Published on 2017-11-10

देव संस्कृति पुष्टिकरण लोक आराधन महायज्ञ, पुष्कर
संत, महंत, तीर्थ पुरोहित, शासन सब संगठित होकर कर रहे हैं प्रयास

पुष्कर, अजमेर। राजस्थान
तीर्थराज पुष्कर में २ से ५ अक्टूबर २०१७ की तारीखों में 'देव संस्कृति पुष्टिकरण महायज्ञ' सम्पन्न हुआ। इस महायज्ञ ने पुष्करतीर्थ के आदर्श विकास के लिए गायत्री परिवार द्वारा किये जा रहे प्रयासों को बल दिया है। आयोजकों का कहना है कि इस महायज्ञ में तीर्थ नगरी के निवासियों, संतों, महन्तों, तीर्थ पुरोहितों का कल्पना से कहीं अधिक सहयोग- सद्भाव मिला। यह अदृश्य जगत की सूक्ष्म चेतना और क्षेत्रीय संगठन द्वारा किये जा रहे नैष्ठिक प्रयासों के संयोग का परिणाम ही प्रतीत होता है।

३००० गाँवों का मंथन
देव संस्कृति पुष्टिकरण महायज्ञ के प्रयाज क्रम में पुष्करतीर्थ के साथ पूरे उपजोन में आध्यात्मिक चेतना के विस्तार के लिए बृहद् स्तर पर मंथन किया। पिछले ६ माह में नागौर, अजमेर, उत्तर पाली एवं पूर्व जोधपुर जिलों में प्रव्रज्या की गयी। इसके अंतर्गत
  •  ३००० ग्रामतीर्थों का पूजन कर जल- रज एकत्रित किया गया।
  •  पुष्कर अरण्य क्षेत्र के १०८ नये गाँवों में प्रयाज कर याजक- साधक बनाये गये।
पुष्कर तीर्थ क्षेत्र के विकास की योजनाएँ
शांतिकुंज के मनीषी आदरणीय श्री वीरेश्वर उपाध्याय जी की गरिमामयी उपस्थिति में यह देव संस्कृति पुष्टिकरण गायत्री महायज्ञ सम्पन्न हुआ। उनकी अध्यक्षता में दो महत्त्वपूर्ण गोष्ठियाँ आयोजित हुर्इं। ३ अक्टूबर की गोष्ठी में संत, महन्त, तीर्थ पुरोहित, धर्म प्रचारक, योगाचार्य, गौशाला संचालक, वेद विद्या प्रसारक एवं ज्योतिषाचार्य शामिल हुए, जबकि ४ अक्टूबर की गोष्ठी में समाजसेवी संगठन, पर्यावरणविद्, शिक्षाविद् तथा समाज सुधार के अभियान चलाने वाले स्वयंसेवी संगठनों के सूत्र पुरुषों ने भाग लिया। इन गोष्ठियों में तीर्थक्षेत्र के विस्तार की योजनाएँ तैयार की गयीं, सबने मिलकर उन पर कार्य करने का निर्णय लिया। निम्न करणीय बिंदुओं पर सहमति बनी।

  • पुष्कर अरण्य तीर्थ प्रदक्षिणा पथ (सात, चौबीस एवं चौरासी कोसीय) को सुगम, सुरम एवं मूलभूत सुविधा सम्पन्न बनाना।
  • तीर्थ महात्म्य उजागर करना और लुप्त तीर्थों को पुनर्जाग्रत् करना।
  • सावित्री पहाड़ी परिक्रमा मार्ग को कामदगिरी, चित्रकूट की तरह विकसित करना।
  • सभी तीर्थ हरीतिमा सम्पन्न, स्वच्छ हों, प्लास्टिक और गंदगी से मुक्त हों।
  •  तीर्थाटन सैकड़ों गुना बढ़े, तीर्थ की पवित्रता, आध्यात्मिक मर्यादा बनी रहे, केवल पर्यटन और मौजमस्ती का स्थान न बने।
  • सरोवर की शुद्धि के लिए अस्थि विसर्जन हेतु अलग कुण्ड बनें।
  • पूरा क्षेत्र नशा, व्यसनमुक्त बने।
  • शासकीय प्रतिनिधियों का ध्यान उनके द्वारा किये जाने वाले कार्यों की ओर दिलाया गया।
महायज्ञ में शामिल होने वाली विशिष्ट विभूतियाँ
वासुदेव देवनानी, शिक्षा राज्य मंत्री राजस्थान सरकार, ओंकार सिंह लखावत, अध्यक्ष, राजस्थान धरोहर संरक्षण एवं प्रौन्नति प्राधिकरण, एस.एस. शर्मा, सभापति, राजस्थान देवस्थान बोर्ड, धर्मेन्द्र गहलोत मेयर नगर निगम अजमेर, सांखला जी उप मेयर, नगर निगम अजमेर, कमलजी पाठक अध्यक्ष, मुकेश कुमावत उपाध्यक्ष, पार्षद गणनगर पालिका पुष्कर, पूर्व मंत्री नसीम अख्तर बानो, गोपाल बायती पूर्व विधायक, शिवशंकर हेड़ा, अध्यक्ष, अजमेर विकास प्राधिकरण, उपखण्ड अधिकारी पुष्कर, दीपक नन्दी आई.ए.एस., सतीश कौशिक मेम्बर रेवेन्यू बोर्ड आदि। महायज्ञ सम्पन्न कराने शांतिकुंज से डॉ. इंद्रेश पथिक की टोली पहुँची थी।

सम्मान : इन गोष्ठियों में सामाजिक विकास में विशिष्ट योगदान देने वाली ५० विभूतियों का शांतिकुुंज की ओर से सम्मान किया गया।
विशिष्ट उपलब्धियाँ : इस महायज्ञ के माध्यम से ३००० से अधिक नये लोग मिशन से जुड़े। ५०० लोगों ने दीक्षा ली।


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