Published on 2017-09-11
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विशेष ज्ञातव्य 

  • पोर्ट ब्लेअर में २, ३, ४ फरवरी २०१८ में पुन: विशाल १०८ कुण्डीय गायत्री महायज्ञ आयोजित हो रहा है। इसकी तैयारियाँ जोरशोर से चल  रही हैं। प्रयाज क्रम में साधना, संस्कार, स्वावलम्बन, नशा उन्मूलन, अश्लीलता निवारण, बाल संस्कार शाला, प्रौढ़ शिक्षा आदि आन्दोलनों को  गति दी जा रही है। 
  • पोर्ट ब्लेअर में बीच बाजार में गायत्री चेतना केन्द्र का निर्माण किया जा रहा है। समर्पित कार्यकर्त्ता श्री अमित गोयनका ने इसके लिए अपनी  ३ करोड़ रुपये की भूमि दान की है। 
  •  पोर्ट ब्लेअर। अंडमान निकोबार द्वीप समूह 
पोर्ट ब्लेअर में जनवरी २०१६ में गायत्री परिवार का एक विशाल कार्यक्रम आयोजित हुआ। आदरणीय डॉ. प्रणव पण्ड्या जी की उपस्थिति में  सम्पन्न हुए इस कार्यक्रम से पूरे द्वीप समूह में गायत्री चेतना के विस्तार अभियान को जो गति मिली है, वह असाधारण है। पिछले २- ३ वर्षों में ही इस द्वीप समूह में गायत्री परिवार से हर कोई परिचित है। ५५० द्वीपों के इस समूह में बरातांग, कदमतला, रंगत, माया बंदर, डिगलीपुर, हुतबेय, लॉग आईलैण्ड, नेल आदि ३५- ४० ही ऐसे द्वीप हैं जिन पर लोग रहते हैं। उन सभी द्वीपों में अखण्ड ज्योति पत्रिका पहुँचती है। हर द्वीप पर यज्ञ- दीपयज्ञ के कार्यक्रम हुए हैं। हजारों की संख्या में वहाँ नैष्ठिक गायत्री उपासक बने हैं। 

अकल्पनीय कठिन परिस्थितियाँ अंग्रेजों के राज में अंडमान निकोबार च्काला पानीज् था, जनजीवन से बहुत दूर, सुनसान बीहड़ जंगलों वाला क्षेत्र। सामान्य रूप से वहाँ 'काला पानी' की सजा प्राप्त स्वतंत्रता सेनानी ही जाते थे। आज वह भारत का एक सुंदर पर्यटन केन्द्र भले ही बन गया हो, लेकिन सुविधाएँ पोर्ट ब्लेअर जैसे एक- दो द्वीपों पर ही हैं। शेष की परिस्थितियाँ तो आज भी ऐसी कठिनाई भरी हैं, जिनकी सामान्य व्यक्ति कल्पना भी नहीं कर सकता। 

परिव्राजक श्री संतोष महतो ने बताया कि अधिकांश द्वीपों में वे वनवासी रहते हैं, जिन्होंने कभी आज की दुनिया देखी ही नहीं है। वहाँ न बिजली, न शिक्षा, न स्वास्थ्य सुविधा और न ही आवागमन के मार्ग हैं। मोबाइल जैसे जनसंपर्क के साधन भी नहीं हैं। इन द्वीपों तक पहुँचने का एकमात्र उपाय है पैदल यात्रा।  बीहड़ जंगलों से गुजरना होता है। नदी- नाले भी पार करने होते हैं। कब साँप, कानखजूरे, मगरमच्छ पर पाँव पड़ जाये, कोई पता नहीं। यात्री अपने साथ कागजी नीबू और नमक जरूर लेकर चलते हैं, क्योंकि चलते- चलते पैरों पर जोंक चिपक जाना सामान्य- सी बात  है। उन्हें नीबू और नमक से ही छुड़ाया जा सकता है। जहरीले कीड़े और मच्छरों से बचना तो बहुत कठिन है। ऐसे में कंधे पर काँवड़ की तरह  अखण्ड ज्योति पत्रिका और सारा सामान रखकर आगे बढ़ना होता है।
 
परिव्राजकों की भूमिका ऐसी कठिन परिस्थितियों में हर द्वीप तक, हर व्यक्ति तक पहुँचना जीवट भरा कार्य है। अपने लक्ष्य के प्रति गहरे समर्पण और प्रचण्ड मनोबल  के धनी व्यक्ति ही ऐसा साहसिक पुरुषार्थ कर सकते हैं। अंडमान द्वीप समूह में यह कार्य किया है गायत्री परिवार के नैष्ठिक परिव्राजक राजाराम, सौरभ मोरे, अनिरुद्ध मानशा आकाश पबन मण्डल आदि ने। 

द्वीप समूह में युगशक्ति का प्रभाव इन दिनों अण्डमान निकोबार द्वीप समूह में अखण्ड ज्योति के १८०० ग्राहक हैं। १००० हिन्दी पत्रिकाओं के अलावा वहाँ अंग्रेजी, बंगला, तमिल, तेलुगु, मलयाली, कन्नड़ भाषा में भी बड़ी संख्या में पत्रिकाओं के ग्राहक है। ५० हिन्दी और २०० बंगला प्रज्ञा अभियान भी वहाँ वितरित  किये जाते हैं। इन्हें परिव्राजकों द्वारा सुदूर द्वीपों में पढ़े- लिखे लोगों तक पहुँचाया जाता है। परिव्राजकों द्वारा उन द्वीपों पर यज्ञ कराये जाते हैं। उन्हें बेहतर जीवन जीने के लिए गायत्री उपासना करने तथा संस्कार परम्परा से जुड़ने की प्रेरणा दी जाती है। वहाँ के निवासियों को कथा- कहानियों के माध्यम से अपनी संस्कृति का बोध कराया जा रहा है। अण्डमान निकोबार में गायत्री परिवार की गतिविधियों से वहाँ के विद्वान- मनीषी बहुत प्रभावित हैं। राज्यपाल माननीय जगदीश मुखी, सांसद श्री विष्णु पद रे, आई.ए.एस., श्रीमती रश्मि सिंह, राजीव यदुवंशी, आई.ए.एस.- आई.पी.एस. अधिकारी, पंचायत सदस्य, बड़े व्यापारी आदि सभी मिशन का साहित्य और पत्रिकाएँ पढ़ते हैं और मिशन के विचारों एवं गतिविधियों के विस्तार में सहयोग कर रहे हैं। 

समर्थता और सक्रियता का सुंदर सुयोग सुदूर क्षेत्र अंडमान निकोबार में युगशक्ति गायत्री का इतना विस्तार न हुआ होता यदि मिशन के प्रति अनन्य भाव से समर्पित कार्यकर्त्ता सर्वश्री पवन रुंथला, अमित गोयनका, अनिल श्रीवास्तव, नीले मेगम, लक्ष्मीनारायण, हेमंत धींगरा, आर.पी. यादव आदि वहाँ मिशन के विस्तार के लिए नींव के पत्थर न बने होते। उनकी अटूट निष्ठा और अनन्य आस्था का ही प्रतिफल था कि ऐसे जीवट वाले परिव्राजक उन्हेें सहयोग प्रदान करने सुदूर अंडमान- निकोबार द्वीप समूह तक पहुँचे।   समर्थता और सक्रियता का यह युग्म कभी कालापानी कहे जाने वाले इस क्षेत्र में युगशक्ति गायत्री के अवतरण का माध्यम बनकर उसे एक नयी पहचान दिला रहा है। वहाँ सक्रिय राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ, विश्व हिंदू परिषद, सार्इंबाबा के अनुयायियों का भी इस कार्य में उल्लेखनीय सहयोग मिल रहा है। 


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