Published on 2017-11-09
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युवा भीतर से मजबूत बनें, प्रलोभनों से उबरें, समाज का नवनिर्माण करें

यौवन माँ भगवती का वरदान है, यह बहती हवा के समान है। जिसमें कुछ कर गुजरने का साहस और आदर्शों की बलिवेदी पर चढ़ जाने की हिम्मत हो, वही युवा है।

भारत पूरे विश्व का मार्गदर्शन कर सकता है। यह कार्य युवा पीढ़ी ही कर सकती है। इसके लिए उन्हें भीतर से मजबूत बनना होगा और फिर तमाम भ्रम, प्रलोभनों से उबरकर अपने परिवार और समाज के नवनिर्माण में जुट जाना होगा। महाराणा प्रताप, चंद्रशेखर आजाद, भगत सिंह, विवेकानंद जैसे देशभक्तों को अपना रोल मॉडल बनायें और उन्हें अपने जीवन में उतारें, यही आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है।

आदरणीय डॉ. प्रणव पण्ड्या जी ने १२ अक्टूबर की सायं 'वर्तमान संदर्भ में युवाओं की भूमिका' विषय से संबोधित करते हुए केन्द्रीय विश्वविद्यायल जम्मू में उपस्थित शिक्षाविद एवं गणमान्यों को यह संदेश दिया। इस अवसर पर सुश्री इंदु एमा, पूर्व निदेशक आईएमपीए, डॉ. डी.एल. चौहान निदेशक योग केन्द्रीय विवि. जम्मू, प्रो. लोकेश वर्मा डीन केन्द्रीय विवि जम्मू, श्री एस.के. जैन, शांतिकुुज प्रतिनिधि प्रो. प्रमोद भटनागर मंचासीन थे।


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