Published on 2017-10-12
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युवा क्रान्ति सम्मेलन (मध्य जोन)

जबलपुर। मध्य प्रदेश
युवा क्रांति वर्ष २०१६- १७ की समापन वेला में मध्य जोन के युवा अपने संगठन एवं संकल्पों को बल देकर नवसृजन अभियान को गति देने के लिए एक बार फिर जबलपुर में एकत्रित हुए। अवसर था संस्कारधानी जबलपुर में १५ से १७ सितम्बर २०१७ की तारीखों में आयोजित तीन दिवसीय युवा क्रांति सम्मेलन (मध्य जोन) का। सभी ५१ जिलों के ३००० से अधिक युवाओं ने इसमें भाग लिया। मध्य प्रदेश के युवाओं का मार्गदर्शन करने शांतिकुंज से डॉ. चिन्मय पण्ड्याजी, श्री कालीचरण शर्मा, श्री के.पी. दुबे, श्री विष्णु पण्ड्या, श्री जे.एस. पाराशर, श्री सुखदेव अनघोरे सहित शांतिकुंज की एक विशाल टोली पहुँची थी।

यह सम्मेलन मदन महल दद्दा परिसर में आयोजित हुआ। 'हम बदलेंगे, युग बदलेगा' जैसे उत्साहभरे जयघोषों के बीच श्री कालीचरण शर्मा, श्री के.पी. दुबे, श्री विष्णु पण्ड्या आदि ने दीप प्रज्वलन के साथ इसका शुभारंभ किया। तीन दिनों शांतिकुंज के वरिष्ठ वक्ताओं के उद्बोधन और समूह चर्चाओं का क्रम रहा। गहन मंथन के बाद भावी सक्रियता के निष्कर्ष उभरे। कार्यकर्त्ताओं में २६ से २८ जनवरी २०१८ की तारीखों में नागपुर में आयोजित हो रहे युवा चेतना सृजन संकल्प समारोह में उल्लेखनीय उपलब्धियों के साथ भागीदारी का उत्साह उभरा।

'वॉइस आॅफ प्रज्ञा' एक विशिष्ट आकर्षण
"युवाओं को पाश्चात्य सभ्यता के दुष्प्रभावों से बचाने के लिए की गयी यह एक अनूठी पहल है।" श्री गोविंद श्रीवास्तव, वॉइस आॅफ प्रज्ञा के संयोजक
"युवा जीवन में बढ़ रहे अवसाद के कारणों के निवारण का संगीत एक सहज माध्यम है।" श्री कालीचरण शर्मा, शांतिकुंज प्रतिनिधि

जबलपुर शाखा द्वारा युगगायन के क्षेत्र में नवोदित प्रतिभाओं को तलाशने- तराशने के लिए पिछले कुछ वर्षों से प्रज्ञागीत और भजनों पर आधारित गायन प्रतियोगिता 'वॉइस आॅफ प्रज्ञा' का आयोजन किया जा रहा है। अभियान संयोजक श्री गोविंद श्रीवास्तव के अनुसार इसने न केवल उदीयमान किशोर एवं युवाओं को मंच प्रदान किया है, उनमें नया आत्मविश्वास जगाया है, बल्कि सद्गुणी- संस्कारवान जीवन जीने की प्रेरणा भी प्रदान की है। अब तक के तीन वर्षों में ऐसी अनेक प्रतिभाएँ उभरीं, जिन्हें विभिन्न सामाजिक कार्यक्रमों में अपनी प्रतिभा के प्रदर्शन का अवसर मिला।

तीन चरणों में आयोजित होने वाली इस प्रतियोगिता का इस वर्ष का 'ग्रांड फिनाले' प्रस्तुत युवा क्रांति सम्मेलन में हुआ। शांतिकुंज प्रतिनिधियों के साथ मंत्री श्री शरद जैन, महापौर डॉ. स्वाती गोडबोल आदि अनेक गणमान्य और अभियान को गति दे रहे नैष्ठिक कार्यकर्त्ता इस अवसर पर उपस्थित थे।

प्रतियोगिता चार वर्गों में आयोजित हुई। सभी वर्गोँ के प्रथम तीन विजेताओं को वैजयंती के अलावा लैपटॉप जैसे बहुमूल्य पुरस्कार प्रदान कर सम्मानित किया गया।

बाहर आग न लगाओ, अंदर की ज्योति जला लो-• डॉ. चिन्मय पण्ड्याजी, प्रतिकुलपति देसंविविक्रान्ति का तात्पर्य नारेबाजी और तोड़फोड़ नहीं है। गुरुदेव पं. श्रीराम शर्मा आचार्य जी ने बाहर आग लगाने की बजाय अंदर की ज्योति जलाने की शिक्षा दी है। केवल अधिकारों का नहीं, कर्त्तव्यों को समझने और पूरा करने का पाठ पढ़ाया है।

युवाशक्ति का सही उपयोग केवल आध्यात्मिक दृष्टि के साथ ही हो सकता है। युवा वय नहीं, एक महान संकल्प शक्ति है। इसकी सार्थकता मात्र अपना घर बनाने से नहीं हो सकती। उसमें समाज के उत्थान का संकल्प और राष्ट्र- संस्कृति के प्रति प्रेमभावना हो तो वह अपना ही नहीं, न जाने कितने लोगों का कल्याण कर सकता है।

यौवन की सार्थकता के लिए मन में संकल्प,विचारों में सकारात्मकता, हृदय में उदारता- सेवाभावना का समावेश करने की साधना करनी चाहिए। स्वामी विवेकानन्द से प्रेरणा लेकर अगले कुछ वर्षों के लिए जाति, धर्म, सम्प्रदाय, प्रांत, पक्ष जैसे सभी भेदभाव भूलकर भारतमाता की सेवा में जुट जाना चाहिए।

बुजुर्ग और युवाओं के बीच समन्वय बढ़े
• श्री कालीचरण शर्मा, जोन समन्वयक शांतिकुंज
प्रतिनिधि ने युवाशक्ति के संगठन और सक्रियता के साथ बुज़ुर्ग एवं युवाओं के बीच तालमेल बढ़ाने पर विशेष बल दिया। उन्होंने इस तालमेल के अभाव को समाज की एक प्रमुख समस्या बताते हुए कहा कि युवा बुज़ुर्गों के अनुभव का लाभ लें और बुज़ुर्ग युवाओं की शक्ति का उपयोग करें तो पारिवारिक जीवन में सुख- समृद्धि आयेगी।

हम समाज का आदर्श बनें
• श्री विष्णु पण्ड्या, मध्य जोन प्रभारी शांतिकुंज प्रतिनिधि ने उपस्थित प्रदेश के वरिष्ठ युवाओं से समाज के समक्ष अपना जीवन आदर्श प्रस्तुत करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि इसके लिए उन्हें बड़ी समझदारी, ईमानदारी, जिम्मेदारी और बहादुरी के साथ सरल, उदार, सृजनशील, सहनशील बनाना होगा।

भटकावों से बचाओ, सृजनशील बनाओ
• श्री के.पी. दुबे- युवा प्रकोष्ठ प्रभारी
देश की बढ़ती आबादी हमारे लिए अभिशाप है, लेकिन युवा देश होना हमारी शक्ति है, जिसके बल पर यह देश विश्व का सिरमौर बनने जा रहा है। किन्तु भटकती युवापीढ़ी बेहतर समाज का निर्माण नहीं कर सकती। राष्ट्र का सही विकास मात्र संसाधनों से नहीं हो सकता। इसके लिए हमें सद्गुणी- सृजनशील युवा चाहिए। यह कार्य उन्हें व्यसन- कुरीतियों से बचाकर और सृजन में लगाकर ही संभव है।

प्रांतीय संगठन से जुड़े वरिष्ठ कार्यकर्त्ताओं का योगदन
प्रांतीय संगठन के वरिष्ठ प्रतिनिधि सर्वश्री महाकाल श्रीवास्तव, नारायण प्रसाद तिवारी, रमेश प्रसाद सोनी, सीताराम त्रिपाठी, प्रमोद राय, सुरेन्द्र पाल, देवेन्द्र श्रीवास्तव आदि ने प्रतिभागियों का मार्गदर्शन और समन्वय किया। उत्साहवर्धक संकल्प उभरे। प्रदेश को प्रगति की राह पर अग्रसर करने का अथाह उत्साह सभी में दिखाई देता था।


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Sneh Milan Dipavli (samarambh)

Yug Shakti Gaytri, Akhand juotu,pragya abhiyan vachak avm Gyangadh dharak, avm parijano ka sneh Milan samrambh 6:00 pm to 8:00 pm on Shaktipith Godhra, Panchmahal.....

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