Published on 2017-10-09
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देव संस्कृति विश्वविद्यालय की पहल

टोंक। राजस्थान
कन्याओं की शिक्षा के लिए ख्याति प्राप्त शिक्षण संस्थान वनस्थली विद्यापीठ (विश्वविद्यालय) में ३१ अगस्त २०१७ को प्रथम ज्ञानदीक्षा समारोह का आयोजन हुआ। समारोह में नवप्रवेशी ३००० छात्राओं, वहाँ के अधिकारी, आचार्य, शिक्षाकर्मियों ने भाग लिया।

यह कार्यक्रम देव संस्कृति विश्वविद्यालय की प्रेरणा से आयोजित हुआ। देसंविवि के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. इन्द्रेश पथिक इसे सम्पन्न कराने पहुँचे। उन्होंने अपने संदेश में ज्ञानदीक्षा की पृष्ठभूमि के साथ विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास में इसकी महत्ता समझायी। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय के प्रवाह में बहती युवा पीढ़ी मात्र पुस्तकें पढ़ने, पास होने और खूब धन कमाने लायक बनने को ही अपना जीवन लक्ष्य मानती है। उन्हें शिक्षण संस्थान में प्रवेश के समय ही यह बोध कराया जाना चाहिए कि विद्यार्जन का उद्देश्य अपने व्यक्तित्व को ज्ञान के साथ संस्कार- सद्गुण सम्पन्न बनाना है।

देव संस्कृति विश्वविद्यालय के कुलाधिपति डॉ. प्रणव पण्ड्या ने भी वनस्थली की इस पहल का स्वागत करते हुए अपना संदेश भेजा था, जिसे सभी को पढ़कर सुनाया गया। कुलपति प्रो. आदित्य ने स्वागत उद्बोधन दिया और दीक्षा संकल्प कराया। उन्होंने इस अवसर पर हर वर्ष ज्ञानदीक्षा समारोह आयोजित करने की घोषणा की। प्रो. सिद्धार्थ शास्त्री, उपाध्यक्ष एवं प्रो. सुधा शास्त्री कोषाध्यक्ष ने मुख्य यजमान के रूप में पूजन का दायित्व निभाया।


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