Published on 2017-09-08
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शांतिकुंज प्रतिनिधि श्री पुष्कर राज के ढाई माह के प्रवास ने कार्यक्रम की पृष्ठभूमि रची | वर्ष १९९३ में परम वंदनीया माताजी पहली बार किसी विदेशी दौरे पर गयी थीं। वे सबसे पहले अश्वमेध महायज्ञ लेस्टर के लिए ब्रिटेन की यात्रा  पर गयी थीं। उनके २५ वर्ष पूरे होने जा रहे हैं। यूके. वासी इस अद्वितीय सौभाग्य के पलों को धूमधाम से मनाना चाहते हैं। विगत जून माह में लंदन पहुँचे डॉ. चिन्मय पण्ड्या जी की विशेष उपस्थिति में परम वंदनीया माताजी के यूके पदार्पण की रजत जयंती २५ एवं २६ अगस्त २०१८  की तारीखों में १०८ कुण्डीय गायत्री महायज्ञ के साथ मनाने का निर्णय किया गया। डॉ. चिन्मय जी ने इसकी रूपरेखा प्रस्तुत की और आदरणीया जीजी, आदरणीय डॉ. साहब के साथ इस कार्यक्रम में स्वयं के आने का आश्वासन भी दिया। २२ मई से १० अगस्त २०१७ तक ब्रिटेन की प्रव्रज्या पर पहुँचे शांतिकुंज प्रतिनिधि श्री पुष्कर राज ने इस समारोह की शानदार पृष्ठभूमि रच दी है। 
श्री पुष्कर राज ढाई माह से अधिक यूके प्रवास पर रहे। इन दिनों उन्होंने लंदन, क्रोएडन, चिंगफोर्ड, रगबी, किसलिंक, वेमली, क्रॉली, बरमिंघम, कोवेंट्री, हेरो, लेस्टर, इल्फोर्ड, वेलिंग्ब्रो, एलिंगटन आदि क्षेत्रों का जबरदस्त मंथन किया। उनकी जागरूकता से कार्यकर्त्ता भी बहुत प्रभावित हुए। यही कारण था कि कार्यकर्त्ताओं के निर्धारण से कहीं ज्यादा लगभग दो गुने कार्यक्रम सम्पन्न हुए। 
पुष्कर राज ने लगभग १०० कार्यक्रम किये। कामकाजी दिनों में भी वे नैष्ठिक परिजनों को झकझोरते रहे। परिणाम स्वरूप जन्मदिन, पुंसवन, नामकरण, दीक्षा जैसे संस्कारों का क्रम चलता ही रहा। 
सात- आठ कार्यक्रम बृहद् स्तर के थे। इनमें ३०० से ४०० लोगों की उपस्थिति रही। लंदन के मान्धाता हॉल, लंदन, नागरेचा हॉल लंदन के ही  एकनाथ मंदिर, कोवेंट्री के श्रीकृष्ण मंदिर, एलिंगटन के श्रीकृष्ण मंदिर में ये कार्यक्रम आयोजित किये गये थे। 
उल्लेखनीय सफलता मिली 
श्री पुष्कर राज के कार्यक्रमों में हर वर्ग के लोगों ने भाग लिया। वे गायत्री परिवार की पारिवारिकता, कर्मकाण्ड की वैज्ञानिकता और युग संदेश  की व्यावहारिकता से बहुत प्रभावित दिखाई दिये। 
एलिंगटन के श्रीकृष्ण मंदिर में आयोजित कार्यक्रम में वहाँ के परिव्राजक ने भी गायत्री की प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला, जिसमें उन्होंने तमाम  धार्मिक मतभेदों से उठकर सामाजिक हित में मिलकर आगे बढ़ने का आह्वान किया। पुष्कर राज ने गायत्री विषयक तमाम भ्रांतियों का समाधान किया। 
श्रीकृष्ण मंदिर एलिंगटन ने हर वर्ष अपना वार्षिकोत्सव गायत्री परिवार के माध्यम से ही मनाने का निश्चय किया है।


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