Published on 2017-11-19

कार्यकर्त्ताओं के समर्पण, अनुशासन तथा समाज के उत्कर्ष की उत्कट अभिलाषा देख अभिभूत हुए गणमान्य

२८ से ३० अक्टूबर की तारीखों में मात्र ९ हजार लोगों की आबादी वाले कालाहाण्डी जिले के छोटे से नगर धर्मगढ़ में गायत्री परिवार का विशाल सम्मेलन आयोजित हुआ। सभी ३० जिलों के २५००- ३००० कार्यकर्त्ताओं ने इसमें भाग लिया। दीपयज्ञ के दिन आसपास के शहरों के श्रद्धालुओं को मिलाकर लगभग १०,००० लोग समारोह में उपस्थित थे। सब कुछ पूरे अनुशासन और शांति के साथ सम्पन्न हुआ।

सम्मेलन से पूर्व कार्यकर्त्ताओं ने २२ एवं २३ अक्टूबर को सामूहिक श्रमदान कर धर्मगढ़ की सभी सड़कों की सफाई की। कार्यक्रम के दिनों पूरा नगर एक अनूठे आध्यात्मिक उल्लास में डूबा रहा। समापन पर पूरे क्षेत्र की सफाई करके कार्यकर्त्ता लौटे। इस बीच अनेक ऐसे दृश्य सम्मेलन में पधारे गणमान्यों, प्रशासनिक अधिकारियों एवं नगरवासियों ने देखे जिन्हें देखकर सभी अभिभूत थे। आज के युग में ऐसा नि:स्वार्थ सेवाभाव कहाँ दिखाई देता है? स्थानीय प्रशासन के जो अधिकारी सम्मेलन को लेकर आशंकित थे, वे भी जिला समन्वयक श्री सुरेश जी के प्रति श्रद्धावनत दिखाई दिये।

धर्मगढ़ के प्रांतीय सम्मेलन में शांतिकुंज से प्रमुख वक्ता श्री के.पी. दुबे, युवा प्रकोष्ठ प्रभाव, डॉ. डी.पी. सिंह, ग्राम प्रबंधन प्रकोष्ठ प्रभारी, श्री गंगाधर चौधरी एवं श्री नेमूराम साहू, दक्षिण पूर्व जोन प्रभारी के साथ १८ सदस्यीय विशाल टोली पहुँची। जूनागढ़ के विधायक श्री दिव्यशंकर मिश्रा, धर्मगढ़ के विधायक श्री पुष्पेन्द्र सिंह देव, धर्मगढ़ एन.ई.सी. की चेअरपर्सन सुश्री हीरा बाग, भाजप के प्रांतीय अध्यक्ष एवं विधायक श्री बसंत पाण्डा, पूर्व केन्द्रीय रेलमंत्री श्री भक्तचरण दास, प्रदेश के पूर्व मंत्री श्री प्रदीप नायक, श्री हिमांशु शेखर मेहर आदि गणमान्य हस्तियों ने उपस्थित होकर पूरे प्रांत की सृजनशील तरुणाई का उत्सावर्धन किया। सभी गायत्री परिवार की सोच, सक्रियता, अनुशासन एवं राष्ट्रसेवा के संकल्पों के आगे नतमस्तक थे।

कार्यक्रम की रूपरेखा
एक दिन पूर्व २ कि.मी. लम्बी युवा क्रांति रैली के साथ हुआ। इसमें गुरुदेव के २४ श्रवण कुमारों ने काँवड़ में वाङ्मय धारण किये, २४ ने हाथ में मशाल थामी, २५१ बहनों ने कार्यक्रम के निमित्त सम्पन्न मंत्रलेखन अभियान की पोथियाँ मस्तक पर धारण की। आदिवासी लोकनर्तकों ने कलश यात्रा की शोभा में चार चाँद लगा दिये।

२८ अक्टूबर को धर्म ध्वजारोहण के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। तीन दिनों तक प्रगति प्रतिवेदन, शांतिकुंज की टोली के मार्गदर्शन, समूह चर्चाओं का क्रम चलता रहा। पहले दो दिन सायंकाल हृदयस्पर्शी सांस्कृतिक कार्यक्रमों का मंचन हुआ।

दीपयज्ञ की छटा देखते ही बनती थी। पूरा परिसर सुंदर रंगोली से सजा था। वहाँ ५००० दीपक ही नहीं, हर कार्यकर्त्ता उल्लास और प्रकाश से ओतप्रोत था। सभी ने २०१८ के लिए निर्धारित कार्यों के संकल्प लिये। नागपुर में होने वाले युगसृजेता युवा संकल्प समारोह में भागीदारी का उत्साह उभरा।

इस सम्मेलन में कार्यकर्त्ताओं का मार्गदर्शन करने आदरणीय डॉ. प्रणव पण्ड्या जी को पहुँचना था। अपरिहार्य कारणों से नहीं पहुँच पाने पर वीडियो संदेश के माध्यम से अपनी बात उन तक पहुँचायी।

विशिष्ट झलकियाँ
  • नाम के गरीब किन्तु धन और दिल के बेहद अमीर श्री गरीब सुनानी ने स्वच्छता व्यवस्था सँभाली। उनसे नगरपालिका के सफाई कर्मियों का सहयोग लेने का आग्रह किया गया तो, गुरुदेव के गाँधी आश्रम में शौचालय की सफाई का हवाला देते हुए इन्कार कर दिया। स्वयं अपनी टीम के साथ शौचालय सहित सफाई कार्य में जुटे रहे।
  • विधायक श्री दिव्यशंकर मिश्रा स्वयं कुशल पायलट हैं। उन्होंने आद. डॉ. प्रणव पण्ड्या जी को चार्टर्ड प्लेन से लाने की तैयारी की थी। वे शांतिकुंज आकर डॉ. साहब से दीक्षा लेंगे।
  • विधायक श्री पुष्पेन्द्रसिंह देव ने कालाहाण्डी में देव संस्कृति विश्वविद्यालय के निर्माण में पूरा सहयोग करने का मन बना लिया है।
अगला सम्मेलन रायगड़ा उपजोन में
  • रायगड़ा उपजोन के २५० कार्यकर्त्ताओं को अगले सम्मेलन के लिए मशाल हस्तांतरित की गयी, जिसे पाकर वे बहुत उत्साहित हुए।


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