Published on 2017-11-21

नागपुर में आयोजित होने जा रहे 'नवसृजन युवा संकल्प समारोह, दिनांक २६ से २८ जनवरी २०१८' के प्रयाज स्वरूप निकली युवा क्रांति रथ, युवा भारत यात्रा ने सवा महीने में दक्षिण भारत के सभी राज्यों का भ्रमण किया। २५ सितम्बर को कन्याकुमारी से आरंभ हुई युवा भारत यात्रा तमिलनाडु, केरल, पुद्दुचेरी, कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश में युवा क्रांति का शंखनाद करते हुए १ नवम्बर को ओडिशा प्रान्त में प्रवेश कर गयी। रथ संचालक दल के नायक रहे श्री योगेश पाटिल ने बताया कि लगभग ३७ दिनों में युवा क्रांति रथ ने गायत्री परिवार को एक नयी पहचान दिलाने में अद्भुत सफलता प्राप्त की है।

रथ यात्रा का शुभारंभ कन्याकुमारी में बाड़मेर से आये संत श्री तुलसाराम महाराज, विवेकानन्द केन्द्र के उपाध्यक्ष श्री बालकृष्ण जी और दक्षिण जोन प्रभारी शांतिकुंज प्रतिनिधि डॉ. बृजमोहन गौड़ द्वारा रथ को हरी झंडी दिखाने के साथ हुआ। यह यात्रा त्रिवेन्द्रम, बैंगलोर, हैदराबाद, कोच्ची, कोयंबटूर, इरोड, चेन्नई, पुद्दुचेरी, मंगलगिरि, खम्मम, श्रीकाकुलम जैसे अनेक महानगरों और प्रतिदिन कई गाँवों से होकर गुजरी। बड़े- बड़े विद्यालयों में, धार्मिक स्थलों में, सामाजिक संगठनों के बीच प्रतिदिन ३- ४ कार्यक्रम होते रहे।

पूरी यात्रा में १,००,००० युवाओं- विद्यार्थियों तक मिशन का संदेश पहुँचाने में सफलता मिली। रथ की विशाल एलईडी स्क्रीन के माध्यम से दिखाए गये मात्र १० मिनट के प्रेज़ेण्टेशन से लोगों ने गायत्री परिवार के वास्तविक स्वरूप को देखा, पहचाना। मात्र धार्मिक संस्थान होने की धारणा बदली, एक विशाल क्रांतिकारी संगठन के रूप में नयी पहचान बनी। इस यात्रा ने लाखों युवाओं में राष्ट्र निर्माण के महान अभियान से जुड़ने के संकल्प जगाये। कार्यक्रम के समापन पर इस आशय के सामूहिक संकल्प दिलाये गये। आयोजक विद्यालयों के प्रधानाचार्यों ने एक मत से कहा कि युवा क्रांति रथ के माध्यम से उनके विद्यार्थियों को राष्ट्र के नवनिर्माण के लिए प्रेरित किया जाना सौभाग्य की बात है।

युवा क्रांति रथ युवा भारत यात्रा को सफल बनाने के लिए ईरोड के करदमभाई पटेल, हैदराबाद के श्री अनिल राव आदि दक्षिण भारत के कर्मठ कार्यकर्त्ताओं का प्रशंसनीय योगदान मिला।

  • पुद्दुचेरी में मर्चेण्ट नेवी प्रशिक्षण केन्द्र श्री चक्रा इंस्टीट्यूट के लगभग सभी १०० विद्यार्थियों को गायत्री परिवार के कार्य बहुत प्रभावशाली प्रतीत हुए। सभी विद्यार्थी गायत्री परिवार यूथ ग्रुप के नियमित संपर्क में आ गये हैं।
  • युवा क्रांति रथ यात्रा के अनेक सामाजिक संगठनों पर गायत्री परिवार की अमिट छाप पड़ी। नवरात्रि काल में केरल के प्राचीन मंदिरों में आध्यात्मिक कार्यक्रम और उद्बोधन हुए।
  • गायत्री अश्वमेध महायज्ञ, मंगलगिरि के प्रचार- प्रसार की दृष्टि से भी यह युवा भारत रथ यात्रा बहुत उपयोगी सिद्ध हुई। सभी प्रांत के लोगों में अश्वमेध महायज्ञ में भागीदारी का उत्साह जगाया।


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