Published on 2017-10-06
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डीजी, आईसीसीआर एवं लाटविया के राजदूत को भी कार्यक्रम की विस्तृत जानकारी एवं आमंत्रण दिया।

२३ अप्रैल २०१८ को देव संस्कृति विश्वविद्यालय में विश्व सम्मेलन आयोजित हो रहा है। भारत के उपराष्ट्रपति माननीय श्री वेंकैया नायडू ने इसकी अध्यक्षता करने की स्वीकृति प्रदान की।

यह विश्व सम्मेलन देसंविवि के बाल्टिक केन्द्र द्वारा भारत एवं बाल्टिक देशों के बीच एक अनूठे सांस्कृतिक संबंधों को लेकर आयोजित किया जा रहा है। लात्विया में 'उसिनडिएना' नामक उत्सव मनाया जाता है। इसके अंतर्गत ऊर्वरता के प्रतीक प्रकाश और वसंत के देवता को श्रद्धांजलि दी जाती है। उन्हें घोड़ों और मधुमक्खियों का अभिभावक माना जाता है।

भारत में भी एक पौराणिक मान्यता है, जिसमें आयुर्वेद के देवता अश्विनी कुमार बंधुओं ने ऋषि दधीच को मधुमक्खी पालन की विद्या सीखने में सहयोग करने के लिए अपने सिर काटकर दे दिये थे और स्वयं उन्होंने घोड़े के सिर लगा लिये थे।

देव संस्कृति विश्वविद्यालय में आयोजित हो रहा यह विश्व सम्मेलन भारत और बाल्टिक देशों के बीच ऐसी ही सांस्कृतिक समानताओं को लेकर आयोजित हो रहा है। भारत और बाल्टिक देशों के अनेक गणमान्य, शिक्षाविद इसमें भाग लेंगे। प्रतिकुलपति डॉ. चिन्मय पण्ड्याजी इसका आमंत्रण लेकर दिल्ली में उपराष्ट्रपति महोदय से मिले। माननीय श्री वैंकया जी ने विश्व पटल पर भारतीय संस्कृति की प्रतिष्ठा बढ़ाकर शांति- सौहार्द्र बढ़ाने के लिए जो प्रयास देव संस्कृति विश्वविद्यालय द्वारा किये जा रहे हैं, उसकी प्रशंसा की और इस सम्मेलन में भाग लेने के लिए अपनी सहमति भी प्रदान की।


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