Published on 2017-09-17
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हरिद्वार १६ सितम्बर।देवसंस्कृति विश्वविद्यालय के पर्यावरण विभाग द्वारा विश्व ओजोन दिवस पर दो दिवसीय राष्ट्रीय सिम्पोजिम का आयोजन हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ प्रतिकुलपति डॉ०चिन्मय पण्ड्या ने दीप प्रज्वलन कर किया। 
इस अवसर पर डॉ० चिन्मय पण्ड्याजी ने कहा कि वैज्ञानिक दृष्टि से देखा जाय तो यह ओजोनपरत खरतनाक किरणों को हमारे प्रकृति पर आने से रोकती है। इस परत में छेद होने से पर्यावरण संबंधी नुकसान होते हैं। उन्होंने कहा कि वृक्ष, वनस्पतियाँ एवं पर्यावरण को मित्रभाव से इसी कारण पूजा जाता था कि वे हमें सकारात्मक लाभ प्रदान करें। इसके साथ ही वायुमण्डल को समृद्ध करने हेतु वसुधैव कुटुंबकम् के भाव को अपना कर प्रकृति का संरक्षित विकास किया जा सके। कुलसचिव श्री संदीप कुमार ने भारतीय संस्कृति के च्सर्वे भवन्तु सुखिनः पक्ष को समझाया। 
पर्यावरण विभाग के समन्वयक डॉ० पंकज सैनी ने कहा कि ग्लोबल वार्मिर्ंग के कारण ओजोन में हो रही समस्याओं पर विश्व एकजुट तो है, परंतु वहाँ सार्वभौमिक एकता की जरूरत है। डॉ० सुधांशुु कौशिक ने कहा कि इस प्रकृति में वायुमण्डल का बहुत महत्व है। वायुमण्डल की  परतों का नुकसान सीधा- जीवन को नुकसान है। दो दिवसीय इस कार्यक्रम में प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता के साथ- साथ पोस्टर, कोलाज मेकिंग, सफाई एवं जागरूकता जैसे अनेक कार्यक्रम हुए। 
कार्यक्रम समापन पर डॉ०सुशील भदूला ने अतिथियों, शिक्षकों एवं विद्यार्थियों का आभार व्यक्त किया। इस संगोष्ठी में राजकीय महाविद्यालय ऋषिकेश के प्रो० वी.डी. पाण्डे एवं प्रो० डी.एम. त्रिपाठी ने ओजोन परत के क्षरण से होने वाले विपरीत प्रभावों को समझाया। इस अवसर पर विज्ञान संकायाध्यक्ष प्रो० अभय सक्सैना, कला संकायाध्यक्ष प्रो० सुरेश वर्णवाल, डॉ० नरेन्द्र सिंह, डॉ. अरूणेश पराशर, डॉ. उमाकान्त इंदौलिया, डॉ. ममता भारद्वाज, डॉ. अवनेन्दु पाण्डेय इत्यादि लोग उपस्थित रहे। 


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