Published on 2017-11-09
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  • 50 गाँवों का किया गया है चयन
  • शनिवार को घर-घर संपर्क और रविवार को होती है कार्यशाला
  • हर गाँव में स्वाध्याय मण्डल एवं बाल संस्कार शालाएँ
भीलवाड़ा। राजस्थान
दिया, भीलवाड़ा ने बच्चों के व्यक्तित्व विकास के लिए अभिनव प्रयोग आरंभ किया है। इसके अंतर्गत दिया के सदस्य गाँवों में सघन जनसंपर्क अभियान चलाकर वहाँ के कक्षा 6 से कॉलेज में पढ़ने वालों को एक स्थान पर एकत्रित करते हैं और फिर उनकी 2 घंटे की व्यक्तित्व परिष्कार कार्यशाला आयोजित करते हैं।

श्री महितोष ओझा के अनुसार प्रथम चरण में जिले के 50 गाँवों का चयन कर यह कार्ययोजना लागू की जा रही है। रविवार को कार्यशाला आयोजित होती है और उसके पूर्व शनिवार के दिन दिया, भीलवाड़ा के सदस्य पूरे गाँव में घर-घर जाकर जनसंपर्क करते हैं। वे बच्चों को व्यक्तित्व परिष्कार की आवश्यकता समझाते हैं और बहुमूल्य सूत्र जानने के लिए रविवार की सायं आयोजित की जाने वाली दो घंटे की कार्यशाला में आमंत्रित करते हैं।

विद्यालयों में : शनिवार को ही कुछ सदस्य विद्यालयों में संपर्क कर वहाँ भी छोटी-छोटी कार्यशालाएँ आयोजित करते हैं, गाँव की कार्यशाला में भाग लेने के लिए विद्यार्थियों को प्रेरित करते हैं।

दिया, भीलवाड़ा के यह प्रयास बहुत ही सफल और उत्साहवर्धक हैं। हर गाँव में सैकड़ों बच्चे मिशन से जुड़ रहे हैं। स्कूलों, गाँव की चौपालों पर कार्यशालाएँ आयोजित हो रही हैं। राजकुमार तिवारी, मधु गुप्ता, बालेश शर्मा, अनिल आगाल, शिवराज मेघवंशी, इं.लादू सिंह, डॉ. राधेश्याम श्रोत्रिय, सत्यनारायण वैष्णव, विकास सारस्वत, राजेन्द्र सिंह जमनालाल सुथार, प्रहलाद चोटिया, जगदीश शर्मा, मनोज गुप्ता, राकेश समदानी, रामपाल जागेटिया आदि इस अभियान को गति देने में पूरी निष्ठा के साथ लगे हुए हैं।

कार्यशाला का स्वरूप :
रविवार को सायं 6 से 8 बजे तक व्यक्तित्व परिष्कार कार्यशाला आयोजित होती है। इसमें बच्चों की वर्तमान समस्याओं की समीक्षा करते हुए सही जीवन लक्ष्य और उसकी प्राप्ति के उपाय बताये जाते हैं। आत्मशक्तियों के जागरण, एकाग्रतावृद्धि, स्वास्थ्य संवर्धन की सरल साधनाएँ बतायी जाती हैं। उन्हें उज्ज्वल भविष्य और नया भारत बनाने के लिए प्रेरित किया जाता है।

सतत सक्रियता के उपाय :
• कार्यशाला के अंत में उत्साही बच्चों का एक स्वाध्याय मण्डल बनाकर उन्हें आवश्यक साहित्य दिया जाता है।
•  कुछ बच्चों को बाल संस्कार शाला चलाने के लिए प्रेरित किया जाता है और उसे चलाने के लिए आवश्यक प्रशिक्षण व साहित्य नि:शुल्क दिया जाता है।
• गाँव में यज्ञ एवं दीपयज्ञ के कार्यक्रम भी होते हैं, जिनमें बच्चों के साथ ग्रामवासियों को भी भाग लेने के लिए आमंत्रित किया जाता है। उन्हें संगठित कर साधना, सेवा, स्वच्छता, स्वास्थ्य, पर्यावरण जैसे आन्दोलनों को गति देने के प्रयास किये जाते हैं।


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