Published on 2017-11-17
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कोटा। राजस्थान
कोटा के गुमानपुरा मल्टीपरपज स्कूल में २६ से २९ अक्टूबर की तारीखों में विश्वशांति, लोककल्याण एवं पर्यावरण संवर्धन की कामना के साथ देव संस्कृति पुष्टिकरण लोकाराधन २५१ कुंडीय गायत्री महायज्ञ सम्पन्न हुआ। इसकी शानदार सफलता में युवाओं की सक्रियता ने महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई।

समग्र आन्दोलन समाज को प्रगतिशील सोच अपनाने के लिए प्रेरित करता रहा। शांतिकुंज प्रतिनिधि डॉ. बृजमोहन गौड़ ने देवपूजन के समय महायज्ञ के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आज लोगों के पास पैसा है पर सुख, शांति और चैन नहीं है। मनुष्य को यदि सुख और चैन चाहिए तो उसे अध्यात्म मार्ग की ओर ही अग्रसर होना होगा। सादगी, सेवा, परोपकार, प्रेम, आत्मीयता को अपने जीवन का संस्कार बनाना होगा।

तीन दिन चले महायज्ञ में हजारों लोगों ने श्रद्धासिक्त आहुतियों के साथ बुराइयाँ छोड़ने एवं अच्छाइयाँ अपनाने के संकल्प लिये।

कलश यात्रा : विशाल कलश यात्रा में २१०० बहनों ने मस्तक पर कलश, २५१ तुलसी के पौधे, ३०१ ज्वारे तथा मंत्र लिखित पुस्तिकाएँ धारण कीं। शांतिकुंज से पहुँची श्री विष्णु पण्ड्या की टोली ने बहनों को घर- घर जाकर नारी शक्ति का जगाने व बच्चों को संस्कारवान बनाने की प्रेरणा दी।

दीपयज्ञ का उल्लास दर्शनीय था। बहन रेखा, उषा, विभा नैनिवाल आदि कई महिलाओं ने पूरे यज्ञ स्थल को रंगोली एवं हजारों दीपों से सजाया था।

प्रखर प्रयाज
सैकड़ों कार्यकर्त्ता तीन माह तक चले प्रयाज में कोटा, बारां ,बूंदी , झालावाड़, सवाई माधोपुर जिलों के गाँव- गाँव, घर- घर पहुँचे। लोगों को आत्म- उन्नति के लिए नित्य न्यूनतम ५ मिनट गायत्री उपासना एवं राष्ट्र निर्माण के लिए न्यूनतम १ रु. प्रतिदिन अंशदान करने की प्रेरणा दी।

विभूतियों का सम्मान
मंच पर नशामुक्ति, रक्तदान, नेत्रदान, शिक्षा, चिकित्सा, धर्म जागरण जैसे क्षेत्रों में सक्रियता का आदर्श प्रस्तुत करने वाली ३७ विभूतियों को गायत्री परिवार कोटा की ओर से शांतिकुुज प्रतिनिधि डॉ. गौड़ ने उपवस्त्र, युगसाहित्य, स्मृति चिह्न आदि प्रदान करते हुए सम्मानित किया।

महत्त्वपूर्ण उल्लेखनीय प्रसंग
• साहित्य स्टॉल पर समस्त साहित्य ब्रह्मभोज में उपलब्ध कराया गया।
• स्मारिका 'यजन' प्रकाशित की गयी।
• विशाल प्रदर्शनी का उद्घाटन महापौर श्री महेश विजय तथा नगरविकास न्यास के चेयरमैन श्री मेहता ने किया।
• पूर्णाहुति के दिन रक्तदान शिविर भी आयोजित किया गया था।
• जिला संयोजक श्री चतुर्भुज जोशी, मुख्य ट्रस्टी श्री जी.डी. पटेल, श्री हेमराज पांचाल, मल्टीपरपज स्कूल के प्रिंसिपल श्री रूपेश सिंह आदि ने यज्ञ की सफलता में प्रशंसनीय योगदान दिया।


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