गायत्री विद्यापीठ के वार्षिकोत्सव में बच्चों ने दिखाया हुनर

Published on 2017-11-14

संस्कारवान हों हमारे बच्चे : डॉ. पण्ड्याजी
लघुनाटिका के माध्यम से पर्यावरण व कन्या भ्रुण बचाने के लिये किया आवाहन

हरिद्वार, १४ नवम्बर।
गायत्री विद्यापीठ के अभिभावक श्रद्धेय डॉ. प्रणव पण्ड्याजी ने कहा कि बच्चे गीली मिट्टी की तरह हैं, उसे जिस रूप में, जैसा बनाना चाहें, उसी तरह उसका पालन- पोषण कर बनाया जा सकता है। गायत्री विद्यापीठ में बच्चों को शिक्षण के साथ संस्कार देने का क्रम चलाया जा रहा है, यह एक परिवार व समाज निर्माण की दिशा में सार्थक पहल है।

वे गायत्री विद्यापीठ के ३६ वें वार्षिकोत्सव के समापन अवसर पर देसंविवि के मृत्युंजय सभागार में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि बचपन जहाँ खेल का समय होता है, वहीं यह जीवन को गढ़ने और सँवारने का समय भी होता है। उन्होंने विद्यापीठ के बच्चों को भविष्य संवारने हेतु विशेष मार्गदर्शन दिया। संस्था की प्रमुख श्रद्धेया शैलदीदी जी ने कहा कि हार- जीत खेल का एक अनिवार्य अंग है। जीतने से खुशी होती है, पर अपने साथी की जीत से हमें दोहरी खुशी होनी चाहिए। शैलदीदी जी ने पढ़ाई के साथ- साथ विभिन्न रचनात्मक कार्यक्रमों में भागीदारी कर आंतरिक गुणों को विकसित करते रहने के लिए प्रेरित किया।

वार्षिकोत्सव के अवसर पर विद्यार्थियों ने स्कूल के लिए तैयार होना, बतख दौड़, मेढ़क दौड़, बोतल में पानी भरना,नींबू दौड़, बोरा दौड़, रिले रेस, रस्सी कूद, केला रेस, ताइक्वाण्डो सहित कुल १९ प्रकार के एकल व सामूहिक खेलों में दमखम दिखाया। विजयी खिलाड़ियों को शांतिकुज व्यवस्थापक श्री शिवप्रसाद मिश्र, देवसंस्कृति विश्वविद्यालय के कुलपति श्री शरद पारधी, गायत्री विद्यापीठ की व्यवस्था मण्डल की प्रमुख श्रीमती शेफाली पण्ड्याजी ने सम्मानित किया। उपप्रधानाचार्य श्री भास्कर सिन्हा ने बताया कि विद्यापीठ के कक्षा- १ से १२ तक ८०० से अधिक छात्र- छात्राओं ने विभिन्न खेलों में भागीदारी किया।

बाल दिवस के मौके पर आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम में आहुति एवं स्तुति की टीम द्वारा प्रस्तुत समूह नृत्य ने खूब तालियाँ बटोरीं, तो वहीं सप्त आंदोलन लघु नाटिका ने साधना, शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण, नारी जागरण के प्रति जागरूकता का संदेश दिया। समूह कत्थक नृत्य के माध्यम से बच्चों ने वंशिदा अग्रवाल, जाह्नवी, श्रद्धा, प्ररेणा, जागृति, पयस आदि की मनमोहन नृत्य से उपस्थित लोगों को झूमने को मजबूर कर दिया। कार्यक्रम समापन अवसर पर उपप्रधानाचार्य श्री भास्कर सिन्हा ने सभी का आभार प्रकट किया। इस अवसर पर विद्यापीठ परिवार, शांतिकुंज, देसंविवि, हरिपुर कलॉ, भोपतवाला, कनखल, हरिद्वार के अनेक लोग उपस्थित रहे।

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