Published on 2017-09-25
img

आदरणीय डॉ. प्रणव जी ने कार्यकर्त्ता सम्मेलन, कोलकाता में युगस्रजेताओं से इतिहास दोहराने का आह्वान किया

• हमारा भविष्य गुरुसत्ता के हाथों सुरक्षित है
• असमय का असमंजस हमें शोभा नहीं देता
• हमारा आत्मविश्वास बढ़ाते हैं साधना और गुरुदेव के विचार

आदर्शवादी सत्साहस अपनाने वाले हमेशा धाराओं को चीरकर चलते हैं। बंगाल ऐसे ही वीरों की कर्मभूमि है, जिस पर हमें गर्व है। रामकृष्ण परमहंस, श्रीअरविंद हों या रासबिहारी बोस, जगदीशचंद्र बसु, स्वामी विवेकानन्द, टैगोर, इन सबने धाराओं को चीरकर आगे बढ़ने का साहस किया है, भारत का नाम ऊँचा किया है। अंग्रेजों के ज़माने में यह करना आसान नहीं था।

10 सितम्बर को कोलकाता के श्रीराम वाटिका, सलकिया के हॉल में आयोजित विशाल कार्यकर्त्ता सम्मेलन को संबोधित करते हुए अखिल विश्व गायत्री परिवार के प्रमुख प्रतिनिधि आदरणीय डॉ. प्रणव पण्ड्या जी ने इन शब्दों के साथ बंगभूमि को अपनी भावाञ्जलि अर्पित की। वे वहाँ उपस्थित लगभग 1500 प्राणवान कार्यकर्त्ताओं को उनके सौभाग्य और युगदायित्वों की याद दिला रहे थे।

आदरणीय डॉ. साहब ने सुभाषचंद्र बोस, खुदीराम बोस जैसे अनेक शूर एवं संतों की वीरगाथा का उल्लेख किया और जागरूक जनमानस से कहा कि परिवर्तन के इन क्षणों में बंगाल के लोगों को यही नमूना आज फिर से प्रस्तुत करना है।

यह कार्यकर्त्ता सम्मेलन कोलकाता में हो रहे संगठनात्मक बदलावों को लेकर आयोजित किया गया था। इसी क्रम में शांतिकुंज प्रतिनिधि ने युग निर्माण आन्दोलन से जुड़े कार्यकर्त्ताओं के सौभाग्य और दायित्वों की याद दिलाई।

उन्होंने कहा कि भारत का भाग्य और भविष्य भगवान के हाथों लिखा गया है। वह चाहता है कि यह देश फिर से विश्व का मार्गदर्शन करे। जैसे महाभारत जीतने का श्रेय देने के लिए भगवान श्रीकृष्ण ने पाण्डवों को चुना था, उसी प्रकार इस कार्य के लिए महाकाल ने आप सबको चुना है।

आपका भविष्य गुरुदेव के हाथों सुरक्षित है। स्वयं अपने हाथों से उन्होंने आप सबका भाग्य लिखा है। ऐसे में अर्जुन की तरह असमय का मोह हमें शोभा नहीं देता। हमें अपने व्यक्तिगत अहंकार, आकांक्षाओं का त्याग कर संगठित होकर युग निर्माण के कार्यों में जुट जाना चाहिए।

इससे पूर्व शांतिकुंज के वरिष्ठ प्रतिनिधि डॉ. बृजमोहन गौड़ जी ने स्वागत उद्बोधन दिया। उन्होंने बंगाल की धरती को धर्म- संस्कृति और क्रांति की धरती बताया। उन्होंने कहा कि परिवर्तन के इन क्षणों में आप सबको बड़े दायित्वों का निर्वहन करना है। इस अंधकार भरे युग में यदि कहीं ज्ञान की किरण विज्ञान का संदेश लेकर आती दिखाई देती है तो वह गायत्री परिवार से ही दिखाई देती है। लोगों का विश्वास है कि धर्म की रक्षा का, जाति- सम्प्रदाय की दीवारों को तोड़ने का, गंगा को साफ करने का, वृक्ष लगाने का कार्य कोई कर सकता है तो वह गायत्री परिवार ही कर सकता है।

जोन समन्वयक शांतिकुंज प्रतिनिधि श्री कालीचरण शर्मा जी ने भी कार्यक्रम संचालन करते हुए कार्यकर्त्ताओं से नये संगठन और नये आत्मविश्वास के साथ युगक्रांति की दिशा में साहसी कदम बढ़ाने का आह्वान किया।

सफलता के सहयोगी


श्री सच्चिदानन्द पाण्डेय, श्री मौर्या जी, श्री राजेश जी, श्री प्रदीप पण्ड़या, जीपीवायजी हावड़ा के पवन महतो, राजेश काबरा, श्री गोकुल मूँदड़ा, रवि शर्मा एवं उनके कर्मठ साथी, कोलकाता के श्री माँगीलाल मित्तल, श्री भीष्म अग्रवाल, श्री हरीश तोषनीयवाल, श्री बलभद्र झुनझुनवाला, श्री पवन काजरिया, श्री अशोक केडिया, श्री ओम डालमिया, श्री रामावतार अग्रवाल, श्री रमेश तोषनीवाल, श्रीमती अंजना मेहरिया, श्रीमती जया पाण्डेय, श्रीमती उर्मिला तोषनीवाल, श्रीमती मधु अग्रवाल, श्रीमती पुष्पा मित्तल, श्रीमती सविता एवं कविता मित्तल।


Write Your Comments Here:


img

dqsdqsd

sqsqdsqdqs.....

img

sqdqsdqsdqsd.....

img

Op

gaytri shatipith jobat m p.....