Published on 2017-10-02
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धर्मतंत्र को आडंबर, अंधविश्वास, संकीर्णताओं से मुक्ति दिलाकर
समाज- संस्कृति के उत्थान लिए किया गया एक महान धार्मिक अनुष्ठान
  • यह तिरुपुर में हुआ अब तक का सबसे बड़ा कार्यक्रम था।
  • इसमें कर्मठ युवाओं ने राष्ट्र के नवोन्मेष के लिए संगठित होकर कार्य करने के संकल्प लिये।
  • गौरक्षा के संकल्प लिये गये।
  • डॉ. चिन्मय जी ने कच्छ से यज्ञ में भाग लेने आये संतों का उपवस्त्र ओढ़ाकर सम्मान किया।
तिरुपुर। तमिलनाडु

1 से 3 सितम्बर की तारीखों में गायत्री आश्रम, वञ्झीपल्यम् तिरुपुर में युग निर्माणी आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। सघन जनसंपर्क एवं सवा करोड़ गायत्री महामंत्र जप के सशक्त प्रयाज के बाद इन तारीखों में वहाँ ‘राष्ट्र जागरण 108 कुण्डीय गायत्री महायज्ञ एवं 11000 दीपों का महायज्ञ आयोजित हुआ। शांतिकुंज से पहुँचे प्रमुख प्रतिनिधि डॉ. चिन्मय पण्ड्या जी ने परम पूज्य गुरुदेव के विचारों को बड़े प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करते हुए लोगों को धार्मिक आडंबर, अंधविश्वास, संकीर्णताओं से उबारने और संगठित होकर संस्कृति के उत्थान का एक नया अध्याय लिखने की प्रेरणा दी।

कार्यक्रम का शुभारंभ पारंपरिक वाद्ययंत्रों के साथ निकली शानदार शोभायात्रा के साथ हुआ। संभवत: यह यज्ञ से प्रसन्न हुई इंद्र भगवान की अनुकम्पा ही थी कि कलश यात्रा के समय झमाझम बारिश हुई, जिसने सूखे से जूझ रहे तिरुपुर के वातावरण को खुशहाल बना दिया। यह बरसात तिरुपुर एवं बैंगलुरु के कार्यकर्त्ताओं की अग्निपरीक्षा भी थी, जिसमें वे सफल हुए। उन्होंने जी- तोड़ मेहनत कर यज्ञशाला, साहित्य स्टॉल और विशाल प्रदर्शनी को पुन: खड़ा कर दिया।

शांतिकुंज से कार्यक्रम सम्पन्न कराने श्री परमानन्द द्विवेदी, श्री उदय किशोर मिश्रा की टोली पहुँची थी। तिरुपुर, कोयंबटूर, ईराड, बैंगलोर के समर्पित कार्यकर्त्ताओं ने इसके माध्यम से पूरे क्षेत्र में युग चेतना का जबरदस्त विस्तार किया।

2 सितम्बर को तिरुपुर पहुँचे डॉ. चिन्मय जी के महायज्ञ में दो उद्बोधन हुए। दीपयज्ञ के अवसर पर उन्होंने कहा कि हमारा जीवन दीपक की तरह प्रकाशित होना चाहिए। जिसमें दीपक की तरह जलने का साहस है, संकल्पों की बाती है, घृत की तरह जिसका जीवन प्रेम और आत्मीयता से भरा है, वही दूसरों का पथ प्रदर्शन कर सकता है। सही मायनों में उसी का जीवन सफल है। उन्होंने श्रद्धालुओं को सामाजिक कुरीतियों, अवांछनीयताओं, आतंक, अनाचार से लड़ने का आह्वान किया।

पूर्णाहुति से पूर्व डॉ. चिन्मय जी ने यज्ञ के ज्ञान- विज्ञान पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यज्ञ हमें अच्छी भावनाओं के साथ जीना, जीवन में पवित्रता और अपने कार्यों में उत्कृष्टता लाना तथा दूसरों के लिए जीना सिखाता है। इस अवसर पर उन्होंने युवाओं से संस्कृति की रक्षा के लिए संकल्पित होने का आह्वान किया। उन्होंने हजारों लोगों को गायत्री की दीक्षा भी दिलाई।

विशिष्ट सभा, संगोष्ठियाँ, भेंटवार्ताएँ
  • बाबा टेक्सटाइल, तिरुपुर के प्रबंध निदेशक श्री मुरारी तोरी से विशेष भेंट वार्ता हुई।
  • अमूल माचो कम्पनी के प्रबंध निदेशक श्री नवीन सेकसरिया से लगभग घंटे तक आध्यात्मिक चर्चा हुई। तत्पश्चात सैकड़ों कामगारों के बीच मानव जीवन की गरिमा विषय पर उद्बोधन हुआ।
  • जे.जी. होज़ियारी प्रा.लि., तिरुपुर में कार्यक्रम हुआ।
  • कोयंबटूर में गायत्री चेतना केन्द्र में 3 सितम्बर की सायं गोष्ठी हुई। माहेश्वरी समाज के अध्यक्ष श्री गोपाल माहेश्वरी एवं श्री उपेन्द्र सिंह भी इस अवसर पर मंच पर उपस्थित थे। डॉ. चिन्मय जी ने जीवन में गुरु की महत्ता समझायी और परम पूज्य गुरुदेव के महान व्यक्तित्व तथा लोकमंगल की योजनाओं का परिचय दिया।


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