Published on 2017-10-26

चलाला, अमरेली। गुजरात

भौतिकवादी सोच साधनों में सुख ढूँढ़ती है, समाज की परवाह न कर अपने एवं अपनों तक ही सीमित रहने और खूब धन कमाने के लिए प्रेरित करती है। लेकिन साधनों का सुख स्थायी कहाँ होता है! वह व्यक्ति को उन्माद और अवसाद की ओर ले जाता है। जीवन के प्रति सच्चा नज़रिया तो आध्यात्मिकता है। आध्यात्मिकता से जीवन में आनंद का उदय होता है। आध्यात्मिकता जीवन का सबसे बड़ा शृंगार है। आध्यात्मिक दृष्टि से ही यौवन खिलता है।

आदरणीय डॉ. प्रणव पण्ड्या जी ने यह महत्त्वपूर्ण विचार चलाला में 6 एवं 7 अक्टूबर की तारीखों में आयोजित गुजरात प्रांतीय सम्मेलन में कहे। वे सम्मेलन में भाग ले रहे पूरे प्रदेश के लगभग 1000 प्रमुख कार्यकर्त्ताओं को नवयुग की संरचना के सूत्र बता रहे थे।

दो दिवसीय सम्मेलन में आदरणीय डॉ. साहब ने तीन उद्बोधन दिये। उन्होंने सम्मेलन में भावी सक्रियता का दृष्टिकोण समझाने चलाला पहुँचे शांतिकुंज के वरिष्ठ प्रतिनिधि श्री कालीचरण शर्मा जोन समन्वयक, श्री केदार प्रसाद दुबे युवा प्रकोष्ठ प्रभारी, श्री दिनेश पटेल पश्चिम जोन प्रभारी एवं सुश्री दीनाबेन के साथ मिलकर प्रांत के प्रमुख कार्यकर्त्ताओं से समूह में चचार्ए कीं। सक्रियता के अनेक बिंदुओं पर चर्चा हुई, संकल्प उभरे।

१० अन्य युवाओं को जोड़ो
आदरणीय डॉ. साहब ने अपने उद्बोधन में देश की युवाशक्ति को आध्यात्मिकता की सार्थक दृष्टि देने को युग निर्माण की दिशा में किया जाने वाला सबसे प्रमुख अभियान बताया। उन्होंने कहा कि अपने संगठन के प्रत्येक युवा को कम से कम १० नये युवाओं को आध्यात्मिक दृष्टि देने और उनकी सामर्थ्य को परमार्थपरायण गतिविधियों में लगाने का प्रयास करना चाहिए।

आदरणीय डॉ. साहब की प्रेरणाएँ

देश की मिट्टी से जुड़कर काम करो
गायत्री परिवार एक विचारधारा है, कोई पंथ या संप्रदाय नहीं। हममें विवेकानन्द, भगीरथ, नचिकेता, भगतसिंह, गाँधी, लक्ष्मीबाई, मीराबाई की तरह प्रतिकूलताओं से जूझने और नवसृजन के लिए समर्पित होने का साहस और उत्साह होना चाहिए। युवा देश की मिट्टी से जुड़कर काम करेंगे तो यह देश फिर से सोने की चिड़िया बन जायेगा।

नारी उत्कर्ष के कार्य को ईश्वर की नौकरी मानें
गुजरात में अनेक नये काम किये जा रहे हैं। कोडीनार में कन्या होस्टल देखा। लाठी के पास होस्टेल के लिए ७५००० लड़कियों की शिक्षा के लिए कार्य किया जा रहा है। हमें नारीशक्ति को सँभालना है। इस कार्य को हमें ईश्वर की नौकरी मानकर संवेदनाओं के साथ करना होगा।

जमाने को बदलने का संकल्प लो
जवानी ने ही सदा जमाना बदला है। देश के नवनिर्माण का कार्य भी आज के युवाओं को ही करना होगा। जैसे स्वतंत्रता सेनानियों ने रावी की माटी हाथ में लेकर देश को आज़ाद करने की शपथ ली थी, उसी तरह हमें जमाने को बदलने का संकल्प लेना है।

आत्मशक्ति जगाना युवाशक्ति के सुनियोजन का सर्वोत्तम उपाय
आत्मशक्ति की बुनियाद पर ही किसी कार्य की सफलता निर्भर होती है। ईश्वर की सामर्थ्य और गुरुदेव के संरक्षण- अनुदानों पर पूरी तरह से भरोसा रखो, अपनी पूरी शक्ति को गुरुकार्यों में लगा दो, सफलता अवश्य मिलेगी।

संस्कृति- दूत बनकर चुनौतियों का समाधान करें
भारत के युवाओं ने अपनी प्रतिभा की चमक सारे विश्व में बिखेरी है। हमें अपने देश के युवाओं को इस प्रकार गढ़ना है कि वे संस्कृति- दूत बनकर राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय चुनौतियों का समाधान प्रस्तुत कर सकें।


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