अश्वमेध यज्ञ रजत जयंती कार्यक्रम शृंखला से हो रहा है राजस्थान का मंथन

Published on 2017-09-20
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लक्ष्यबोध और संगठन सशक्तीकरण के लिए आयोजित हुर्इं उपजोन स्तरीय संगोष्ठियाँ जयपुर, रतनगढ़, पुष्कर, राजसमंद और कोटा में आयोजित हुर्इं संगोष्ठियाँ। केन्द्रीय प्रतिनिधियों ने २००० कार्यकर्त्ताओं को संबोधित किया।

इस वर्ष राजस्थान का प्रांतीय संगठन अश्वमेध महायज्ञ जयपुर, हल्दीघाटी और कोटा की रजत जयंती मना रहा है। इसके अंतर्गत २५१ से लेकर १०८ कुण्डीय तक के कुल आठ कार्यक्रम हर उपजोन में आयोजित किये गये हैं। रजत जयंती समारोहों के माध्यम से पूरे प्रदेश में युग निर्माण आन्दोलन को अश्वमेध महायज्ञों जैसी ही गति देने का लक्ष्य रखा गया है, हर गाँव का मंथन एवं रजवंदन करने की योजना बनायी गयी  है। 
रजत जयंती समारोह शृंखला के प्रयाज को गति देने के लिए २ से ६ सितम्बर २०१७ की तारीखों में उपजोन स्तरीय संगोष्ठियों का आयोजन किया गया। सभी जिलों के कर्मठ कार्यकर्त्ताओं को इनमें आमंत्रित किया गया। कार्यक्रमों के लक्ष्य का बोध कराने और बेहतर संगठन एवं तालमेल के साथ लक्ष्य सिद्धि के सूत्र प्रदान करने शांतिकुंज से आदरणीय श्री वीरेश्वर उपाध्याय जी एवं पश्चिम जोन समन्वयक श्री दिनेश पटेल पहुँचे। राजस्थान जोन प्रभारी श्री घनश्याम पालीवाल एवं परिव्राजक अवधेश त्रिपाठी पूरे प्रवास में केन्द्रीय प्रतिनिधियों के साथ रहे।

उपजोन स्तरीय संगोष्ठियों जयपुर, रतनगढ़, पुष्कर, राजसमंद और कोटा में आयोजित हुर्इं। भरतपुर उपजोन के कार्यकर्त्ता जयपुर की गोष्ठी में, जोधपुर के पुष्कर में और उदयपुर के कार्यकर्त्ता राजसमंद की गोष्ठी में शामिल हुए। समग्र कार्यक्रम शृंखला के लगभग २००० सूत्र  संचालकों को मार्गदर्शन मिला।

संगोष्ठियों में अब तक हुए कार्यों की समीक्षा हुई। कार्यकर्त्ताओं की सक्रियता ने उत्साहित किया। प्राय: हर क्षेत्र में निर्धारित लक्ष्य का ३० से ५० प्रतिशत तक कार्य कर लिये जाने की जानकारी जिला प्रभारियों ने दी। 
आदरणीय श्री उपाध्याय जी ने वर्तमान चुनौतियाँ और उनके समाधान के मार्मिक सूत्र दिये। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम सम्पन्न करा लेना हमारा लक्ष्य नहीं है, इनके माध्यम से युग निर्माण के सूत्रों को व्यक्तिगत, पारिवारिक, सामाजिक और राष्ट्रीय जीवन में प्रवेश दिलाना हमारा उद्देश्य होना चाहिए।

प्रयाज की योजनाएँ
• जयपुर, रतनगढ़, राजसमंद और कोटा में २५१ कुण्डीय, भरतपुर और पुष्कर में १५१ कुण्डीय तथा साँचोर में १०८ कुण्डीय यज्ञ होंगे।
• ग्राम वंदन हर गाँव की प्रव्रज्या होगी, ग्राम वंदन के कार्यक्रम होंगे, वहाँ की पूजित मिट्टी से यज्ञशाला का निर्माण किया जायेगा।
• अश्वमेध यज्ञ रजत जयंती शक्तिकलश ग्राम, मुहल्ले, नगरों में जहाँ भी १० से अधिक साधक- याजक तैयार हो रहे हैं वहाँ 'अश्वमेध यज्ञ रजत जयंती शक्तिकलश' की स्थापना की जा रही है। पूरे प्रांत में १० से १५ हजार ऐसे शक्तिकलशों की स्थापना की जा रही है। इनके समक्ष नवरात्र अनुष्ठान, सामूहिक जप, स्वाध्याय, भजन- संकीर्तन के कार्यक्रम होंगे।

ये शक्तिकलश रजत जयंती समारोहों की कलश यात्रा में शामिल होंगे, तत्पश्चात पुन: यथा स्थान स्थापित कर दिये जायेंगे। परम वंदनीया माताजी की जन्म शताब्दी- २०२६ तक जप, यज्ञ, आरती, प्रार्थना, स्वाध्याय, संकीर्तन जैसे सामूहिक कार्यक्रम इनके समक्ष किये जायेंगे।

• देव संस्कृति पुष्टिकरण एवं लोक आराधन कुंभ (गोष्ठियाँ) प्रयाज के अंतर्गत आयोजित की जा रही हैं। इनमें प्रतिष्ठित संत, महंत, समाजसेवी, संगठन- संस्थाओं के प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं। युग निर्माण की दिशा में किये जाने वाले व्यक्तिगत एवं सामूहिक पुरुषार्थ के संकल्प दिलाये जा रहे हैं।
• प्रज्ञापुत्र/प्रज्ञापुंज - जयपुर के यज्ञ में प्रज्ञापुत्र अथवा प्रज्ञापुंज के रूप में अपने दायित्वों का कुशलतापूर्वक निर्वहन करने वाले कार्यकर्त्ताओं को प्रमाण पत्र प्रदान करते हुए सम्मानित किया जायेगा। 
उल्लेखनीय प्रसंग
• रतनगढ़ में स्थानीय विधायक एवं राजस्थान में मंत्री श्री राजकुमार रिणवा उपस्थित रहे। • राजसमंद के जिला कलेक्टर श्री पीसी बेरवाल ने मिशन के नैष्ठिक कार्यकर्त्ता के रूप में संगोष्ठी में भाग लिया। उन्होंने आयोजन की सफलता के संबंध में अपने विचार रखे। उल्लेखनीय है कि वे राजसमंद के कार्यक्रम की आयोजन समिति के सदस्य भी हैं।
 • आदरणीय श्री उपाध्याय जी ने गायत्री शक्तिपीठ पाली के नये ज्ञानरथ का प्रथम पूजन किया।

कार्यक्रम शृंखला
सागवाड़ा (डूंगरपुर) १२ से १५ जून २०१७ की तारीखों में सम्पन्न
पुष्कर (अजमेर) २ से ५ अक्टूबर २०१७
सांचोर (जालौर) २ से ५ अक्टूबर २०१७
 भरतपुर २६ से २९ अक्टूबर २०१७
कोटा २६ से २९ अक्टूबर २०१७
राजसमंद १ से ४ नवम्बर २०१७
रतनगढ़ (चूरू) १ से ४ नवम्बर २०१७
जयपुर २३ से २६ नवम्बर २०१७


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