Published on 2017-09-11
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उत्तराखंड सरकार द्वारा सिंगापुर की तकनीकी विशेषज्ञ संस्था DHI एवं विश्व बैंक के सहयोग से हुई पहल आपदा प्रबंधन प्रकोष्ठ शांतिकुंज के अनुभव और सुनियोजित तंत्र का उपयोग 
• सभी 13 जिलों का आपदा जोखिम आकलन होगा। • गायत्री परिवार के विशेषज्ञ कार्यकर्त्ता सर्वेक्षण एवं पुनर्वास कार्यों में शामिल होंगे। • योजना के क्रियान्वयन के लिए 500 गाँव चुने जायेंगे। 
उत्तराखंड एक मध्य हिमालयी राज्य है। यहाँ की भूगर्भीय संरचना, अत्यधिक वर्षा एवं अन्य कारणों से यहाँ भूकम्प, भूस्खलन, त्वरित बाढ़, बादल फटने जैसी आपदाएँ आये दिन होती ही रहती हैं। 
जनसंख्या वृद्धि और अनियोजित विकास इन घटनाओं को बढ़ा रहा है। इसे देखते हुए उत्तराखण्ड सरकार ‘उत्तराखण्ड राज्य पुनर्वास परियोजना’ के अंतर्गत पूरे प्रदेश के प्राकृतिक खतरों को भाँपते हुए विकास कार्यों को सुनियोजित करने और एक सुरक्षित भविष्य की नींव रखने जा रहा है। 
उत्तराखंड सरकार विषय विशेषज्ञों के माध्यम से सम्पूर्ण राज्य का आपदा जोखिम आंकलन (Disaster Risk Assessment) कराने जा रही है। कार्ययोजना की प्रमुख जिम्मेदारी सिंगापुर की संस्था ऊऌक को सौंपी गयी है। आपदा प्रबंधन विभाग, शांतिकुंज को इस योजना का एक प्रमुख हिस्सेदार बनाया गया है। 
17 अगस्त 2017 को शांतिकुंज में इस योजना संबंधी एक महत्त्वपूर्ण बैठक हुई, जिसमें डीएचआई के प्रतिनिधि मि. टॉम बरकिट, रिस्क एसेसमेण्ट कंसल्टेण्ट, सुश्री आॅडिलिआ संजय एसोसिएट एन्वायरमेण्ट कंसल्टेण्ट, श्री रजनीश कुमार, आॅफिस मैनेजर विश्व बैंक के साथ आपदा प्रबंधन प्रकोष्ठ, शांतिकुंज के प्रतिनिधि श्री राकेश जायसवाल ने भाग लिया। प्रदेश की परिस्थितियों और भावी कार्ययोजनाओं पर विस्तार से चर्चा हुई। 
श्री राकेश जायसवाल ने बताया कि गायत्री परिवार राज्य में आपदा प्रबंधन कार्यों में संलग्न सबसे अग्रणी संस्था है। प्रदेश सरकार ने इस महत्त्वपूर्ण परियोजना में उनके अनुभव और ज्ञान का लाभ लेने का निश्चय किया है। योजना के अंतर्गत राज्य के प्रत्येक जिले का अलग- अलग  दृष्टिकोण से आकलन किया जायेगा। सर्वप्रथम सर्वाधिक संवेदनशील 500 गाँव- शहरों को चुना जायेगा और वहाँ आपदा प्रतिरोधक कार्यों को गतिशील किया जायेगा। गायत्री परिवार के प्रशिक्षित कार्यकर्त्ता राज्य के सभी 13 जिलों में इस कार्य में सहयोग करेंगे। 
आदरणीय डॉ. प्रणव पण्ड्या जी, आदरणीया शैल जीजी एवं आपदा प्रबंधन प्रकोष्ठ के प्रभारी श्री गौरीशंकर शर्मा जी ने राज्य सरकार की इस  पहल की सराहना की और अपने पूरे- पूरे सहयोग का आश्वासन दिया।


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