Published on 2017-10-24
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वनवासी बहुल सरगुजा उपजोन में आयोजित युवा क्रांति सम्मेलन में डॉ. चिन्मय पण्ड्या जी का संदेश

आज इंसान ने रहन- सहन, सुविधा- साधन, धन- सम्पत्ति की दृष्टि से अथाह प्रगति की है, लेकिन समाज में तनाव, असंतोष, अशांति, मारकाट भी अंधाधुंध बढ़ रहे हैं, जिसका कारण है समाज में आध्यात्मिक जीवन के प्रति बढ़ती अनास्था। आध्यात्मिकता आत्मविश्वास जगाती है, बैर एवं संग्रह नहीं, प्रेम और सेवा करना सिखाती है। जहाँ अध्यात्म है वहाँ सुख है, शांति है, सच्ची प्रगति है। भटकती युवा पीढ़ी का भावनात्मक नवनिर्माण कर उसे समाज एवं राष्ट्र निर्माण के नैतिक दायित्वों में प्रवृत्त कराना आज का सबसे बड़ा युगधर्म है।

१९ सितम्बर को उपरोक्त विचार डॉ. चिन्मय पण्डयाजी, प्रतिकुलपति देव संस्कृति विश्वविद्यालय ने राजमोहनी भवन अंबिकापुर में हजारों परिजनों एवं नगर के गणमान्य नागरिकों के समक्ष व्यक्त किये। वे वनवासी बहुल उपजोन सरगुजा के युवा क्रांति सम्मेलन एवं दीपयज्ञ को संबोधित कर रह थे। इस सम्मेलन को दक्षिण पूर्व जोन प्रभारी शांतिकुंज प्रतिनिधि श्री गंगाधर चौधरी जी, छ.ग. जोन प्रभारी श्री दिलीप पाणिग्रही जी एवं प्रांतीय युवा प्रकोष्ठ संयोजक श्री ओमप्रकाश राठौर ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम संचालन श्रीमती लक्ष्मी सिंह एवं श्री प्रदीप शर्मा ने किया।

महाकाल की प्राण प्रतिष्ठा

अपने एक दिवसीय प्रवास पर अंबिकापुर पहुंचे डॉ. चिन्मय पण्ड्या जी ने सबसे पहले गायत्री शक्तिपीठ प्रांगण में नवनिर्मित महाकाल के भव्य एवं दिव्य विग्रह में 'प्राण- संचार' किया। इस अवसर पर प्रांगण में उपस्थित सैकड़ों परिजनों को संबोधित करते हुयं वर्तमान समय की विभीषिका के निवारण में महाकाल के स्वरूप को पहचान एवं तदनुरूप 'युग निर्माण योजना' के कार्यों में जुट जाने का आह्वान किया। इसके पूर्व छ. ग. जोन के संरक्षक सदस्य एवं मुख्य प्रबंध टस्टी श्रीमती शशी सिंह ने डॉ. चिन्मय जी का भाव भरे शब्दों में अभिनंदन किया।

• आज देश में संगठनों की कमी नहीं है, लेकिन गुरुदेव द्वारा बनाया गया गायत्री परिवार उन सबसे अलग है। जहाँ आत्मीयता, प्यार, संवेदना, सबके भले की चाह है वहीं गायत्री परिवार है। परम पूज्य गुरुदेव ने हमें किसी दिव्य योजना की पूर्ति के लिए इस परिवार से जोड़ा है।
• गायत्री परिवार का सदस्य वही है जो च्सादा जीवन, उच्च विचारज् के सिद्धांत को अपनाता है। कबीर, रैदास, तुकाराम धन से अमीर नहीं थे, किन्तु विचारों से पवित्र और धनी थे। दुनियाँ करोड़पतियों, अरबपतियों को भूल जाती है लेकिन उनके जैसे महापुरुषों को इतिहास कभी भुला नहीं सकेगा।
• डॉ. चिन्मय पण्ड्याजी

अन्य कार्यक्रम
आकाशवाणी केन्द्र में वार्ता

आकाशवाणी केन्द्र अंबिकापुर में एक वार्ता हुई। डॉ. चिन्मय जी ने पूछे गये प्रश्नों के उत्तर में कहा कि भारत का गौरव भारतीय संस्कृति की उदात्त परम्पराओं के कारण ही है। संस्कार से ही व्यक्ति को मनुष्यता प्राप्त होती है। अत: आज की युवा पीढ़ी को संस्कारों के साँचे में ढालने की आवश्यकता है। देश- विदेश में गायत्री परिवार के करोड़ों परिजन पूरी निष्ठा और प्राथमिकता के साथ इसी दिशा में प्रयास कर रहे हैं।

पत्रकार वार्ता
नगर के इलैक्ट्रॉनिक एवं प्रिण्ट मीडिया के प्रमुख पत्रकारों के साथ वार्ता हुई। डॉ. चिन्मय जी ने नशा निवारण, ग्राम्य विकास, स्वावलम्बन एवं गीता पर पूछे गये प्रश्नों का उत्तर देते हुए गायत्री परिवार की विभिन्न योजनाओं से अवगत कराया।

कार्यकर्त्ताओं से मुलाकात

सर्किट हाउस में डॉ. चिन्मय पण्डया जी ने पांचों जिलों से आये सक्रिय कार्यकर्ताओं के समूहों से ज़िलेवार मुलाकात की, संगठन को मज़बूत करने व रचनात्मक आंदोलन में गति लाने के बहुमूल्य सूत्र दिये।

नगर के गणमान्यों से मुलाकात
डॉ. चिन्मय जी के विचारों ने नगर के गणमान्यों को बहुत प्रभावित किया। अनेक लोगों ने डॉ. चिन्मय जी से व्यक्तिगत मुलाकात भी की। डॉ. अजय तिर्की, नगर निगम महापौर अंबिकापुर, श्री शैलेष सिंह जनपद उपाध्यक्ष सीतापुर, श्री अनुराग पाण्डेय मुख्य कार्यपालक अधिकारी जिला पंचायत सरगुजा, श्री आर. एन. पाण्डेय डिप्टी कलेक्टर, श्री अनिल सिंह मेहर अध्यक्ष छ.ग. हस्तशिल्प कला, श्री एम. आर. एन. नाहर कार्यपालक निर्देशक, श्री एस. पी. कुमार कार्यपालक यंत्री, कई महाविद्यालयों के प्राचार्य, प्रतिष्ठित पत्रकार, नगर के उद्योगपति, विभिन्न धार्मिक- सामाजिक संस्थाओं के प्रमुख आदि उनसे मिले, मार्गदर्शन लिया।


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