Published on 2017-10-11
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देसंविवि के उन्नयन- १७ में युवाओं ने दिखाए हूनर

हरिद्वार ११ अक्टूबर।

युवा अपने हर कदम के साथ आगे बढ़े, बढ़ता रहे, प्रगति करता रहे। जीवन में आने वाली कष्ट- कठिनाइयों को पार करते हुए अपनी श्रेष्ठतर प्रतिभा को समाज को अर्पित करे। यह कहना था देवसंस्कृति विश्वविद्यालय के कुलाधिपति डॉ प्रणव पण्ड्याजी का। वे देवसंस्कृति विवि के उन्नयन- १७ के कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि युवाओं का मन वायु के समान चंचल है जो कहीं ठहरता नहीं। उसमें नये दृश्य, नयी उमंग, नयी कल्पनाएं सदा उभरती रहती हैं। उन्न्यन के माध्यम से उसे सही दिशा देने का काम किया जाता है। देसंविवि ऐसे युवा गढ़ने का कार्य कर रहा है जो देश की प्रगति में सहायक बन सकें। देसंविवि के कुलपिता पं० श्रीराम शर्मा आचार्य जी ने अपनी युवावस्था में कई प्रतिकूलताओं का सामना करते हुए कई नये आयाम खोले। उनके तप- मेहनत का ही परिणाम है कि गायत्री परिवार आज वटवृक्ष की भांति फैलता दिखाई दे रहा है। इसके अलावा उन्होंने स्वच्छता के संबंध में भी मार्गदर्शन दिया।

उन्नयन देसंविवि द्वारा शुरु की गई एक नई पहल है जो पुराने छात्रों द्वारा नवांगतुक छात्रों के स्वागत के उपलक्ष्य में आयोजित होता है। आज विश्वविद्यालयों में रैंगिग एक समस्या के रूप में उभरा है, वहीं देसंविवि की यह पहल अपने आप अनूठी है। देवसंस्कृति विश्वविद्यालय में सीनियर छात्र- छात्राओं द्वारा अपने विश्वविद्यालय के नवप्रवेशी छात्रों के स्वागत में एक विशेष कार्यक्रम 'उन्नयन' आयोजित होता है। उन्नयन २०१७ में सीनियर विद्यार्थियों ने प्यार और सहकार के साथ नये छात्रों को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के छात्र छात्राओं ने कई सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। इस अवसर पर देसंविवि के कुलपति श्री शरद पारधी, प्रतिकुलपति डॉ चिन्मय पण्ड्याजी, कुलसचिव श्री संदीप कुमार सहित विवि के समस्त अधिकारी एवं छात्र- छात्राएँ मौजूद रहे।


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