Published on 2017-11-11
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मानवाधिकार जागरूकता कार्यशाला

२३ अक्टूबर को देव संस्कृति विश्वविद्यालय में देसंविवि और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के संयुक्त तत्वाध्यान में सर्वोच्च न्यायालय के अधिवक्ता श्री अपूर्व दीवान की मुख्य उपस्थिति में 'मानवाधिकार जागरूकता' पर एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित हुई।

देसंविवि के कुलाधिपति डॉ़ प्रणव पण्ड्या जी ने इसकी अध्यक्षता करते हुए कहा कि अपने उत्तरदायित्वों के प्रति जागरूक होना वस्तुत: एक नैतिक गुण है, जो आध्यात्मिक मानसिकता के साथ विकसित होता है। जहाँ अपनेपन का भाव है, आंतरिक शुचिता है, वहीं दूसरों की भलाई की चाह दिखाई देती है। यह भाव आध्यात्मिक आस्थाओं के आधार पर विकसित होता है। कुलाधिपति जी ने इस कार्यशाला के आयोजन पर अपनी प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसी कार्यशालाएँ हर विद्यालय, महाविद्यालय, विश्वविद्यालयों में आयोजित की जानी चाहिए।

प्रतिकुलपति डॉ. चिन्मय जी ने समाज में हो रहे शुभ- अशुभ बदलावों की चर्चा की। उन्होंने सूचना क्रांति से समाज में आ रहे सकारात्मक बदलाव पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि हममें से प्रत्येक को प्रतिदिन यह सोचना चाहिए कि हम अपने समाज को क्या दे पा रहे हैं?

मानवाधिकार आयोग की ओर से श्री अपूर्व दीवान ने मानवाधिकार की स्थापना, उसके उद्देश्य एवं कई अन्य मामलों को सटीक उदाहरणों के साथ स्पष्ट किया। दक्षा शर्मा ने मानवाधिकार एवं महिला व बाल अधिकार के तात्कालिक एवं वर्तमान मुद्दों पर चर्चा की, समाधान बताये।

अंतिम सत्र में श्री विनय कक्कड़ ने मानव अधिकारों की विस्तृत व्याख्या करते हुए मानवीय रिश्तों से जुड़े कर्त्तव्यों की चर्चा की। देसंविवि के विज्ञान संकाय के डॉ. अभय सक्सेना ने 'बीईंग ह्यूमन से ह्यूमन बीईंग' (मनुष्य होने के नाते मनुष्यता अपनाने) की ओर बढ़ने की प्रेरणा दी।

एक दिवसीय कार्यशाला का समापन डॉ. अरुणेश पाराशर द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। डॉ. गोपाल कृष्ण शर्मा ने इसका संचालन किया। देसंविवि के कुलसचिव श्री सन्दीप कुमार सहित सभी शिक्षकगण एवं विद्यार्थियों ने इस कार्यशाला में भाग लिया।


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