंत्र के साथ कनाडा के उज्ज्वल भविष्य के लिए विशिष्ट आहुतियाँ भी दी गयीं। इस महायज्ञ में लगभग १००० लोगों ने भाग लिया। सभी ने परम पूज्य गुरुदेव, परम वंदनीया माताजी की चरण पादुकाओं को प्रणाम करते हुए अपने श्रद्धा सुमन समर्पित किये। आदरणीय डॉ. साहब और डॉ. चिन्मय जी के साथ भेंट- परामर्श का क्रम भी साथ- साथ चलता रहा। 

साहित्य स्टॉल और प्रदर्शनी कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण थे। यज्ञ से बने प्यार और अपनत्व के वातावरण में सभी याजकों ने सहभोज भी किया। 

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