बिहार के ६ जिलों में चल रहे हैं बाढ़ राहत एवं पुनर्वास के कार्य

Published on 2017-09-07
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२० लाख रुपये की सामग्री बाँटी 

आपदा प्रबंधन दल, शांतिकुंज के मार्गदर्शन में बिहार के छ: जिलों में चलाये गये राहत कार्यों में समाचार लिखे जाने (१ सितम्बर) तक २० लाख रुपये से ज्यादा की राहत सामग्री वितरित की जा चुकी थी। सूखा नाश्ता, राशन, कपड़े, कम्बल, बरतन, तिरपाल जैसी आवश्यक सामग्री वितरित की गयीं और भोजनालय चलाये गये। 

पुनर्वास योजनाएँ 
• अत्यंत क्षतिग्रस्त मकानों की मरम्मत में सहयोग करेंगे। 
• पूर्णिया जिले में १०८ तथा सीतामढ़ी जिले में २४ नये मकान बनाकर देंगे। 

अगस्त माह में आयी बाढ़ से उत्तरी बिहार के १७ जिले बुरी तरह प्रभावित रहे। जैसे ही बाढ़ के समाचार मिले, शांतिकुंज प्रबंधन अविलम्ब सक्रिय हो गया। आदरणीय डॉ. साहब, आदरणीया जीजी ने कार्यकारिणी से चर्चा कर पूर्वी जोन प्रभारी श्री रामयश तिवारी और रमाकांत पंडित को आवश्यक निर्देश देकर तत्काल १५ अगस्त को ही रवाना कर दिया।
 
शांतिकुंज प्रतिनिधि पटना पहुँचे। वहाँ कार्यकर्त्ताओं से चर्चा कर कार्ययोजना का निर्धारण किया गया। अलग- अलग क्षेत्रों के लिए अलग- अलग टोलियों का गठन हुआ। सर्वाधिक प्रभावित छ: जिले सीतामढ़ी, कटिहार, मधुबनी, अररिया, पूर्णियाँ और किशनगंज में बृहद् स्तर  पर सुनियोजित ढंग से राहत एवं पुनर्वास के कार्य चलाये जाने का निर्णय लिया गया। 
केन्द्रीय प्रतिनिधियों ने प्रत्येक क्षेत्र के प्रशासनिक अधिकारियों से चर्चा की और उनके परामर्श के अनुरूप ही अपना कार्यक्षेत्र निर्धारित किया। अधिकारियों ने गायत्री परिवार की क्षमता को देखते हुए अत्यंत चुनौतीपूर्ण क्षेत्र दिये। गायत्री परिवार के कार्यकर्त्ताओं ने आवंटित क्षेत्रों में इतनी तत्परता और सेवाभावना के साथ अपनी जिम्मेदारियाँ पूरी कीं कि वह पूरे क्षेत्र के लिए अविस्मरणीय हो गयीं। 

पटना शाखा ने पिकअप वैन, ५० हजार रुपये की सामग्री और ५० हजार रुपये नकद दिये, ताकि तत्काल कार्य आरंभ किया जा सके। १७ अगस्त से ही सूखे नाश्ते के पैकेट बनान- बाँटने का कार्य आरंभ हो गया। 

शांतिकुंज और क्षेत्रीय प्रतिनिधियों ने इन क्षेत्रों में जगह- जगह कार्यकर्त्ता गोष्ठी लेकर सेवाकार्यों के लिए कार्यकर्त्ता तैयार किये और उनकी टोलियाँ बनाकर अलग- अलग क्षेत्रों की जिम्मेदारी सौंपी। 

सभी जिलों के अनेक गाँवों का सर्वे किया गया। पाया गया कि २० प्रतिशत मकान क्षतिग्रस्त हो गये हैं। जरूरतमंदों की सूची बनायी गयी और  आवश्यकतानुसार राहत सामग्री बाँटी गयी। क्षतिग्रस्त मकानों की मरम्मत में सहयोग करने का आश्वासन भी दिया गया। 

अथाह संकट की घड़ी में बेघर हुए लोगों के पुनर्वास के लिए मकान बनाकर देने के संकल्प भी परिजनों में उभरे हैं। समाचार लिखे जाने तक पूर्वी जोन ने अपने सर्वेक्षण और क्षेत्रीय लोगों के उत्साह के आधार पर पूर्णिया जिले में १०८ तथा सीतामढ़ी जिले में २४ मकान बनाकर देने का निर्णय लिया है। जनसहयोग के आधार पर इसे यथासंभव बढ़ाया जायेगा। 

सेवा का स्वरूप 
सूखी भोजन सामग्री बाँटी : गायत्री परिवार ने इन सभी छ: जिलों में आरंभ में चूड़ा, मूडी, भुने चने, बिस्किट, नमकीन, पानी की बोतल जैसी  सूखी सामग्री वितरित की। प्रत्येक जिले में हजारों लोगों को प्रतिदिन भोजन सामग्री उपलब्ध करायी गयी। अररिया जिले के १८ गाँवों में सूखा सामान बाँटा गया। 

भोजनालय चलाये : कटिहार एवं सीतामढ़ी जिलों में भोजनालय (लंगर) चला सकने की व्यवस्था उपलब्ध हो गयी। कटिहार के झौआ ग्राम  में और सीतामढ़ी के अथरी ग्राम में १९ अगस्त से ही भोजनालय आरंभ कर दिये गये जो समाचार लिखे जाने (१ सितम्बर) तक चल रहे थे। दोनों ही भोजनालयों में १००० से लेकर १५०० व्यक्ति प्रतिदिन भोजन करते थे। इसके अलावा विभिन्न जिलों के कोठी, मनिया, झौआ, हरिभाषा, पिपरा, कुर्सेल, सोहन्दर, अथरी गुठेली, अरिहाना, मरही एवं आसपास के गाँवों के लोगों को गायत्री परिवार की सेवाओं का लाभ मिला। 

राशन वितरण : जैसे- जैसे स्थिति सामान्य हो रही है वैसे- वैसे लोग अपने रोजमर्रा के जीवन में आने का प्रयास कर रहे हैं। गायत्री परिवार ने सभी गाँवों में हुए नुकसान का आकलन कर लिया था। उसी के आधार पर कम से कम एक सप्ताह की सूखी भोजन सामग्री, आवश्यक कपड़े, बरतन आदि उन्हें दिये जा रहे हैं। 

चिकित्सा सेवाएँ : गायत्री परिवार ने गाँव- गाँव जाकर मेडिकल कैम्प लगाये और मरीजों को नि:शुल्क दवाइयाँ भी दीं। यह कार्य डॉ. आनन्दी केशव और उनके सहयोगी दो चिकित्सकों के सहयोग से चलता रहा। 

सड़क मार्ग बंद होने के कारण रेलवे के सीनियर मैनेजर श्री वी.के. मिश्र, जो कि गायत्री परिवार के ही सदस्य हैं, ने विशेष कोच की व्यवस्था कार्यकर्त्ता और राहत सामग्री झौआ स्टेशन तक पहुँचायी। 

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